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गिरिपार में भराड़ी पूजन और हुशू मशालों के साथ मनेगा आठों पर्व

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 20 Hours Ago • 1 Min Read

सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में दुर्गा अष्टमी के अवसर पर आठों पर्व पारंपरिक भराड़ी पूजन और हुशू कहलाने वाली मशालें जलाकर मनाया जाएगा। छोटी दिवाली के नाम से प्रसिद्ध इस पर्व के साथ क्षेत्र में दीपावली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। दुर्गा अष्टमी का शुभ मुहूर्त रविवार सुबह से सोमवार सुबह तक रहने के कारण कुछ गांवों में पर्व रविवार और कुछ स्थानों पर सोमवार को मनाया जाएगा।

संगड़ाह

गिरिपार में सदियों पुरानी लोक संस्कृति और परंपराओं के अनुसार दीपावली से करीब तीन सप्ताह पहले दुर्गा अष्टमी पर आठों पर्व मनाया जाता है। इसे क्षेत्र में दीपावली का पहला पड़ाव भी कहा जाता है। वहीं, दीपावली के एक माह बाद आने वाली अमावस्या पर कई गांवों में बूढ़ी दिवाली मनाने की परंपरा है। गिरिपार में दिवाली और बूढ़ी दियाली के आयोजन चौदश, अवांस, पोड़ोई, दूज, तीज, चौथ और पंचमी के नाम से करीब एक सप्ताह तक चलते हैं।

भराड़ी के फूलों से होता है पूजन

आठों के दिन भराड़ी नामक विशेष जंगली फूलों के डमरू जैसे गुच्छे बनाकर मां भवानी अथवा गौरा का पूजन किया जाता है। सिरमौर के पहाड़ी जंगलों में मिलने वाले सफेद रंग के इन फूलों को घर का एक सदस्य सुबह बिना कुछ खाए-पिए और किसी से बात किए जंगल से लाता है। पूजन के बाद फूलों के गुच्छे को जल या अग्नि में प्रवाहित किया जाता है। सुबह बनाई गई खिचड़ी का भोग लगाकर भराड़ी पूजन की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

सूर्यास्त के बाद बच्चों और कन्याओं को धोरोटी-भात, खिचड़ी तथा अन्य पारंपरिक व्यंजन प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं। इसके बाद बाबड़ी घास और अन्य ज्वलनशील पदार्थों से तैयार हुशू मशालें जलाकर सिर के ऊपर घुमाई जाती हैं। इस दौरान दानवीर राजा बलि का जयघोष किया जाता है। क्षेत्र में प्रचलित मान्यता के अनुसार ऐसा करने से कष्टों, आपदाओं और बुरी शक्तियों के प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

करीब 150 पंचायतों में प्रचलित है परंपरा

सिरमौर के संगड़ाह, शिलाई, कफोटा और राजगढ़ उपमंडलों की करीब 150 पंचायतों में आठों अथवा दुर्गा अष्टमी का पर्व पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। गिरिपार क्षेत्र में माघी, बूढ़ी दिवाली, दूज, गुगा नवमी और पांजवी जैसे त्योहार भी विशिष्ट स्थानीय परंपराओं के साथ मनाए जाते हैं। इन्हीं सांस्कृतिक परंपराओं, त्योहारों और क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर गिरिपार के हाटी समुदाय को भारत सरकार ने अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया है।

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