Category: SANGHRAH

  • संगड़ाह के शिवपुर गांव से लापता महिला का शव खाई में मिला

    संगड़ाह के शिवपुर गांव से लापता महिला का शव खाई में मिला

    पोस्टमार्टम के लिए नाहन मेडिकल कॉलेज भेजा शव, 3 सप्ताह से थी लापता

    HNN News श्री रेणुका जी

    हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के संगड़ाह के शिवपुर गांव से लगभग 3 सप्ताह पहले लापता हुई 67 वर्षीय महिला सुरतो देवी का शव रविवार को साथ लगती खाई से बरामद हुआ है। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज नाहन भेजा जाएगा।

    महिला अपने गोद लिए बेटे नरेश कुमार के साथ रहती थी। गत 14 नवंबर को संगड़ाह पंहुचे ग्रामीणों ने पुलिस, प्रशासन व सरकार से ड्रान अथवा सेना की मदद से भी उसकी तलाश की मांग की थी, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    पुलिस अधीक्षक सिरमौर रमन कुमार मीणा ने बताया कि मामले की तहकीकात जारी है और जल्द ही इसकी जांच पूरी की जाएगी। डीएसपी संगड़ाह मुकेश डडवाल के अनुसार, शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज नाहन भेजा जाएगा और इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • संगड़ाह में दिन मे लोगों से पैट्रॉल चोर छूटा तो रात को चोरी हुई गाड़ी

    संगड़ाह में दिन मे लोगों से पैट्रॉल चोर छूटा तो रात को चोरी हुई गाड़ी

    Himachalnow/संगड़ाह

    सिरमौर जिला के पुलिस सटेशन संगड़ाह के अंतर्गत आने वाले डलयाणू गांव के पास आज दिन में जहां 1 पैट्रॉल चोर लोगों के चंगुल से छूटा वहीं रात होते-होते साथ लगते गांव अंधेरी से कार चोरी का मामला सामने आया। संगड़ाह-हरिपुरधार रोड पर डलयाणू में बाइक से तेल चुराने वाले युवक का स्थानीय लोगों ने वीडिओ भी सोशल मीडियापर अपलोड किया और उससे ताले तोड़ने अथवा लड़ाई झगडे के लिए इस्तेमाल हो सकने वाली स्टील रोड भी बरामद की।

    उन्होंने पैट्रॉल चोर की स्कूटीभी पुलिस के हवाले की, हालांकि इस बीच चोर भाग गया। इसके बाद रात होते-होते साथ लगते अंधेरी गांव से 1 गाड़ी चोरी हुई। स्थानीय ग्रामीणों व पुलिस कार चुराकर भागे शख्स का पीछा भी किया।

    अपुष्ट जानकारी के अनुसार संगड़ाह-रेणुकाजी-नाहन रोड पर दनोई मे नाकेबंदी के चलते उसे पकड़ा जा चुका है। डी एस पी व SHO संगड़ाह से बार-बार संपर्क के बावजूद अब तक फ़ोन व वाट्सएप्पपर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

  • संगड़ाह में हादसा, सड़क पर खड़ी कार खाई में लुढ़की, महिला की मौत

    संगड़ाह में हादसा, सड़क पर खड़ी कार खाई में लुढ़की, महिला की मौत

    शिलाई के पंजौड़ गांव की 68 वर्षीय सैना देवी के रूप में हुई पहचान

    HNN News संगड़ाह

    जिला सिरमौर के उपमंडल संगड़ाह में दर्दनाक हादसा हुआ, जहां सड़क किनारे खड़ी कार अचानक गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में महिला की मौत हो गई. मृतक की पहचान उपमंडल शिलाई के पंजौड़ गांव की 68 वर्षीय सैना देवी के रूप में हुई है।

    उधर, पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है. हादसा बीती रात कालथ के पास हुआ। जानकारी के अनुसार उपमंडल संगड़ाह के तहत आने वाले गांव कालथ के पास देर रात एक कार (एचपी01एन- 0319) अचानक खाई में जा गिरी।

    स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार महिला अपने घर पर चोटिल हुई थी, जिसे उसके परिवार के लोग इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज नाहन ले जा रहे थे।

    यहां गाड़ी से सभी लोग ढाबे पर खाना खाने के लिए उतर गए। इस बीच महिला गाड़ी के साथ गहरी खाई में जा गिरी बताया जा रहा है कि गाड़ी यहां ढलान पर खड़ी थी. संभवतया, गाड़ी की हैंड ब्रेक न लगने से ये हादसा हुआ।

    उधर, डीएसपी संगड़ाह मुकेश डडवाल ने बताया कि हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। एसडीएम संगड़ाह सुनील कायथ ने बताया कि मृतक महिला के आश्रितों को 25000 रुपए की तुरंत राहत राशि जारी की गई है।

  • हैंड ब्रेक लगाना भूला ड्राइवर ,गाड़ी खाई में गिरी , महिला की …….

