ऊना के बौल गांव के 65 वर्षीय किसान अजमेर सिंह ने एचपी शिवा परियोजना की मदद से बंजर जमीन पर अमरूद की बगिया विकसित की। उनकी मेहनत से अब परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल
बंजर ज़मीन से अमरूद की बगिया तक का सफर
पहले जहां गेहूं और मक्की भी नहीं उगती थी, वहां अब हरियाली लहलहा रही है। अजमेर सिंह ने साढ़े तीन साल पहले 1800 अमरूद के पौधों से शुरुआत की और आज 450 कनाल में बाग विकसित किया है।
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सरकारी सहयोग और आधुनिक तकनीक का लाभ
एचपी शिवा परियोजना के तहत पौधे, ड्रिप इरिगेशन, खाद, पॉलिथीन, फेंसिंग और दवाइयों जैसी सुविधाएं दी गईं। इसके साथ ही नेरी कॉलेज, हमीरपुर से पांच दिवसीय प्रशिक्षण और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन ने खेती को और सफल बनाया।
परिवार और गांव को मिला सहारा
अब पूरा परिवार खेती से जुड़ा है और एक सीजन में ही 1 लाख रुपये से अधिक की आय का अनुमान है। पत्नी तृप्ता देवी के अनुसार यह खेती अब उनके घर की खुशहाली का आधार बन चुकी है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
उपनिदेशक उद्यान विभाग केके भारद्वाज ने बताया कि एचपी शिवा परियोजना से किसानों की आय बढ़ाने के साथ युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। डीसी जतिन लाल ने कहा कि किसानों को पौधारोपण से लेकर मार्केटिंग तक हर स्तर पर सहयोग दिया जा रहा है।
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