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News related to himachal state government employees.

  • केसीसी बैंक के 1300 कर्मचारियों को मिलेगा 8.33 फीसदी बोनस

    केसीसी बैंक के 1300 कर्मचारियों को मिलेगा 8.33 फीसदी बोनस

    HNN/कांगड़ा

    कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक समिति के कर्मचारियों को 8.33 फीसदी बोनस (19 कार्यदिवस का वेतन) मिलेगा। इस साल दिवाली तक बोनस का लाभ हर कर्मचारी को मिलेगा। बैंक की करीब 220 शाखाओं में 1300 के करीब कर्मचारी हैं।

    बैंक के चेयरमेन कुलदीप सिंह पठानिया की अध्यक्षता में निदेशक मंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में लिए इस निर्णय से बैंक कर्मचारियों में खुशी की लहर है। इसके साथ ही बैंक की ओर से पदोन्नति परीक्षा को लेकर भी चर्चा हुई।

    करीब आठ साल बाद पदोन्नति परीक्षा आठ सितंबर को होगी। पारदर्शिता के लिए परीक्षा आईबीपीएस के माध्यम से होगी। बैंक में सेवारत ग्रेड-चार कर्मचारियों को बैंक प्रबंधक बनने का मौका मिलेगा। करीब 400 कर्मचारी इस परीक्षा में भाग लेंगे।

    बीओडी ने वन टाइम सेटलमेंट के तहत कुछ ऋण मामलों को निपटाने की अनुमति दी। महाप्रबंधक की अनुपस्थिति में डीजीएम ने बैठक बैठक की कार्यवाही का संचालन किया। पांच बैठकों में नहीं आए प्रबंध निदेशक बीओडी की बैठक में बैंक प्रबंध निदेशक फिर से नदारद रहे। यह लगातार पांचवीं बैठक है, जिसमें बैंक के एमडी अनुपस्थित रहे। दरअसल वर्तमान सरकार के शुरुआत में ही जब बीओडी की बैठक हुई थी तो उस दौरान एमडी और बीओडी सदस्यों के बीच नोंकझोक हुई थी। इसके बाद एमडी बीओडी की बैठकों में नहीं आ रहे हैं। बीओडी सदस्यों ने एमडी की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए प्रदेश सरकार से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप की मांग की है।

  • कर्मचारियों को 5 सितंबर को मिलेगा वेतन, पेंशनरों को 10 को पेंशन

    कर्मचारियों को 5 सितंबर को मिलेगा वेतन, पेंशनरों को 10 को पेंशन

    HNN/शिमला

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि राज्य के कर्मचारियों को इस महीने का वेतन 5 सितंबर को और पेंशनरों को पेंशन 10 सितंबर को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम सरकार की ओर से उठाए गए कर्ज पर ब्याज की बचत करने के लिए उठाया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को वेतन और पेंशन की अदायगी हर महीने पहली तारीख को करनी पड़ती है, लेकिन बाजार से कर्ज उठाने की सीमा केवल 2,317 करोड़ रुपये ही बची है। उन्होंने कहा कि सरकार व्यय की प्राप्तियों के साथ मैपिंग कर हर माह लगभग तीन करोड़ रुपये बचाएगी। एक साल में इससे 36 करोड़ की बचत होगी।

    उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सरकार के बोर्डों और निगमों के लिए नहीं होगी, जो अपने संसाधनों का आकलन करके सही निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से उठाए गए इस कदम से सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कर्ज पर ब्याज की बचत होगी।

  • खेलकूद प्रतियोगिताओं में मिड डे मील कर्मियों की ड्यूटी तर्क संगत नहीं : सीटू

    खेलकूद प्रतियोगिताओं में मिड डे मील कर्मियों की ड्यूटी तर्क संगत नहीं : सीटू

    HNN/नाहन

    सीटू कमेटी जिला सिरमौर ने स्कूल की खेलकूद प्रतियोगिताओं में मिड डे मील वर्करों की ड्यूटी लगाने का विरोध किया है। सीटू जिला सिरमौर कमेटी के महासचिव आशीष कुमार ने कहा कि उपनिदेशक एलीमेंट्री जिला सिरमौर द्वारा मिड डे मील वर्करज को स्कूल खेलकूद प्रतियोगिताओं मे मिड डे मील कर्मियों की ड्यूटी लगाना तर्कसंगत नहीं है। सीटू जिला सिरमौर महासचिव आशीष कुमार ने कहा की उप निदेशक द्वारा जो नोटिफिकेश निकाली गई है, यह मिड डे मील कर्मियों के वर्क मैन्युअल मे नहीं आता।

