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  • सिरमौर में तैनात रहे बसंत किरण बाबू बने चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट

    सिरमौर में तैनात रहे बसंत किरण बाबू बने चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट

    2008 बैच के IFS अधिकारी को लेवल-14 में पदोन्नति, राज्य स्तर पर सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी

    नाहन

    हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2008 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारी बसंत किरण बाबू को बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी देते हुए उन्हें चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट के पद पर पदोन्नत किया है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार उन्हें 14वें वेतनमान में पदोन्नति दी गई है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

    बसंत किरण बाबू वर्तमान में जिला सिरमौर में कंजरवेटर के पद पर तैनात हैं और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने वन संरक्षण को लेकर सख्त और परिणामकारी रणनीति अपनाई। अवैध कटान, लकड़ी तस्करी और अवैध खनन के खिलाफ चलाए गए अभियानों से जिला स्तर पर वन प्रशासन की कार्यप्रणाली को नई धार मिली।

    सरकारी आदेश के अनुसार पदोन्नति के उपरांत भी अधिकारी आगामी आदेशों तक अपने वर्तमान तैनाती स्थल पर ही कार्यभार संभालते हुए राज्य स्तरीय दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

    इसी अधिसूचना में 2008 बैच की IFS अधिकारी बसु कौशल को भी चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट के पद पर पदोन्नत किया गया है। दोनों अधिकारियों की पदोन्नति से प्रदेश में वन विभाग के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिलने की बात कही जा रही है।

    चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट के रूप में बसंत किरण बाबू की भूमिका अब प्रदेशभर में वन नीति, संरक्षण रणनीति और निगरानी तंत्र को दिशा देने वाली होगी।

  • नाहन: स्कूल प्रवक्ता संघ ने सीबीएसई में नई परीक्षा और अलग कैडर की योजना का किया विरोध

    नाहन: स्कूल प्रवक्ता संघ ने सीबीएसई में नई परीक्षा और अलग कैडर की योजना का किया विरोध

    सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का स्वागत, शिक्षकों के लिए अतिरिक्त परीक्षा अव्यावहारिक

    नाहन

    सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई से संबद्ध करने के सरकार के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए स्कूल प्रवक्ता संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षकों के लिए अलग कैडर बनाने और नई परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव पूरी तरह अव्यावहारिक है।

    यह निर्णय संघ की आम सभा में मंगलवार को डाइट नाहन में आयोजित बैठक में लिया गया।संघ ने कहा कि वर्तमान में कार्यरत नियमित शिक्षक पहले ही कर्मचारी चयन आयोग और लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित होकर सेवा में आए हैं।

    ऐसे में सीबीएसई विद्यालयों के लिए विशेष परीक्षा करवाने का कोई औचित्य नहीं बनता। संघ ने यह भी तर्क दिया कि शिक्षा विभाग जहां सैकड़ों शिक्षकों की आउटसोर्स भर्ती कर रहा है और अस्थायी शिक्षकों की सेवाएं जारी रखने का प्रावधान बना रहा है,

    वहीं 15 से 25 वर्षों के अनुभव वाले शिक्षकों को विशेष परीक्षा से गुजरना न्यायसंगत नहीं है।संघ ने बताया कि विभागीय शिक्षक समय-समय पर जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

    ऐसे में उनके लिए पुनः परीक्षा करवाना शिक्षा विभाग की योजना को अव्यवहारिक बनाता है। संघ ने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक स्वयं सीबीएसई स्कूल में कार्य नहीं करना चाहता, तो विकल्प के तौर पर अन्य शिक्षकों से सहमति ली जा सकती है,

    लेकिन नई परीक्षा या अलग कैडर बनाना अनुचित है।संघ के प्रतिनिधियों में हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ के राज्य चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर, राज्य विशिष्ट सदस्य नरेंद्र नेगी,

    जिला अध्यक्ष डॉ. आईडी राही, राज्य संरक्षक रमेश नेगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय शर्मा, महिला विंग सिरमौर अध्यक्ष संध्या चौहान, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा, महासचिव दिनेश शर्मा और कोषाध्यक्ष लाल सिंह ठाकुर शामिल थे।

    बैठक में संघ ने मांग की कि सीबीएसई और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सभी विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के पद सृजित किए जाएं और उन्हें संयुक्त वरिष्ठता के आधार पर भरा जाए।

    संघ ने यह भी कहा कि स्थानांतरण नीति में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है और सभी शिक्षकों को सीबीएसई में पढ़ाने का अवसर मिलना चाहिए।

