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Crime / सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म मामले में दोषी को 25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Crime : शिमला की विशेष पॉक्सो अदालत ने सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में दोषी व्यक्ति को 25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला दिसंबर 2024 में दर्ज किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने जांच कर विभिन्न साक्ष्य और गवाहों के बयान एकत्रित किए थे। जांच पूरी होने पर मामला अदालत में प्रस्तुत किया गया।

शिमला

पॉक्सो अदालत ने सुनाया फैसला

राजधानी शिमला में सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट-रेप/पॉक्सो) ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला पुलिस द्वारा जांच के दौरान एकत्रित किए गए दस्तावेजी, चिकित्सीय और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया। मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में हुई, जहां अभियोजन पक्ष ने विभिन्न गवाहों और रिकॉर्ड के माध्यम से अपना पक्ष रखा।

दिसंबर 2024 में दर्ज हुआ था मामला

पुलिस के अनुसार यह मामला दिसंबर 2024 का है। घटना उस समय सामने आई जब सात वर्षीय बच्ची अपनी मां के साथ मायके आई हुई थी। परिजनों को घटना की जानकारी मिलने के बाद महिला पुलिस थाना शिमला में शिकायत दर्ज करवाई गई। आरोपी पीड़िता का रिश्तेदार बताया गया है और उसी क्षेत्र का निवासी है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच शुरू की और आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई।

पुलिस ने दर्ज किया था मामला

महिला पुलिस थाना शिमला में 5 दिसंबर 2024 को आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)(एम), 65 और 351(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले की विस्तृत जांच शुरू की। जांच के दौरान घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया गया तथा विभिन्न स्तरों पर साक्ष्य एकत्रित किए गए।

जांच में जुटाए गए साक्ष्य

पुलिस जांच के दौरान गवाहों के बयान दर्ज किए गए, मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त की गई और मामले से संबंधित अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्रित किए गए। जांच अधिकारियों ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद आरोप पत्र तैयार कर अदालत में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान गवाहों की गवाही, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य रिकॉर्ड को अदालत के समक्ष रखा, जिनका परीक्षण न्यायालय द्वारा किया गया।

अदालत ने सुनाई सजा

सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी पाया। विशेष न्यायाधीश ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत आरोपी को 25 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करता है तो उसे तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय का यह आदेश मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद जारी किया गया।

एसएसपी ने दी जानकारी

शिमला के एसएसपी गौरव सिंह ने कहा कि बच्चों के विरुद्ध अपराधों से जुड़े मामलों में पुलिस निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करती है। उन्होंने बताया कि इस मामले में जांच टीम ने आवश्यक साक्ष्य एकत्रित कर समयबद्ध तरीके से अदालत में प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावी जांच और अभियोजन के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को सहयोग प्रदान करना पुलिस की प्राथमिकता रहती है।

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