    आशीष कुमार ने कहा की जो नोटिफिकेशन जारी की गई है। उसमे किसी वर्कर को उनके नाम या स्कूल के आधार पर ड्यूटी नहीं लगाई है। बल्कि एक सामान्य सी नोटिफिकेशन वर्कर्ज को भ्रमित करने को जारी कर दी। आशीष कुमार ने कहा की इससे पहले भी विभाग द्वारा चुनाव के दौरान भी इनकी ड्यूटी लगा दी जाती है, मगर उसका उन्हे कोई पैसा नहीं दिया जाता, जोकि की कर्मियों का शोषण है।

    अक्सर देखा गया है की चुनाव के समय इन कर्मियों को स्कूल के हाजरी रजिस्टर पर अनुपस्थति दिखाई जाती है। जोकि तर्क संगत नहीं है। सीटू का मानना है की यदि विभाग इन कर्मियों की इस तरह इनके वर्क मैन्युल के इलावा काम करवाता है। तो इनको श्रम कानूनों के तहत वेतन और अन्य स्टॉफ जिसमे अध्यापक भी जो ड्यूटी दे रहे है उनके अनुसार काम के बदले वेतन का भुगतान करें।

    HNN/नाहन

  • लैब संघ ने सरकार के इस फैसले पर जताई आपत्ति

    लैब संघ ने सरकार के इस फैसले पर जताई आपत्ति

    अशिवन शर्मा बोले कर्मचरियो के हितो में न लिया जाने फैसलों का होना कड़ा विरोध

    HNN/मंडी

    खिल भारतीय स्वास्थ्य विभाग लैब तकनीशियन संघ मंडी जिला इकाई ने स्वास्थ्य निदेशालय और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के कैडर को अलग करने के फैसले पर आपत्ति जताई है। संघ के जिला प्रधान अमरजीत शर्मा ने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों के हित में नहीं है। संघ ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल और स्वास्थ्य सचिव से आग्रह किया है कि यदि कैडर को अलग करना आवश्यक है, तो पहले दोनों कैडरों के नियम स्पष्ट किए जाएं और कर्मचारियों के हित सुनिश्चित किए जाएं।

    संघ की मांग: पदोन्नति के अधिक अवसर और समयबद्ध पदोन्नति

    अमरजीत शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों को पदोन्नति के अधिक अवसर मिलना चाहिए और लैब तकनीशियनों की समयबद्ध पदोन्नति की जानी चाहिए। इसके अलावा कर्मचारियों को कैडर में बदलाव के लिए विकल्प देने का समय बढ़ाना चाहिए, ताकि वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें। संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि कोई भी निर्णय लेते समय प्रदेश इकाई को विश्वास में लिया जाए।

    टाइटल विकल्प:

    • “लैब तकनीशियन संघ का विरोध: कैडर को अलग करने के फैसले पर आपत्ति”
    • “स्वास्थ्य निदेशालय और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के कैडर को अलग करने के फैसले पर विवाद”
    • “लैब तकनीशियन संघ की मांग: पदोन्नति के अधिक अवसर और समयबद्ध पदोन्नति”
    • “कैडर को अलग करने के फैसले पर लैब तकनीशियन संघ का विरोध”
  • शिलाई होंगे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के साक्षात्कार- CDPO

    शिलाई होंगे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के साक्षात्कार- CDPO

    तमाम दस्तावेजों के साथ उपस्थित होना जरूरी

    HNN News नाहन

    बाल विकास परियोजना शिलाई के अंतर्गत संचालित आंगनवाड़ी केन्दों में रिक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के 9 पदों तथा आंगनवाडी सहायिकाओं के 17 पदों के लिए साक्षात्कार 25 व 26 सितंबर, 2024 को उपमंडलाधिकारी शिलाई के कार्यालय में प्रातः 11 बजे आयोजित किए जाएंगे।

    यह जानकारी बाल विकास परियोजना अधिकारी शिलाई ने देते हुए बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार कि तिथि 25 सितंबर, 2024 है, जबकि  आंगनवाड़ी सहायिकाओं के साक्षात्कार 26 सितंबर, 2024 को होंगे।

    उन्होंने बताया कि अभ्यर्थी को साक्षात्कार के दिन संबंधित प्रमाण पत्रों की मूल प्रति के साथ व्यक्ति गत रूप से उपस्थित होना होगा।

  • सेना में लेफ्टिनेंट बनीं टकोली घिरथां की डिंपल चौधरी

    सेना में लेफ्टिनेंट बनीं टकोली घिरथां की डिंपल चौधरी

    HNN/कांगड़ा

    टकोली घिरथां की डिंपल चौधरी ने सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपना सपना साकार कर दिखाया है। डिंपल चौधरी अब मेडिकल हॉस्पिटल प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में बतौर लेफ्टिनेंट अपनी सेवाएं देंगी।