    हैंड ब्रेक लगाना भूला ड्राइवर ,गाड़ी खाई में गिरी , महिला की …….

    Himachalnow/संगड़ाह

    कालथ गांव के पास कार खाई में गिरी, महिला की मौत

    हिमाचल प्रदेश के संगड़ाह उपमंडल के कालथ गांव में एक दर्दनाक सड़क हादसे में 68 वर्षीय महिला सैना देवी की मौत हो गई। शिलाई उपमंडल के पंजौंड़ गांव की निवासी सैना देवी को परिजन इलाज के लिए नाहन मेडिकल कॉलेज ले जा रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, सैना देवी घर पर गिरकर चोटिल हो गई थीं। रास्ते में, परिवार ने एक ढाबे पर खाना खाने के लिए गाड़ी रोकी, जबकि महिला गाड़ी में ही बैठी रही।

    हैंड ब्रेक फेल होने से हादसा
    परिजनों के ढाबे में जाते ही गाड़ी (HP01N-0319) हैंड ब्रेक न लगने के कारण ढलान में लुढ़ककर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में सैना देवी की मौके पर ही मौत हो गई। डीएसपी संगड़ाह मुकेश डडवाल ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में हैंड ब्रेक न लगने को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।

    परिवार को गहरा सदमा
    हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। सैना देवी का बेटा, जो शिमला में टैक्सी चालक है, इन दिनों घर पर आया हुआ था। उसकी मां की अचानक मौत ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं।

    प्रशासन ने दी राहत राशि
    घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। एसडीएम संगड़ाह सुनील कायथ ने पीड़ित परिवार को 25,000 रुपये की तुरंत राहत राशि प्रदान की। उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता दी जाएगी। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

  • गिरिपार में बुड़ेछू लोक नृत्य से शुरू हुआ सप्ताह भर चलने वाला दिवाली उत्सव

    गिरिपार में बुड़ेछू लोक नृत्य से शुरू हुआ सप्ताह भर चलने वाला दिवाली उत्सव

    बैल पूजन व सास-दामाद दूज भी है परम्परा का अहम हिस्सा

    HNN/संगड़ाह

    सिरमौर जनपद की सदियों पुरानी लोक संस्कृति व परम्पराओं को संजोए रखने के लिए मशहूर गिरिपार क्षेत्र में यूं तो हिंदुओं के कईं त्यौहार अलग अंदाज में मनाए जाते हैं, मगर यहां सप्ताह भर चलने वाली दिवाली तथा एक माह बाद आने वाली बूढ़ी दियाली हमेशा चर्चा में रहती है।

    क्षेत्र में दीपावली से एक दिन पूर्व चौदश से उक्त त्योहार शुरू होता है और इसके बाद अवांस, पोड़ोई, दूज, तीज व पंचमी आदि नाम से सप्ताह भर चलता है। बुधवार को चौदश से इलाके में त्यौहार शुरू हो चुका है। दीपावली को आज अंवास के नाम से मनाए जाने व लक्ष्मी पूजा के बाद अगले दिन मनाए जाने वाले पोड़ोई पर्व पर क्षेत्र मे बैलों अथवा गोवंश की पूजा कर उन्हें पारम्परिक व्यंजन अथवा पकवान परोसे जाते हैं। इस दौरान इलाके के विभिन्न गांवों में बुड़ेछू लोक नृत्य भी हुआ।

    दिवाली के दौरान अलग-अलग दिन अस्कली, धोरोटी, पटांडे, सीड़ो व तेलपकी आदि पारम्परिक व्यंजन परोसे जाते हैं। दीपावली के बाद पोड़ोई, दूज, तीज, चौथ व पंचमी आदि नामों से गिरिपार के कईं गांव में सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन किया जाता है, जिसमें से कुछ जगहों पर रामायण व महाभारत आदि का मंचन भी किया जाता है।