    संघ ने प्रस्ताव रखा कि सीबीएसई विद्यालयों में शिक्षक की अधिकतम सेवाकाल दस वर्ष और न्यूनतम तीन वर्ष रखा जाए, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों के शिक्षक भी इस अवसर का लाभ ले सकें।

    साथ ही संघ ने आउटसोर्स भर्ती का विरोध किया और चेतावनी दी कि इससे शिक्षकों में असमानता और विभाजन पैदा होगा।

    संघ ने लंबित वेतनमान और महंगाई भत्ते की किश्त जारी करने की भी मांग उठाई। अंत में संघ ने शिक्षा निदेशक, स्कूल शिक्षा हिमाचल प्रदेश को स्कूल शिक्षा उप निदेशक गुणवत्ता एवं उच्च के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।

  • सिरमौर को मिला नया जिला कल्याण अधिकारी, गावा सिंह नेगी ने संभाला कार्यभार

    सिरमौर को मिला नया जिला कल्याण अधिकारी, गावा सिंह नेगी ने संभाला कार्यभार

    नाहन

    सिरमौर जिला में कल्याण विभाग की कमान अब गावा सिंह नेगी के हाथों में होगी। सोमवार को उन्होंने जिला कल्याण अधिकारी के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण कर लिया।

    कार्यभार संभालते ही उन्होंने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।गावा सिंह नेगी मूल रूप से जिला किन्नौर के लबरंग गांव से संबंध रखते हैं।

    उन्होंने अपने शासकीय सेवाकाल की शुरुआत वर्ष 2010 में जनजातीय कल्याण अधिकारी के रूप में की थी। वर्ष 2022 में जिला कल्याण अधिकारी के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने सबसे पहले जिला किन्नौर में सेवाएं दीं।

    इसके बाद वे जिला सोलन में जिला कल्याण अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे।कार्यभार ग्रहण करने के बाद गावा सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करते हुए कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।

    उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा।

    नए जिला कल्याण अधिकारी की तैनाती से सिरमौर में सामाजिक सुरक्षा, अनुसूचित वर्गों और जरूरतमंद तबके से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • 25 साल की सेवा के बाद विक्रम ठाकुर ने संभाला सिरमौर में जिला पंचायत अधिकारी का कार्यभार

    25 साल की सेवा के बाद विक्रम ठाकुर ने संभाला सिरमौर में जिला पंचायत अधिकारी का कार्यभार

    नाहन |

    हिमाचल दस्तक ब्यूरोप्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग में 25 वर्षों तक विभिन्न पदों पर सेवाएं देने वाले विक्रम ठाकुर ने सोमवार शाम जिला सिरमौर मुख्यालय नाहन में जिला पंचायत अधिकारी का कार्यभार संभाल लिया है।

    कार्यभार ग्रहण करते ही उन्होंने पंचायत चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं।सोमवार को हुई हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में हाईकोर्ट के निर्णय के अनुसार पंचायत चुनाव कराने का फैसला लिया गया है।

    इसी कड़ी में सिरमौर में नवनियुक्त जिला पंचायत अधिकारी ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं।विक्रम ठाकुर मूल रूप से जिला सिरमौर के श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के द्राबिल गांव के रहने वाले हैं। जबकि यशवंत विहार में भी उन्होंने अपना घर बनाया हुआ है।

    उन्होंने वर्ष 2001 में जिला मंडी में पंचायत ऑडिटर के रूप में पंचायती राज विभाग में सेवाकाल की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने शिमला और नाहन में विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं।पदोन्नति के बाद उन्होंने पंचायत अधिकारी निदेशालय शिमला में कार्य किया।

    इसके उपरांत पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थान मशोबरा में प्रशिक्षक के रूप में रहते हुए प्रदेश के पंचायती राज प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया। बाद में वे नाहन में जिला ऑडिट अधिकारी के पद पर तैनात रहे।

    विभागीय पदोन्नति के बाद विक्रम ठाकुर ने प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में जिला पंचायत अधिकारी के रूप में दायित्व निभाया।

    जिला ऑडिट अधिकारी रहते हुए भी वे लंबे समय तक सिरमौर में जिला पंचायत अधिकारी का कार्य देख चुके हैं।जिला पंचायत अधिकारी विक्रम ठाकुर ने बताया कि प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पंचायत चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और सभी संबंधित प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

  • शिक्षा विभाग को मिले 50 ग्रेड-वन सुपरिंटेंडेंट, पांच दिन में ज्वाइनिंग अनिवार्य

