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Census 2027 / हिमाचल में 16 जून से शुरू होगा जनगणना का पहला चरण, मकानों और परिवारों की होगी गणना

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 3 Hours Ago • 1 Min Read

Census 2027 : हिमाचल प्रदेश में जनगणना 2027 के पहले चरण का आयोजन 16 जून 2026 से 15 जुलाई 2026 तक किया जाएगा। इस चरण के दौरान राज्यभर में मकान सूचीकरण और परिवारों से संबंधित विस्तृत जानकारी डिजिटल माध्यम से एकत्र की जाएगी। जनगणना प्रक्रिया के तहत आवासीय स्थिति, मूलभूत सुविधाओं और परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी।

शिमला

16 जून से शुरू होगा जनगणना का पहला चरण

हिमाचल प्रदेश में भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण का आयोजन 16 जून 2026 से 15 जुलाई 2026 तक किया जाएगा। जनगणना निदेशालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इस चरण के तहत राज्यभर में मकान सूचीकरण (House Listing) और आवास गणना (Housing Census) का कार्य किया जाएगा। इस प्रक्रिया में प्रत्येक आवास इकाई, परिवार, भवन की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार जनगणना देश की सबसे व्यापक प्रशासनिक और सांख्यिकीय प्रक्रिया मानी जाती है, जिसके आधार पर विभिन्न सरकारी योजनाओं और नीतियों का निर्माण किया जाता है।जनगणना निदेशालय ने बताया कि भारत में जनगणना प्रत्येक दस वर्ष में आयोजित की जाती है और इसकी शुरुआत वर्ष 1872 से मानी जाती है। यह प्रक्रिया देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना, आर्थिक स्थिति, आवासीय सुविधाओं और संसाधनों से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराती है। हिमाचल प्रदेश में भी इस चरण के दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर जानकारी एकत्र की जाएगी।

डिजिटल माध्यम से किया जाएगा डेटा संग्रह

अधिकारियों के अनुसार इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से विकसित एचएलओ (House Listing Operation) मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग किया जाएगा। गणनाकार मोबाइल ऐप के माध्यम से सीधे डेटा दर्ज करेंगे, जिससे वास्तविक समय में जानकारी अपलोड हो सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से डेटा संग्रहण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और त्रुटियों में कमी लाने में सहायता मिलेगी।इसके अतिरिक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया भी आसान होगी। जनगणना निदेशालय के अनुसार इस प्रणाली से डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय कम होगा और आंकड़ों का विश्लेषण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि सभी गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को मोबाइल ऐप के उपयोग और डेटा एंट्री प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

1 जून से 15 जून तक उपलब्ध रहेगी सेल्फ एन्यूमरेशन सुविधा

जनगणना 2027 के प्रथम चरण में नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। नागरिक 1 जून 2026 से 15 जून 2026 तक se.census.gov.in पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार की जानकारी स्वयं ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इस सुविधा का उद्देश्य नागरिकों को अपनी सुविधा के अनुसार जानकारी भरने का विकल्प उपलब्ध करवाना है।अधिकारियों के अनुसार स्व-गणना सुविधा से गणनाकारों के कार्य में भी सहायता मिलेगी और डेटा संग्रहण प्रक्रिया अधिक सुगम होगी। पोर्टल पर परिवार से संबंधित सामान्य जानकारी, आवासीय स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं और अन्य निर्धारित विवरण दर्ज किए जा सकेंगे। जनगणना निदेशालय ने नागरिकों से पोर्टल पर सही और पूर्ण जानकारी दर्ज करने का आग्रह किया है।

20 हजार से अधिक गणनाकार और पर्यवेक्षक होंगे तैनात

जनगणना कार्य के संचालन के लिए हिमाचल Pradesh में लगभग 20,630 गणनाकारों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार राज्य के विभिन्न जिलों, उपमंडलों और पंचायत स्तर तक कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही है ताकि निर्धारित समयावधि में प्रक्रिया पूरी की जा सके। इसके लिए मास्टर ट्रेनर और फील्ड ट्रेनर स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं।गणनाकारों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 जून से 12 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को मोबाइल ऐप संचालन, डेटा एंट्री, सत्यापन प्रक्रिया और जनगणना से संबंधित दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य सभी कर्मचारियों को एक समान प्रक्रिया के अनुसार कार्य करने के लिए तैयार करना है।

33 प्रश्नों के माध्यम से जुटाई जाएगी जानकारी

पहले चरण में आवासीय स्थिति, भवन निर्माण की प्रकृति, पेयजल सुविधा, बिजली, शौचालय, इंटरनेट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इसके अलावा परिवारों के पास उपलब्ध परिसंपत्तियों और संचार सुविधाओं से जुड़े विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। इस चरण के लिए कुल 33 प्रश्न निर्धारित किए गए हैं, जिनमें मोबाइल नंबर से संबंधित प्रश्न भी शामिल हैं।अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान प्राप्त सभी जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल सांख्यिकीय और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा तथा किसी भी व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

विकास योजनाओं में होगा उपयोग

अधिकारियों के अनुसार जनगणना 2027 से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, बिजली, आवास, शहरी विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी योजनाओं के निर्माण और संसाधनों के आवंटन में किया जाएगा। राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए जनगणना के आंकड़े आधार के रूप में उपयोग किए जाते हैं।जनगणना निदेशालय ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे गणनाकारों को सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाएं तथा जनगणना प्रक्रिया में सहयोग करें। अधिकारियों ने कहा कि सटीक आंकड़े उपलब्ध होने से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन और संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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