    गिरीपार के अंतर्गत आने वाले उपमंडल संगड़ाह, शिलाई व राजगढ़ की 154 पंचायतों में दिवाली को आज भी इसी तरह पारम्परिक अंदाज में मनाया जाता है। क्षेत्र में कुछ दशक पहले तक बिना पटाखे चलाए पर्यावरण मित्र ढंग से यह उत्सव मनाया जाता था, हालांकि अब देश के अन्य हिस्सों की देखा-देखी में आतिशबाजी दीपावली हिस्सा बन गई है। विशेष समुदाय से संबंध रखने वाले पारंपरिक बुड़ेछू कलाकारों द्वारा इस दौरान होकू, सिंघा वजीर, चाय गीत, नतीराम व जगदेव आदि वीर गाथाओं गायन किया जाता है।

    उक्त कलाकारों द्वारा द्रुत गति के सिरमौरी गीतों पर पारम्परिक नृत्य भी किया जाता है। सदियों से क्षेत्र में केवल दीपावली अथवा बड़ी दिवाली तथा बूढ़ी दिवाली के दौरान ही बुड़ेछू नृत्य होता है तथा इसे बूढ़ा अथवा बुड़ियाचू नृत्य भी कहा जाता है। स्थानीय लोग बुड़ेछू दल के सदस्यों को नकद बक्शीश के अलावा घी के साथ खाए जाने वाले पारंपरिक व्यंजन भी परोसते हैं तथा इस परम्परा को ठिल्ला कहा जाता है।

    भैया दूज पर दामाद अपनी सास को 100 अखरोट व कुछ अन्य उपहार भेंट देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। बहरहाल क्षेत्र में सदियों से इस तरह दीपावली मनाने की परंपरा कायम है। एक माह बाद आने वाली अमावस्या से ग्रेटर सिरमौर कईं गांव में सप्ताह भर चलने वाली बूढ़ी दिवाली मनाई जाती है तथा कुछ गांवों में इसे मशराली के नाम से भी मनाया जाता है।

    ग्रेटर सिरमौर अथवा गिरिपार में दीपावली के अलावा लोहड़ी, गूगा नवमी, ऋषि पंचमी व वैशाखी आदि त्यौहार भी शेष हिंदोस्तान से अलग अंदाज मे मनाए जाते हैं। इलाके की ऐसी ही परम्पराओं व विषम भौगोलिक परिस्थितियों आदि को आधार मानकर 4 अगस्त 2023 को भारत सरकार द्वारा गिरिपार के हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति दर्जा दिया गया है।

  • बिजट देवता मंदिर संगड़ाह में संपन्न हुआ शांत महायज्ञ

    बिजट देवता मंदिर संगड़ाह में संपन्न हुआ शांत महायज्ञ

    क्षेत्र की दर्जन भर पंचायतों के सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

    HNN/संगड़ाह

    सिरमौर जिला के उपमंडल मुख्यालय संगड़ाह में मौजूद बिजट देवता मंदिर में रविवार को शांत पूजन व विशाल भंडारे के साथ शांत महायज्ञ संपन्न हुआ। मंदिर के सबसे बड़े कहलाने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान के लिए आस-पास के गांव से देवता के भाई शिरगुल महाराज, गुगा पीर व कालका काली माता को भी आमंत्रित किया गया था।

    मंदिर के पुजारी व आयोजकों ने बताया कि, शांत महायज्ञ से पहले देवी देवताओं को हरिद्वार अथवा गंगा जी, यमुना, रेणुकाजी, गिरी गंगा व चूड़धार का पवित्र पंच स्नान करवाया गया। कल देवी देवताओं के लौटने पर मंदिर परिसर में जागरा कहलाने वाला रात्रि जागरण का आयोजन हुआ। रविवार को महायज्ञ के समापन पर क्षेत्र की दर्जन भर पंचायतों से लोग देवता का आशीर्वाद लेने पंहुचे।

  • संगड़ाह में उपमंडल स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस संपन्न, छात्रों ने दिखाया विज्ञान कौशल

    संगड़ाह में उपमंडल स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस संपन्न, छात्रों ने दिखाया विज्ञान कौशल

