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चाढ़ना में कार हादसे ने फिर खोली नौहराधार-हरिपुरधार रोड की पोल, दो की मौत, एक घायल

PRIYANKA THAKUR • 4 Apr 2026 • 1 Min Read

Himachalnow / सिरमौर

चाढ़ना के पास हुए कार हादसे में दो युवकों की मौत और एक के घायल होने के बाद नौहराधार-हरिपुरधार सड़क की खराब हालत फिर चर्चा में आ गई है। करीब 300 मीटर गहरी खाई में गिरी कार ने सड़क सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रहे हादसों को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है और प्रशासन से सुधार की मांग उठ रही है।

संगड़ाह

उपमंडल संगड़ाह के अंतर्गत नौहराधार-हरिपुरधार मार्ग पर चाढ़ना के पास एक बार फिर दर्दनाक हादसे ने इस सड़क की बदहाल स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। शुक्रवार देर रात करीब तीन बजे हुए कार हादसे में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हो गया। हादसे के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इस जानलेवा सड़क पर कब तक हादसे होते रहेंगे।प्राप्त जानकारी के अनुसार स्विफ्ट कार नंबर एचपी 88ए-6058 चाढ़ना के पास अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 300 मीटर नीचे गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में गुलशन (18) निवासी सिमडेगा, झारखंड और नरेश (29) निवासी कुलग, जिला शिमला की मौत हो गई। जबकि कार मालिक और चालक विपिन (29) निवासी चितराल, तहसील फतेहपुर, जिला कांगड़ा घायल हो गया।

बताया जा रहा है कि तीनों युवक बद्दी की एक कंपनी में कार्यरत थे। हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों ने घायलों और मृतकों को खाई से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद घायल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।पुलिस और प्रशासन ने भी मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। डीएसपी संगड़ाह सुनील राणा ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है और हादसे के कारणों की जांच जारी है।

उधर प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को फौरी राहत भी जारी की गई है। एसडीएम संगड़ाह और तहसीलदार नौहराधार के अनुसार दोनों मृतकों के आश्रितों को 25-25 हजार रुपये की तत्काल राहत राशि प्रदान की गई है।इस हादसे ने एक बार फिर नौहराधार-हरिपुरधार सड़क की हालत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि 9 जनवरी को इसी मार्ग पर हरिपुरधार के पास हुए निजी बस हादसे में 14 लोगों की जान चली गई थी। उस हादसे के बाद भी सड़क की हालत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्षेत्र में भारी रोष देखने को मिला था।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क लंबे समय से खस्ताहाल बनी हुई है और जगह-जगह गड्ढे, टूटे किनारे और संकरे मोड़ लगातार हादसों को न्योता दे रहे हैं। बावजूद इसके, क्षेत्र को अब तक न तो राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा मिला और न ही सड़क की हालत में कोई बड़ा सुधार देखने को मिला।

मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो सकती है। हाल ही में पच्छाद की विधायक रीना कश्यप ने विधानसभा में सोलन-मीनस मार्ग की बदहाली का मुद्दा उठाया था। हालांकि, उस दौरान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की ओर से सड़क की स्थिति को ठीक बताया गया था। अब चाढ़ना हादसे के बाद लोगों के बीच यह सवाल फिर गूंज रहा है कि यदि सड़क की हालत वास्तव में ठीक थी, तो फिर लगातार हो रहे हादसों की वजह क्या है।यह सड़क राजनीतिक और भौगोलिक दृष्टि से भी बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि यह मार्ग शिमला, सोलन और राजगढ़ क्षेत्र को रेणुका और शिलाई क्षेत्रों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में लगातार हो रहे हादसे केवल यातायात का नहीं, बल्कि सुरक्षा और प्रशासनिक प्राथमिकता का भी बड़ा सवाल बनते जा रहे हैं।फिलहाल पुलिस हादसे के वास्तविक कारणों की जांच कर रही है। यह साफ है कि अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन क्षेत्र में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि यदि सड़क की हालत और सुरक्षा प्रबंधों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऐसे हादसे फिर दोहराए जा सकते हैं।