    डिंपल चौधरी के लेफ्टिनेंट बनने से परिजनों सहित पंचायत में खुशी की लहर है। उन्होंने कहा कि शादी के बाद भी मेरे पति विकास चौधरी और सास आशा देवी, ससुर जगदीश चंद ने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। जेठानी सुखविंदर कौर ने मेरे छोटे से बेटे का पालन-पोषण किया है और उसी का प्रतिफल है कि आज मैंने यह मुकाम हासिल किया है।

    डिंपल चौधरी का जन्म 12 नवंबर 1994 को जवाली की पंचायत सिद्धपुरघाड़ में हुआ। उन्होंने हरियाणा कॉलेज ऑफ सिरसा से बीएसई नर्सिंग की और अभी एमएससी नर्सिंग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हम चार बहनें और एक भाई हैं और पिता कश्मीर सिंह और माता रक्षा देवी का सपना था कि बेटियां ऊंचे पद हासिल करें।

  • सफाई कर्मचारियों के बीच हुई भिड़ंत, तेजधार हथियार से हमला

    सफाई कर्मचारियों के बीच हुई भिड़ंत, तेजधार हथियार से हमला

    HNN/काँगड़ा

    ज्वालामुखी में सफाई कर्मचारियों के दो गुटों में दो दिन पहले हुई भिड़ंत ने सोमवार को एक मोड़ ले लिया। जब घर में सोए सफाई कर्मचारी नरेश कुमार पर एक अज्ञात सफाई कर्मचारी ने तेजधार हथियार से हमला कर दिया और उसके हाथ को बुरी तरह से जख्मी कर दिया। हमले में घायल नरेश कुमार का उपचार करवाया गया है।

    ज्वालामुखी सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान दिनेश कुमार ने लगभग 50 सफाई कर्मचारियों के साथ ज्वालामुखी पुलिस थाना में जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाई है और आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की है। थाना प्रभारी विजय कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और उसकी तलाश जारी है।

    इस घटना के बाद से ज्वालामुखी में सफाई कर्मचारियों के बीच तनाव का माहौल है। अन्य सफाई कर्मचारियों ने कहा कि पंजाब के अमृतसर और होशियारपुर से जो सफाई कर्मचारी आए हैं, उनके चलते आए दिन यहां पर लड़ाई-झगड़े का माहौल बना हुआ है, इसलिए उन्हें शहर से बाहर भेजा जाए। पंजाब के सफाई कर्मचारियों के सुपरवाइजर बिट्टू ने बताया कि वह इस हमले के खिलाफ हैं और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • सरकारी कर्मचारियों को वेतन और पेंशन के लिए , करना होगा इंतजार

    सरकारी कर्मचारियों को वेतन और पेंशन के लिए , करना होगा इंतजार

    HNN/शिमला

    हिमाचल प्रदेश में सरकारी विभागों के कर्मचारियों को अगस्त का वेतन नहीं मिल पाया है और न ही पेंशनरों को पेंशन मिल पाई है। सोमवार को दो तारीख बीतने पर भी वेतन और पेंशन न मिलने से कर्मचारी और पेंशनर परेशान रहे। कर्मचारियों को वेतन 5 सितंबर तक ही मिल सकता है, जबकि पेंशनरों को पेंशन उसके बाद दी जाएगी। हालांकि, वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार वेतन और पेंशन का भुगतान पांच सितंबर या इसके बाद कर दिया जाएगा।

    कर्ज लेकर वेतन देने और इस पर पड़ने वाले ब्याज से बचने के लिए ही यह वित्तीय प्रबंधन किया जा रहा है। हालांकि, बिजली बोर्ड के कर्मचारियों और पेंशनरों को वेतन-पेंशन सोमवार को दे दिया गया। पहली सितंबर को रविवार था, इसलिए कर्मचारियों और पेंशनरों को लग रहा था कि वेतन-पेंशन सोमवार को खाते में आएगा।

    वेतन और पेंशन देने को लेकर सरकार की ओर से किसी का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, मगर वित्त विभाग के सूत्रों को कहना है कि हर महीने कर्ज लेकर वेतन-पेंशन देने की प्रथा को स्थगित करने के लिए ऐसा किया गया है। कर्ज लेकर अगर समय पर वेतन और पेंशन दिए जाते तो सरकार को तीन करोड़ रुपये महीने का ब्याज देना पड़ता है। यानी एक साल में 36 करोड़ रुपये ब्याज में देने पड़ते हैं। 5 सितंबर को केंद्रीय करों पर भी स्थिति स्पष्ट हो जाती है। उससे भी वित्तीय प्रबंधन किया जाएगा।