    HNN/संगड़ाह

    संगड़ाह के आदर्श माध्यमिक विद्यालय में आयोजित 32वीं उपमंडल स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में संगड़ाह खंड की 21 पाठशालाओं के 130 छात्रों ने भाग लिया। दो दिवसीय प्रतियोगिता में विज्ञान के मॉडल, गणित ओलंपियाड और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

    इस अवसर पर मुख्य अतिथि राजेश भारद्वाज ने विजेता छात्रों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया। विद्यालय के कार्यकारी प्रधानाचार्य हिरदाराम शर्मा ने बताया कि प्रथम स्थान हासिल करने वाली टीमें 6 नवंबर को कोलर में आयोजित होने वाली जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेंगी।

    वरिष्ठ माध्यमिक वर्ग प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हरिपुरधार ने प्रथम, आदर्श जमा दो विद्यालय संगड़ाह ने द्वितीय और जमा विद्यालय नौहराधार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कनिष्ठ वर्ग में ज्ञान ज्योति पब्लिक स्कूल हरिपुरधार प्रथम, मिडिल स्कूल बोरली दूसरे और बाल विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल संगड़ाह तीसरे स्थान पर रहे।

    इन्नोवेटिव साइंस मॉडल में ज्ञान ज्योति पब्लिक स्कूल हरिपुरधार प्रथम, जमा दो विद्यालय नौहराधार दूसरे और भुजोंड तीसरे स्थान पर रहे। गणित ओलंपियाड में मां भगवती पब्लिक स्कूल हरिपुरधार प्रथम, अंजू बोगधार दूसरे और करण नेगी मिडिल स्कूल बोरली तीसरे स्थान पर रहे। मॉडल वरिष्ठ वर्ग में जमा दो विद्यालय हरिपुरधार के छात्र ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि टाली चंद्रोंणा की मुस्कान दूसरे और वंशिका भुजोंड तीसरे स्थान पर रही। कनिष्ठ वर्ग में निशांत हरिपुरधार के आर्यन ठाकुर प्रथम, दूसरे और नौहराधार के छात्र तीसरे स्थान पर रहे।

  • गिरिपार में मशालें जलाकर मनाई गई आठ्ठों

    गिरिपार में मशालें जलाकर मनाई गई आठ्ठों

    HNN/संगड़ाह

    सिरमौर जनपद की सदियों पुरानी लोक संस्कृति व परंपराओं को संजोए रखने के लिए मशहूर वाले गिरिपार क्षेत्र में पारंपरिक अंदाज में भराड़ी पूजन व हुशू कहलाने वाली मशालों को जलाकर आठ्ठों पर्व मनाया गया। दीपावली से तीन सप्ताह पहले दुर्गा अष्टमी के दिन मनाए जाने वाले इस त्यौहार को इलाके में छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, जबकि दिवाली के एक माह बाद आने वाली अमावस्या को बूढ़ी दिवाली मनाने की परंपरा है।

    आठ्ठों अथवा दुर्गा अष्टमी के दिन से क्षेत्र में दीपावली की तैयारियां शुरू हो जाती है तथा इसे दिवाली का पहला पड़ाव कहा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार दुर्गा अष्टमी का शुभ मुहूर्त गुरुवार बाद दोपहर से शुक्रवार बाद दोपहर तक होने के चलते क्षेत्र के कुछ गांवों तथा गुरुवार तो कुछ जगह शुक्रवार को आठ्ठों पर्व मनाया गया। अष्टमी अथवा आठ्ठों की रात्रि हुशू कहलाने वाली मशालें जलाई गई। गिरिपार में दिवाली व बूढ़ी दियाली एक-दो दिन नहीं बल्कि चौदश, अवांस, पोड़ोई, दूज, तीज, चौथ व पंचमी के नाम से सप्ताह भर मनाई जाती है। आठों अथवा दुर्गा अष्टमी पर क्षेत्र में भराड़ी नामक विशेष जंगली फूल के डमरु बनाकर इससे मां भवानी अथवा गौरा का पूजन किया जाता है।

