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इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त संदेश: इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की डिग्री लेकर नहीं कर सकते एलोपैथी, झोलाछाप डॉक्टरों पर कसा शिकंजा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 13 Hours Ago • 1 Min Read

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रोहोम्योपैथी या गैर-मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र के आधार पर एलोपैथिक चिकित्सा करना अवैध है। अदालत ने कहा कि बिना मान्यता प्राप्त एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण के कोई भी व्यक्ति एलोपैथिक उपचार नहीं कर सकता। कोर्ट ने ऐसे मामलों में प्रशासन को नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने का अधिकार होने की भी पुष्टि की।

प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झोलाछाप डॉक्टरों और बिना वैध योग्यता के एलोपैथिक चिकित्सा करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि केवल इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का डिप्लोमा या अन्य गैर-मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र के आधार पर एलोपैथिक चिकित्सा करना पूरी तरह अवैध है और यह मरीजों के जीवन से खिलवाड़ के समान है।मामला एटा निवासी संतोष कुमार शर्मा से जुड़ा था, जिन्होंने एनआईओएस के सामुदायिक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के आधार पर अस्पताल संचालित करने और एलोपैथिक उपचार की अनुमति मांगी थी। मामले की जांच के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने पाया कि अस्पताल का विधिवत पंजीकरण नहीं था। इसके अलावा बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन, अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) तथा संक्रमण नियंत्रण जैसी अनिवार्य व्यवस्थाएं भी मौजूद नहीं थीं।

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि बिना मान्यता प्राप्त एमबीबीएस डिग्री और संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण के कोई भी व्यक्ति एलोपैथिक चिकित्सा नहीं कर सकता। अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी हवाला देते हुए कहा कि राज्य का पहला दायित्व नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना वैध योग्यता के चिकित्सा करना कानून का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में प्रशासन सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। अदालत के इस फैसले को झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ एक अहम और कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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