    एक दिन पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा था कि प्रदेश में कोई आर्थिक संकट नहीं है। राज्य में वित्तीय अनुशासन को बनाए रखने के मद्देनजर ही मंत्रियों और विधायकों का वेतन और भत्तों को दो महीने आगे विलंबित किया गया है। उधर, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की हालत आर्थिक आपातकाल जैसी है। कर्मचारियों को वेतन और पेंशनरों को पेंशन नहीं मिली है।

  • दस्तावेज और निर्धारित राशि जमा नहीं करवाने पर नहीं मिलेगा आवास: गर्ग  

    दस्तावेज और निर्धारित राशि जमा नहीं करवाने पर नहीं मिलेगा आवास: गर्ग  

    09 सितंबर तक आवेदकों को औपचारिकताएं पूर्ण करने के दिए निर्देश  

    HNN News धर्मशाला

    नगर निगम धर्मशाला की संयुक्त आयुक्त डा अंजली गर्ग ने कहा कि आईएचएसडीपी योजना के तहत आवास के लिए जिन लाभार्थियों ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए हैं उनको 09 सितंबर तक का समय दस्तावेज तथा स्कीम के तहत निर्धारित राशि जमा करवाने का समय दिया है।

    उन्होंने कहा कि निर्धारित तिथि को दस्तावेज इत्यादि उपलब्ध नहीं करवाने पर आवेदन रद्द कर दिए जाएंगे तथा अन्य पात्र लोगों को आवास उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। नगर निगम की संयुक्त आयुक्त डा अंजली गर्ग ने कहा कि योजना के तहत 199 लाभार्थियों का चयन आवास आवंटन के लिए किया गया था उनमें से 72 लाभार्थियों को आवास मिल चुके हैं।

    नगर निगम की संयुक्त आयुक्त डा अंजली ने कहा कि आईएचएसडीपी योजना गरीब तथा निर्धन श्रमिकों के लिए बनाई गई थी जिसके तहत आवासीय कालोनी का निर्माण किया गया है ताकि श्रमिकों को रहने की बेहतर सुविधा मिल सके।

  • 13 तारीख की कैबिनेट में होगा आउटसोर्स के भाग्य का फैसला

    13 तारीख की कैबिनेट में होगा आउटसोर्स के भाग्य का फैसला

    नई भर्तियों के लिए अब अलग-अलग विभागों में क्रियाशील पदों पर भी होगा फैसला

    HNN News शिमला

    हिमाचल प्रदेश में करार खत्म होने के बाद 17 सौ से अधिक आउटसोर्स कर्मी 31 मार्च को नौकरी से बाहर कर दिए गए थे। सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने इन्हें राहत पहुंचाने के उद्देश्य से मामला 13 तारीख को होने वाली कैबिनेट में रखे जाने का फैसला लिया है।

    असल में स्वास्थ्य विभाग में जो आउटसोर्स कर्मियों का मामला वित्त विभाग को भेजा था उसे वित्त विभाग ने सरकार को प्रेषित कर दिया है। जिसके बाद मामले को मंजूरी के लिए कैबिनेट हेतु विचाराधीन कर लिया गया है।

    ऐसे में यदि कैबिनेट की मुहर आउटसोर्स कर्मियों के मामले पर लग जाती है तो यह सब सरकारी मुलाजिम बन जाएंगे। बता दें कि रेगुलर पदों की कमी के चलते और कोविड- काल के दौरान 1700 से भी अधिक आउटसोर्स कर्मियों को भर्ती किया गया था। यह भर्ती विभिन्न कंपनियों के माध्यम से की गई थी।

    जिसमें स्टाफ नर्स फीमेल हेल्थ वर्कर पैरामेडिकल स्टाफ चपरासी डाटा एंट्री ऑपरेटर वगैरह शामिल थे। यही नहीं कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्य विभाग के द्वारा करीब 2000 से अधिक कर्मचारियों को इमरजेंसी व्यवस्था के लिए भर्ती किया गया था। यह सभी कर्मचारी 2 साल से भी अधिक समय से अपनी सेवाएं निष्ठा के साथ दे रहे थे।

    अचानक बाहर किए जाने पर इन सब की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था। जिसको लेकर सरकार ने भी मामले पर संज्ञान लेते हुए इनको राहत पहुंचाने का फैसला लेने की सोची है। मामला असल में इसलिए भी बिगड़ा क्योंकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेगुलर स्टाफ भी भर्ती कर दिया गया था।

    जिसके चलते आउटसोर्स कर्मियों की वजह से वित्तीय बोझ बढ़ गया था। यही वजह है कि इन्हें आगे सेवाओं के लिए बहाल करने को लेकर वित्तीय कारण बताए जा रहे थे। बरहाल सरकार की मंशा और नियत यह साफ इशारा करती है कि वह आउट सोर्स कर्मियों के विरोध में नहीं बल्कि उनको कैसे रीएंटर किया जाए इसको लेकर चिंतित है।