CCTV को लेकर बड़ा फैसला / आपके घर में लगा है कैमरा या खरीदने वाले हैं, पहले जान लें ये बड़ा बदलाव
भारत सरकार अब देश के CCTV बाजार में बड़े बदलाव की तैयारी में है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए नियमों के तहत भारत में बेचे जाने वाले सभी CCTV प्रोडक्ट्स के लिए STQC (Standardisation Testing and Quality Certification) अप्रूवल अनिवार्य कर दिया जाएगा।
इस फैसले का सीधा असर Hikvision, Dahua और TP-Link जैसे चीनी ब्रैंड्स पर पड़ सकता है, जो अब तक भारतीय बाजार में मजबूत पकड़ बनाए हुए थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर चीनी कंपनियों और चीनी चिपसेट वाले डिवाइस को सर्टिफिकेशन देने में सख्ती बरती जा रही है। इसका मतलब यह है कि जिन कंपनियों को क्लियरेंस नहीं मिलेगा, वे भारतीय बाजार में अपने उत्पाद नहीं बेच पाएंगी।
सरकार की यह सख्ती सिर्फ व्यापारिक कारणों से नहीं, बल्कि सुरक्षा चिंताओं से भी जुड़ी है। आशंका जताई जा रही है कि कुछ सर्विलांस डिवाइस बिना अनुमति के संवेदनशील डेटा या फुटेज तक रिमोट एक्सेस की अनुमति दे सकते हैं।
नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने डिवाइस में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कंपोनेंट्स, खासकर सिस्टम-ऑन-चिप (SoC), के ओरिजिन की जानकारी देनी होगी। साथ ही, इन डिवाइस को वल्नरेबिलिटी टेस्टिंग के लिए भी प्रस्तुत करना होगा।
यह नियम Ministry of Electronics and Information Technology द्वारा अप्रैल 2024 में जारी किए गए एसेंशियल रिक्वायरमेंट्स के तहत लाए गए थे। कंपनियों को इसके लिए दो साल का ट्रांज़िशन समय दिया गया था, जो अब समाप्त हो रहा है।
भारतीय कंपनियों को मिला फायदा
चीनी ब्रैंड्स पहले भारतीय CCTV बाजार में लगभग एक-तिहाई हिस्सेदारी रखते थे, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है।
CP Plus, Qubo, Prama, Matrix और Sparsh जैसे भारतीय निर्माता तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।
इन कंपनियों ने अपनी सप्लाई चेन को ताइवानी चिपसेट के आसपास रीबिल्ड किया है और अपने सॉफ्टवेयर को लोकल जरूरतों के हिसाब से तैयार किया है।
Counterpoint Research के अनुसार, फरवरी तक भारतीय कंपनियों ने CCTV बाजार के 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर कब्जा कर लिया है।
नई व्यवस्था के तहत 500 से ज्यादा CCTV मॉडल्स को पहले ही सर्टिफिकेशन मिल चुका है, जिससे साफ है कि यह फ्रेमवर्क तेजी से लागू हो रहा है। जिन कंपनियों ने पहले से तैयारी कर ली थी, वे मजबूत स्थिति में हैं, जबकि चीनी कंपोनेंट्स पर निर्भर कंपनियों के लिए 1 अप्रैल के बाद बाजार में बने रहना मुश्किल हो सकता है।