    सिरमौर के हिमालयाई अथवा पहाड़ी जंगलों में पाए जाने वाले सफेद रंग के इन पवित्र फूलों को सुबह घर का एक सदस्य बिना किसी से बात किए व बिना कुछ खाए-पिए जंगल से लेकर आता है। इनके डमरू नुमा गुच्छे को पूजा के बाद में इसे जल अथवा अग्नि में प्रवाहित किया जाता है। अष्टमी अथवा आठों की सुबह बनने वाली खिचड़ी का भोग लगाकर भराड़ी पूजन किया जाता है। सूर्यास्त होने के बाद बच्चों अथवा कन्याओं को आठ्ठों पर बनाए जाने वाले धोरोटी-भात व खिचड़ी आदि पारम्परिक व्यंजन प्रसाद स्वरूप बांटे जाते हैं।

    इस प्रक्रिया के बाद हुशू कहलाने वाली बाबड़ी घास व अन्य ज्वलनशील पदार्थों से बनी विशेष मशालें जलाकर सिर पर घुमाई जाती है। मशालें जलाने के दौरान स्वर्गलोक विजेता एवं दानवीर राजा बलि का जयघोष किया जाता है। गिरिपार अथवा सिरमौर में प्रचलित मान्यता के अनुसार मशालें सिर पर घुमाने से कष्टों, आपदाओं व बुरी आत्माओं के साये से मुक्ति मिलती है। गुरुवार व शुक्रवार को सिरमौर के अंतर्गत आने वाले उपमंडल संगड़ाह, शिलाई व राजगढ़ आदि की करीब 150 पंचायतों में पारंपरिक अंदाज से आठ्ठों अथवा दुर्गा अष्टमी त्यौहार मनाया गया तथा राजा बलि का जयघोष हुआ। आंठ्ठों के अलावा क्षेत्र में माघी, बूढ़ी दिवाली, दूज, गुग्गा नवमी व पांजवी आदि त्यौहार भी शेष हिंदुस्तान से अलग अंदाज में मनाए जाते हैं।

    इन्हीं परंपराओं व त्योहारों तथा विषम भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर गिरिपार के हाटी समुदाय पिछले साल भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किया गया हैं। बहरहाल गिरिपार में पारंपरिक अंदाज में आठ् बड़े उत्साह और उल्लास के साथ आठ्ठों त्यौहार मनाया गया।

  • एवरेस्ट फतह के लिए चयनित सिरमौर की कृतिका का नागरिक अभिनंदन

    एवरेस्ट फतह के लिए चयनित सिरमौर की कृतिका का नागरिक अभिनंदन

    जमा दो विद्यालय गत्ताधार में किया गया सम्मानित

    HNN/संगड़ाह

    दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए चयनित सिरमौर जिला उपमंडल संगड़ाह के गांव गत्ताधार की कृतिका शर्मा का जमा दो विद्यालय गत्ताधार में नागरिक अभिनंदन किया गया।

    इस दौरान कृतिका ने अपने पुराने स्कूल के छात्रों से बातचीत की और लक्ष्य हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित किया।कृतिका वर्तमान में गुरु गोविंद सिंह राजकीय महाविद्यालय पांवटा साहिब में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं और यहीं से बतौर एनसीसी कैडेट उसका चयन हुआ है।कृतिका ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा गत्ताधार से ही ग्रहण की।

  • डॉ मीनू भास्कर ने संभाला डिग्री कॉलेज संगड़ाह के प्राचार्य का कार्यभार

    डॉ मीनू भास्कर ने संभाला डिग्री कॉलेज संगड़ाह के प्राचार्य का कार्यभार

    HNN/संगड़ाह

    राजकिय महाविद्यालय संगड़ाह में नवनियुक्त प्राचार्य डॉ मीनू भास्कर बुधवार को कार्यभार ग्रहण किया। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ देवराज शर्मा व समस्त स्टाफ ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

    प्रो प्रमोज शर्मा, डॉ जगदीश चन्द, डॉ जगपाल सिंह, प्रो संदीप कुमार कनिष्क, प्रो अजय कुमार, प्रो अम्बरा, प्रो विनोद कुमार, प्रो कविता चौहान, प्रो मनोज कुमार, प्रो पूनम, प्रो चंद्र प्रकाश पथिक, प्रो ओमकांत, विनोद शर्मा, राजीव कुमार व कुमारी अनिता शर्मा आदि स्टाफ के सदस्यों ने प्राचार्य का स्वागत किया।

    इस अवसर पर डॉ मीनू भास्कर ने कहा कि, छात्रों को सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाना व शिक्षा में गुणात्मक सुधार उनकी प्राथमिकता रहेगी।