    शिक्षा विभाग को मिले 50 ग्रेड-वन सुपरिंटेंडेंट, पांच दिन में ज्वाइनिंग अनिवार्य

    हिमाचल नाऊ न्यूज हमीरपुर

    हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत 50 अधीक्षक ग्रेड-टू को पदोन्नत कर अधीक्षक ग्रेड-वन नियुक्त किया गया है। पदोन्नत अधिकारियों को अपने-अपने कार्यस्थलों पर पांच दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से ज्वाइन करना होगा।

    निर्धारित समय सीमा में ज्वाइनिंग न करने की स्थिति में पदोन्नति आदेश स्वतः निरस्त माने जाएंगे और अगली वरिष्ठता सूची के अनुसार अधिकारी को पदोन्नति दी जाएगी।

    उच्च शिक्षा सचिव आईएएस राकेश कंवर ने सभी पदोन्नत ग्रेड-वन अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे पांच दिनों के भीतर अपनी ज्वाइनिंग रिपोर्ट निदेशक उच्च शिक्षा को भेजना सुनिश्चित करें।

    स्पष्ट किया गया है कि ज्वाइनिंग अवधि में किसी भी प्रकार का विस्तार नहीं दिया जाएगा। वहीं विनोद कुमार और देवेंद्र सिंह को अपनी वर्तमान तैनाती स्थल पर ही नई जिम्मेदारी संभालने के आदेश दिए गए हैं।

    इन दोनों अधिकारियों को अपनी ज्वाइनिंग रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से उपनिदेशक उच्च शिक्षा कांगड़ा (धर्मशाला) को भेजनी होगी।

    पदोन्नत अधिकारियों में राजेश कुमार को प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय किन्नौर, जगदीश चंद को डीएसई शिमला, रोशनी देवी को महाविद्यालय कुल्लू, समिता देवी को महाविद्यालय तीसा,

    राजेश कुमार को महाविद्यालय पालमपुर, नरेश कुमार चौहान को प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय लाहुल-स्पीति, अश्वनी कुमार को महाविद्यालय धर्मशाला, कुलदीप कुमार को महाविद्यालय खुंडियां,

    पवन कुमार को प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय ऊना, शशिकांता को महाविद्यालय सुगभटोली, कपिल चटर्जी को महाविद्यालय धर्मपुर, सत्य प्रकाश वर्मा को महाविद्यालय ठियोग,

    शमशेर सिंह को महाविद्यालय हरिपुर गुलेर और हेतराम वर्मा को पदोन्नत किया गया है।इसके अलावा आरकेएमवी शिमला में सुमनलता, महाविद्यालय नादौन में कमलेश गुलेरिया,

    डीएसई शिमला में अजय कुमार, अनिल कुमार, सुशील बसोली, वीना कुमारी, चिंतामणि, दीपक और त्रिलोक ठाकुर, महाविद्यालय बैजनाथ में अंजना राणा, महाविद्यालय झंडूता में अंजु शर्मा,

    महाविद्यालय बंगाणा में अश्वनी कुमार, महाविद्यालय धलियारा में बरिंद्र मोहन, महाविद्यालय करसोग में गोपाल ठाकुर, महाविद्यालय अंब में गुलशन राय, महाविद्यालय हरिपुरधार में विनय मोहन,

    महाविद्यालय संजौली में संजीव कुमार, महाविद्यालय नालागढ़ में राजेश कुमार, उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय ऊना में विरेंद्र कुमार, उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय बिलासपुर में जय सिंह गर्ग,

    महाविद्यालय बड़ोह (कांगड़ा) में सुमन कुमारी, उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय कांगड़ा में अनुपम शर्मा, उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय शिमला में अमर चंद, महाविद्यालय कोटशेरा में सुनीता पटियाल,

    महाविद्यालय बड़सर में विनोद कुमार, महाविद्यालय नौरा में दमनदीप, महाविद्यालय राजगढ़ में सुलेखा, उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय किन्नौर में चंद्र प्रकाश, महाविद्यालय पांगी में धर्म सिंह, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय चंबा में सुनील कुमार,

    प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय बिलासपुर में सुशील कुमार तथा उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय मंडी में चमन लाल को अधीक्षक ग्रेड-वन पद पर पदोन्नत किया गया है।

    शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों के बाद जारी इस आदेश को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली को गति मिलने की उम्मीद है।

