70 फीट का रावण, खर्च महज 12 हजार! नाहन की आमवाला सैन पंचायत ने पेश की अनूठी मिसाल
लाखों के सरकारी पुतलों को गांव वालों की पहल से मिली सीख, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कचरे को बनाया रावण दहन का हिस्सा; बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए गायन प्रतियोगिता भी आयोजित

नाहन
दशहरे पर रावण के विशाल पुतले बनाने के लिए जहां लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं नाहन विधानसभा क्षेत्र की आमवाला सैन पंचायत ने महज 12 हजार रुपये में 70 फीट ऊंचा रावण तैयार कर एक अनूठी मिसाल पेश की है। ग्रामीणों की यह पहल कम खर्च में बड़े आयोजन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण संरक्षण, बच्चों को नशे से दूर रखने और आपसी सहयोग से सामाजिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का संदेश भी छिपा है।
इस रावण की सबसे खास बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए दूसरे राज्य से किसी कलाकार को नहीं बुलाया गया। गांव के ही जेबीटी अध्यापक ललित कुमार ने स्थानीय लोगों के सहयोग से 70 फीट ऊंचे पुतले को आकार दिया। ग्रामीणों ने मिल-जुलकर न केवल इसके निर्माण की जिम्मेदारी उठाई, बल्कि पूरे आयोजन को सफल बनाने में भी योगदान दिया।

आमवाला सैन पंचायत के इस आयोजन की असली खासियत रावण दहन के लिए अपनाई गई सोच है। गांव के बच्चों, महिलाओं और अन्य लोगों ने घरों में बेकार पड़े कपड़े, पॉलिथीन और दूसरी अनुपयोगी सामग्री एकत्रित की। इस पहल के जरिए ग्रामीणों ने समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया कि रावण दहन को केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित रखने के बजाय इसे पर्यावरण के प्रति जागरूकता से भी जोड़ा जा सकता है। हालांकि, पॉलिथीन और प्लास्टिक को खुले में जलाना पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए ऐसी सामग्री का सुरक्षित निस्तारण जरूरी है।
पंचायत में दशहरे से पहले नजदीकी काली मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसके साथ ही गांव के प्रतिभाशाली बच्चों को मंच देने के लिए गायन प्रतियोगिता भी रखी गई। प्रतियोगिता के लिए पहले ऑडिशन आयोजित किए गए, लेकिन इसके बाद यह सुनिश्चित किया गया कि सभी बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले। इस पहल के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

गांव के पूर्व प्रधान संदीपक ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को नशे से दूर रखना और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखना है। उन्होंने कहा कि गांव के लोग चाहते हैं कि नई पीढ़ी अपनी परंपराओं से जुड़ी रहे और बदलते समय के साथ आगे बढ़ते हुए हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करे।
आमवाला सैन पंचायत की एक और खासियत यह है कि यहां भंडारे से लेकर रावण निर्माण और दशहरे के आयोजन तक के कार्य ग्रामीण आपसी सहयोग से करते हैं। किसी बाहरी व्यक्ति से चंदा एकत्रित करने के लिए नहीं कहा जाता, बल्कि गांव के लोग स्वयं जिम्मेदारी उठाते हैं। ऐसे में 70 फीट का यह रावण केवल दशहरे के आकर्षण का केंद्र नहीं, बल्कि सामूहिक एकजुटता, स्थानीय प्रतिभा और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक भी बन गया है।