Cyber Crime / शिमला साइबर सेल ने वॉइस क्लोनिंग ठगी को लेकर जारी की एडवाइजरी, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
Cyber Crime : साइबर सेल शिमला ने वॉइस क्लोनिंग तकनीक के जरिए हो रही ऑनलाइन ठगी के मामलों को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर अपराधी अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीक का उपयोग कर लोगों की आवाज की नकल कर रहे हैं और रिश्तेदार या परिचित बनकर फोन कॉल के माध्यम से पैसों की मांग कर रहे हैं। साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से मदद या पैसे की मांग किए जाने पर तुरंत ऑनलाइन लेनदेन न करें।
शिमला
वॉइस क्लोनिंग के जरिए ठगी के मामलों को लेकर साइबर सेल की एडवाइजरी जारी
साइबर सेल शिमला ने एआई आधारित वॉइस क्लोनिंग तकनीक के माध्यम से हो रही ऑनलाइन ठगी को लेकर विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों के अनुसार इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाने के तरीके भी बदल दिए हैं। अब ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और वॉइस सिंथेसिस तकनीक का उपयोग कर लोगों की आवाज की नकल तैयार कर रहे हैं। इसके जरिए वे रिश्तेदार, मित्र या परिचित बनकर फोन कॉल करते हैं और आपात स्थिति का हवाला देकर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। साइबर सेल ने कहा है कि ऐसे मामलों में लोग भावनात्मक दबाव में आकर बिना पुष्टि किए भुगतान कर देते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान हो सकता है।
रिश्तेदार या परिचित बनकर पैसों की मांग करने के मामलों में सतर्क रहने की सलाह
एडवाइजरी में बताया गया है कि साइबर ठग अक्सर पीड़ितों को उनके बेटे, पति, पत्नी, भाई या अन्य रिश्तेदार की आवाज में कॉल करते हैं। कई मामलों में कॉल करने वाला व्यक्ति दुर्घटना, अस्पताल में भर्ती होने, मोबाइल खराब होने या तत्काल भुगतान की जरूरत जैसी बातें कहकर पैसे मांगता है। साइबर सेल ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली ऐसी कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति रिश्तेदार बनकर पैसे मांगता है तो पहले उसके व्यक्तिगत नंबर पर सीधे संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें। अधिकारियों ने कहा है कि बैंक खाते, यूपीआई, ओटीपी, क्रेडिट कार्ड या अन्य वित्तीय जानकारी किसी भी स्थिति में साझा नहीं करनी चाहिए।
कम समय की रिकॉर्डिंग से तैयार की जा रही नकली आवाज
साइबर अधिकारियों के अनुसार ठग सोशल मीडिया, फोन कॉल या ऑनलाइन बातचीत के दौरान लोगों की आवाज रिकॉर्ड कर लेते हैं। कई मामलों में केवल तीन से पांच सेकेंड की रिकॉर्डिंग के आधार पर एआई टूल्स की मदद से नकली आवाज तैयार की जा सकती है। इसके बाद उसी आवाज में अलग-अलग ऑडियो संदेश या कॉल तैयार कर लोगों को भ्रमित किया जाता है। साइबर सेल ने बताया कि ठग पहले दोस्त या परिचित बनकर सामान्य बातचीत करते हैं और बातचीत के दौरान आवाज का सैंपल रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसके बाद उसी रिकॉर्डिंग का उपयोग कर वित्तीय सहायता मांगने वाले संदेश तैयार किए जाते हैं।
संदिग्ध कॉल, लिंक और ऑनलाइन लेनदेन से सतर्क रहने की अपील
साइबर सेल शिमला ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन भुगतान अनुरोध को गंभीरता से जांचने के बाद ही प्रतिक्रिया दें। अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति आपात स्थिति का हवाला देकर तत्काल पैसे भेजने के लिए दबाव बनाता है तो पहले परिवार के अन्य सदस्यों या संबंधित व्यक्ति से संपर्क कर पुष्टि करें। साइबर सेल ने लोगों को अनजान लिंक, स्क्रीन शेयरिंग ऐप और संदिग्ध मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी है। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।