  • विधायक अजय सोलंकी ने वरिष्ठ नागरिकों को बताया प्रदेश के विकास का आधार ,बोले​ पेंशनर्स का सम्मान हमारी प्राथमिकता

    विधायक अजय सोलंकी ने वरिष्ठ नागरिकों को बताया प्रदेश के विकास का आधार ,बोले​ पेंशनर्स का सम्मान हमारी प्राथमिकता

    नाहन:

     जिला मुख्यालय नाहन के पायल रेस्तरां में बुधवार को ‘राष्ट्रीय पेंशनर दिवस’ बड़े ही हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मनाया गया। यह अवसर केवल एक उत्सव का नहीं, बल्कि प्रदेश के निर्माण में अपना जीवन समर्पित करने वाले कर्मठ व्यक्तित्वों के प्रति आभार व्यक्त करने का भी रहा।

    कार्यक्रम में स्थानीय विधायक अजय सोलंकी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।

    ​जिला सिरमौर पेंशनर एंड सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष ओएल चौहान, वरिष्ठ उपप्रधान जीएस पंवार और महासचिव प्रीतम सिंह चौहान सहित अन्य पदाधिकारियों ने विधायक अजय सोलंकी का हिमाचली गौरव ‘बुशहरी टोपी’ पहनाकर भव्य स्वागत किया।

    ​सौहार्दपूर्ण वातावरण में रखीं अपनी मांगें

    ​संबोधन के दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष ओएल चौहान ने मुख्य अतिथि के समक्ष अपनी समस्याओं को बड़े ही सकारात्मक ढंग से साझा किया। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि जिस सरकार ने सत्ता में आते ही ओपीएस बहाल कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है,

    वहीं सरकार पेंशनर्स की लंबित मांगों जैसे कि एरियर, महंगाई राहत (DR) की बकाया किस्तें और जेसीसी (JCC) के गठन पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। पेंशनर्स ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री जल्द ही जेसीसी की बैठक बुलाकर इन वित्तीय मुद्दों का समाधान करेंगे।

    ​विधायक अजय सोलंकी ने पेंशनर्स को संबोधित करते हुए कहा कि बुजुर्गों का अनुभव और उनका मार्गदर्शन समाज की सबसे बड़ी पूंजी है।

    उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा, “मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पेंशनर्स की लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री जल्द ही जेसीसी की बैठक बुला सकते हैं, जिसमें सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा।

    ​बुजुर्गों की सहूलियत के लिए विधायक के बड़े ऐलान

    ​वरिष्ठ नागरिकों की स्थानीय समस्याओं पर त्वरित संज्ञान लेते हुए विधायक ने रानीताल स्थित डे-केयर सेंटर के लिए अपनी ओर से पंखे देने की घोषणा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि शहर में यातायात की सुगमता के लिए एक नई मुद्रिका बस चलाई जाएगी और आगामी ई-रिक्शा सेवा में बुजुर्गों के लिए न्यूनतम किराया सुनिश्चित किया जाएगा।

    इसके अलावा, उन्होंने नाहन के ऐतिहासिक तालाबों के संरक्षण और बाजारों में दोपहिया वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही को रोकने के लिए प्रशासन के माध्यम से उचित कदम उठाने का भरोसा भी दिया।

    इस मौके पर चीफ पैटर्न आरएस चौहान मुख्य सलाहकार आरपीएस ठाकुर, ज्वाइंट सेक्रेटरी धनवीर सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष नीना कौशिक, एचएस नेगी, रण सिंह भटनौर, एम आर पुंडीर, मुबारक अली, टी आर वर्मा आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

  • संगड़ाह के सुरेश शर्मा बने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक

    संगड़ाह के सुरेश शर्मा बने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक

    सिरमौर ज़िला के डाहर गाँव में ख़ुशी का माहौल; उन्होंने तहसील व ज़िला कल्याण अधिकारी के रूप में दी हैं उत्कृष्ट सेवाएँ

    ​संगड़ाह।

    हिमाचल प्रदेश के सिरमौर ज़िला के उपमंडल मुख्यालय संगड़ाह के नज़दीकी गाँव डाहर के मूल निवासी, सुरेश शर्मा जिन्हें गुड्डू के नाम से भी जाना जाता है, को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में संयुक्त निदेशक के उच्च पद पर पदोन्नत किया गया है।​

    उनकी इस पदोन्नति से न केवल उनके गृह क्षेत्र संगड़ाह और डाहर गाँव, बल्कि पूरे ज़िले में उत्साह और ख़ुशी की लहर है। स्थानीय लोग उन्हें सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से बधाई दे रहे हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं।

    ​सुरेश शर्मा का सरकारी सेवाओं में एक लम्बा और सफल कार्यकाल रहा है। इस पदोन्नति से पहले, उन्होंने प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में ज़िला कल्याण अधिकारी और उपनिदेशक जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य किया है।

    अपने शुरुआती करियर में, उन्होंने संगड़ाह में तहसील कल्याण अधिकारी तथा बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के रूप में भी सेवाएँ प्रदान की हैं।

    उनके पास सामाजिक कल्याण कार्यों का गहरा अनुभव है।सुरेश शर्मा के पिता, जगत राम शर्मा, भी सरकारी सेवा में रहे हैं और उन्होंने नायब तहसीलदार के पद से सेवानिवृत्ति प्राप्त की है।​

    पदभार संभालने के बाद सुरेश कुमार शर्मा ने अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा कि, उनकी पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता सरकार और विभाग की सभी कल्याणकारी योजनाओं को बिना किसी देरी के, सही समय पर, योग्य लाभार्थियों तक पहुँचाना होगी।

    उन्होंने ज़ोर दिया कि वह ज़मीनी स्तर पर लोगों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।​संगड़ाह क्षेत्र के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि उनके क्षेत्र का एक व्यक्ति प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में इतने उच्च पद पर अपनी सेवाएँ देगा।

  • धर्मशाला में पेंशनर्स का प्रदर्शन, विधानसभा जाने से रोके गए

    धर्मशाला में पेंशनर्स का प्रदर्शन, विधानसभा जाने से रोके गए

    हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन पेंशनर्स ने धर्मशाला में डीए सहित लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड के चलते रैली को विधानसभा गेट तक नहीं जाने दिया गया और स्थिति तनावपूर्ण रही।

    धर्मशाला

    डीए बढ़ाने व भत्ते जारी करने की मांग तेज
    प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे पेंशनर्स पुलिस ग्राउंड से रैली निकालते हुए जोरावर स्टेडियम तक पहुंचे, जहां सुरक्षा बलों ने उन्हें विधानसभा जाने से रोक दिया। पेंशनर्स के अनुसार महंगाई भत्ता (डीए), चिकित्सा भत्ता और अन्य आर्थिक लाभ लंबे समय से लंबित हैं, जिन्हें तुरंत जारी किया जाना चाहिए।

    बैरिकेड हटाने की कोशिश, तनाव बढ़ा
    प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा का रुख करने का प्रयास किया और बैरिकेड हटाने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और सभा सीमित दायरे में रोक दी गई।

    जयराम ठाकुर का काफिला रोका, पैदल जाना पड़ा आगे
    प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर जब विधानसभा जा रहे थे, तो पेंशनर्स ने उनका काफिला रोक लिया। हंगामे के बीच उन्हें गाड़ी छोड़कर पैदल ही बैरिकेड पार करते हुए विधानसभा परिसर की ओर जाना पड़ा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर आश्वासन दिया कि उनकी मांगें सदन में उठाई जाएंगी। बाद में संघ के 2–3 प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री से मिलने भेजा गया।

  • प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 17 एचएएस अधिकारियों के तबादले, कई अहम पद प्रभावित​

    प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 17 एचएएस अधिकारियों के तबादले, कई अहम पद प्रभावित​

    शिमला​

    हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए हिमाचल प्रशासनिक सेवा (HAS) काडर के 17 अधिकारियों को इधर से उधर किया है। धर्मशाला रवाना होने से ठीक पहले सरकार ने इन अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए, जिससे कई महत्त्वपूर्ण उपमंडलों और राजस्व पदों पर नई नियुक्तियाँ हुई हैं।​

    प्रमुख तबादले और नई जिम्मेदारियाँ​इस फेरबदल में, एसडीएम सिविल कोटली असीम सूद को बदलकर आरटीओ फ्लाइंग स्क्वॉयड, कांगड़ा में तैनाती दी गई है, जहाँ वह मनीष कुमार सोनी को भारमुक्त करेंगे।​अभिषेक बरवाल, जो सहायक आयुक्त राजस्व एवं तहसीलदार कल्पा के पद पर थे, उन्हें अब एसडीएम सिविल कोटखाई की जिम्मेदारी मिली है।​

    नियुक्ति का इंतजार कर रहीं कुनिका अक्कर को एसडीएम सिविल कम परियोजना निदेशक डीआरडीए, केलांग के पद पर तैनाती मिली है।​सहायक आयुक्त राजस्व एवं तहसीलदार चंबा सदर, दीक्षित राणा को एसडीएम सिविल कोटली लगाया गया है।​एसडीएम चच्योट के पद पर देवीराम की जगह विचित्र सिंह को एसडीएम बालीचौकी से स्थानांतरित कर तैनात किया गया है, जबकि देवीराम अब एसडीएम चच्योट की जिम्मेदारी संभालेंगे।​

    नियुक्ति के इंतजार में रहे राजेश कुमार को एसडीएम भरमौर और चेतन चौहान को एसडीएम चुराह के पद पर तैनाती दी गई है।​

    छुट्टी और अन्य स्थानांतरण​फेरबदल में कुछ अधिकारियों को अवकाश पर भेजने की भी मंजूरी दी गई है:

    ​एसडीएम केलांग आकांक्षा शर्मा को मातृत्व अवकाश (Meternity Leave) दिया गया है।​एसडीएम कोटखाई मोहन लाल को स्टडी लीव (Study Leave) पर जाने की मंजूरी मिली है।​

    इसके अलावा, सहायक आयुक्त एवं तहसीलदार संधोल विपिन कुमार और सहायक आयुक्त एवं तहसीलदार इंदौरा अमनदीप सिंह को कार्मिक विभाग में रिपोर्ट देने को कहा गया है।

    सहायक आयुक्त एवं तहसीलदार परागपुर चिराग शर्मा को सहायक आयुक्त उपायुक्त हमीरपुर के साथ लगाया गया है। सहायक आयुक्त एवं तहसीलदार पूजा अधिकारी भी कार्मिक विभाग, शिमला में रिपोर्ट करेंगी।​

    अन्य महत्त्वपूर्ण स्थानांतरणों में प्रवीण कुमार (तहसीलदार कल्पा), अंशु चंदेल (खुडियां), कार्तिकेय शर्मा (जुन्गा), डॉ. अभिषेक सिंह ठाकुर (संगड़ाह), और बबिता धीमान (सहायक आयुक्त राजस्व एवं तहसीलदार रामशहर) शामिल हैं।

  • हिमाचल पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल

    हिमाचल पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल

    4 अधिकारियों के तबादला आदेश रद्द, 2 की नई पोस्टिंग

    शिमला।

    हिमाचल प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए छह अधिकारियों के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। इस फेरबदल में चार पुलिस अधिकारियों के पूर्व में जारी तबादला आदेशों को रद्द कर दिया गया है, जबकि दो अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है।

    🔴 प्रमुख तबादला आदेश रद्द

    ​सरकार ने 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी डीके चौधरी (प्रिंसिपल, पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, डरोह) के डीआईजी, साइबर क्राइम, धर्मशाला के पद पर किए गए तबादले को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, डीआईजी, उत्तर रेंज, धर्मशाला, सौम्या सांबशिवन को प्रिंसिपल, पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, डरोह के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।

    🔄 एचपीएस अधिकारियों के स्थानांतरण में बदलाव

    ​एचपीएस अधिकारियों के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं:

    • हितेश लखनपाल (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, चंबा) को अब कमांडेंट, 12वीं होमगार्ड बटालियन, ऊना में स्थानांतरित किया गया है।
    • प्रमोद चौहान (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, लीव रिजर्व, पुलिस मुख्यालय, शिमला) को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, शिमला (अवकाश आरक्षित) के रूप में नई नियुक्ति मिली है।

    ❌ रद्द किए गए अन्य तबादला आदेश

    ​निम्नलिखित एचपीएस अधिकारियों के पूर्व में जारी तबादला आदेश भी रद्द कर दिए गए हैं:

    • योगेश दत्त (उप पुलिस अधीक्षक, 5वीं आईआरबीएन, बस्सी) का सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, बद्दी का तबादला।
    • डॉ. प्रतिभा चौहान (उप पुलिस अधीक्षक, सतर्कता ब्यूरो, बद्दी) का 5वीं आईआरबीएन, बस्सी का तबादला।
    • संजय शर्मा (उप पुलिस अधीक्षक, पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, डरोह) का एसडीपीओ, दाड़लाघाट का तबादला।
    • शेर सिंह (डीएसपी, 5वीं आईआरबीएन) का एसडीपीओ, चुवाड़ी, चंबा का तबादला।
    • योग राज (एसडीपीओ, चुवाड़ी, चंबा) का एसडीपीओ, बद्दी का स्थानांतरण।

    ​ये बदलाव पुलिस प्रशासन में कार्यक्षमता और समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए गए हैं।