59 वर्षीय किसान नेकराम शर्मा को पद्मश्री पुरस्कार, मेहनत कर ऐसे हासिल किया मुकाम
HNN / मंडी
गरीबी से तपकर अक्सर ऐसा सोना निकलता है जहां पर विफलता का नाम कम होता है। दसवीं पास करने के बाद 1984 तक नौकरी के नेकराम शर्मा ने काफी प्रयास किये। लेकिन जब सफलता नही लगी हाथ तो खेतीबाड़ी से शुरू कर आज इस मुकाम तक पहुंचे कि हर कोई तारीफ कर रहा है। बता दे कि किसान नेकराम शर्मा जो जिला मंडी के करसोग के रहने वाले है, उन्हें पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है।
नेकराम शर्मा जैविक खेती से जुड़े हैं। करसोग के नांज गांव के साधारण परिवार में जन्मे 59 वर्षीय किसान नेक राम ने पारंपरिक अनाज के सरंक्षण और संवर्धन के लिए असाधारण कार्य किया है। यह इनकी लगन का ही नतीजा है कि आज करसोग क्षेत्र में आधुनिकता के दौर में भी पारंपरिक खेती को तवज्जो दी जाती है।
पिछले 28 सालों से 10वीं कक्षा तक पढ़े नेकराम ने न केवल पारंपरिक अनाज के बीज को संरक्षित कर इसका दायरा बढ़ाया है, बल्कि एक हजार किसानों को जोड़कर लुप्त हो रहे मोटे अनाज को लेकर जागरूकता की अलख भी जगाई। एक-एक किसान परिवार को जोड़ते हुए नौ अनाज की पारंपरिक फसल प्रणाली को बढ़ाया है।
बता दे कि पद्मश्री नेक राम ने बताया कि दसवीं पास करने के बाद 1984 तक उन्होंने नौकरी के प्रयास किए। लेकिन सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने खेतीबाड़ी शुरू की। कीटनाशकों का इस्तेमाल करते उनके जहन में आया कि प्राकृतिक खेती क्यों नहीं हो सकती? उन्होंने इस ओर सोचना शुरू किया तो उनकी सोच और खोज बेंगलुरु तक ले गई। जहां उन्होंने कृषि की पारंपरिक खेती के बारे में जानकारी हासिल की और नौ अनाज प्रणाली के बारे में जाना।