स्कूल समय में बदलाव के बाद बंगाणा में बस सेवा की कमी से बढ़ सकती हैं विद्यार्थियों की मुश्किलें
स्कूल समय बदला, बस सेवा की कमी से बंगाणा के विद्यार्थियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
ऊना/वीरेंद्र बन्याल
जिले में गर्मी और उमस को देखते हुए जिला प्रशासन ने शिक्षण संस्थानों का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया है। प्रशासन के इस फैसले से विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन उपमंडल बंगाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त बस सेवा उपलब्ध न होने के कारण छात्रों की परेशानी बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
बंगाणा उपमंडल के कई दूरदराज गांवों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी रोजाना सरकारी और निजी बसों के माध्यम से विभिन्न स्कूलों तक पहुंचते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही कई रूटों पर बसों की संख्या सीमित है। ऐसे में स्कूलों की बदली समयसारणी के अनुसार यदि बसों के संचालन में आवश्यक बदलाव नहीं किया गया तो विद्यार्थियों को सुबह स्कूल पहुंचने के साथ-साथ दोपहर बाद छुट्टी होने पर घर लौटने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
दोपहर 2 बजे छुट्टी के बाद परिवहन सबसे बड़ी चिंता
अभिभावकों के अनुसार विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी समस्या दोपहर 2 बजे स्कूलों की छुट्टी के बाद उत्पन्न हो सकती है। कई रूटों पर इस समय पर्याप्त बसें उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसे में विद्यार्थियों को लंबे समय तक बसों का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, कुछ दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को निजी वाहनों या अन्य वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहने की मजबूरी भी बन सकती है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल समय में बदलाव विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है, लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब स्कूलों के नए समय के अनुरूप परिवहन व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
एचआरटीसी और निजी बस संचालकों से समायोजन की मांग
अभिभावकों ने एचआरटीसी तथा निजी बस संचालकों से मांग की है कि बंगाणा उपमंडल के प्रमुख स्कूल रूटों की समीक्षा कर बसों के समय में आवश्यक समायोजन किया जाए। विशेषकर दोपहर 2 बजे स्कूलों की छुट्टी के बाद विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त बस सेवा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से भी इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेने की मांग की है, ताकि स्कूल समय में बदलाव के बाद विद्यार्थियों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल समय में बदलाव के साथ परिवहन व्यवस्था का समन्वय होना भी उतना ही जरूरी है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और वे सुरक्षित तरीके से समय पर घर पहुंच सकें।
