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राज्यपाल ने गंगा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 47 Mins Ago • 1 Min Read

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोकभवन में प्रो. विवेकानन्द तिवारी की पुस्तक ‘भारतीय कला, लोक परंपरा एवं संगीत में गंगा का प्रवाह’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य और लोक परंपराओं में गंगा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए तथा पुस्तक को सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन में उपयोगी बताया।

शिमला

लोकभवन में पुस्तक का हुआ विमोचन

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने मंगलवार को लोकभवन में प्रो. विवेकानन्द तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय कला, लोक परंपरा एवं संगीत में गंगा का प्रवाह’ का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पुस्तक के विषय और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में गंगा की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

भारतीय संस्कृति में गंगा के महत्व का किया उल्लेख

राज्यपाल ने कहा कि भारत में गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि समय के साथ गंगा का स्वरूप और प्रवाह बदलता रहा है, लेकिन भारतीय समाज और सांस्कृतिक परंपराओं में उसका महत्व निरंतर बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि गंगा भारतीय कला, साहित्य और पौराणिक परंपराओं में विशेष स्थान रखती है तथा अनेक साहित्यकारों, कलाकारों और विद्वानों की रचनाओं का प्रेरणा स्रोत रही है।

धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी है गंगा

राज्यपाल ने कहा कि गंगाजल का उपयोग आज भी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और जीवन के अनेक संस्कारों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय कला में गंगा को एक देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो पवित्रता, करुणा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक मानी जाती है।

पुस्तक के प्रकाशन पर दी शुभकामनाएं

राज्यपाल ने प्रो. विवेकानन्द तिवारी को पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक भारतीय कला, लोक परंपराओं और संगीत पर गंगा के प्रभाव को समझने में पाठकों के लिए उपयोगी संदर्भ प्रदान करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रकाशन भारतीय सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन और उसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगा।