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तेल की आग से सुलगा हिमाचल, महंगाई की नई मार से सहमा बाजार

Shailesh Saini • 3 Hours Ago • 1 Min Read

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच पेट्रोल, डीजल और सीएनजी कीमतों में उछाल ने हिमाचल में महंगाई बढ़ने की चिंता गहरा दी है। व्यापारियों ने पहले ही जरूरी सामान का स्टॉक बढ़ा लिया है, जबकि सीमेंट, लोहा, दवाइयों और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं।

नाहन

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक संकट की आंच अब हिमाचल प्रदेश तक महसूस की जाने लगी है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में हुए बड़े उछाल ने न केवल आम आदमी की जेब पर सीधा हमला किया है, बल्कि प्रदेश के कारोबार, उद्योग और बागवानी अर्थव्यवस्था पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

शुक्रवार की सुबह लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही, जब तेल कंपनियों ने कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी और बाजार में महंगाई की नई लहर का डर गहराने लगा।हिमाचल प्रदेश में खासकर सिरमौर, सोलन और औद्योगिक क्षेत्रों में इसका असर तेजी से दिखाई देने लगा है। बढ़ती महंगाई की आशंका को भांपते हुए जिला सिरमौर के कई व्यापारियों और दुकानदारों ने पहले ही अपने गोदामों में जरूरी सामान का स्टॉक बढ़ा लिया था।

ट्रांसपोर्ट से आने वाली रोजमर्रा की वस्तुएं, खाद्य सामग्री और निर्माण सामग्री पहले ही बड़ी मात्रा में मंगवा ली गई थी, क्योंकि व्यापारियों को अंदेशा था कि तेल की कीमतों में उछाल के बाद माल ढुलाई महंगी हो जाएगी और बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।प्रदेश का उद्योग जगत भी इस झटके से अछूता नहीं रहा। विशेषकर फार्मा और लोहा उद्योग पर इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ और सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्रों में रॉ मैटेरियल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की चर्चा शुरू हो गई है। फार्मा कंपनियों को बाहर से आने वाले कच्चे माल पर अधिक खर्च उठाना पड़ सकता है, जबकि ट्रांसपोर्ट महंगा होने से उत्पादन लागत बढ़ने के पूरे आसार हैं।

उधर निर्माण क्षेत्र में भी सीमेंट, सरिया और लोहे के दाम बढ़ने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। कारोबारियों का मानना है कि यदि तेल और सीएनजी की कीमतों में यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले दिनों में मकान निर्माण से लेकर छोटे व्यापार तक सब कुछ महंगा हो जाएगा।सबसे बड़ा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ता दिखाई दे रहा है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने के कारण फल, सब्जियां, राशन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दामों में भी उछाल आने की आशंका है। गृहिणियों और मध्यम वर्गीय परिवारों में इसे लेकर चिंता साफ नजर आने लगी है। लोगों का कहना है कि पहले ही महंगाई ने घरेलू बजट बिगाड़ रखा था और अब ईंधन कीमतों की आग ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

जानकारों का मानना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में तेल की कीमतों का असर मैदानी राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है, क्योंकि यहां लगभग पूरा परिवहन सड़क मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में डीजल और सीएनजी महंगे होने का असर सीधे हर वस्तु की कीमत पर दिखाई देता है।तेल कीमतों में इस उछाल के बाद बाजार में बेचैनी बढ़ गई है और लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। अब सभी की नजर केंद्र सरकार और अंतरराष्ट्रीय हालात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में राहत मिलती है या महंगाई का यह तूफान और विकराल रूप लेता है।