शिमला में सोशल मीडिया अकाउंट किराए पर लेकर ठगी का नया तरीका, यूजर्स को ऑनलाइन मार्केटिंग का झांसा
Himachalnow / शिमला
शिमला में साइबर ठग सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक खातों को किराए पर लेकर ठगी के मामलों को अंजाम दे रहे हैं। ऑनलाइन मार्केटिंग और ज्यादा कमाई का लालच देकर यूजर्स से अकाउंट की जानकारी ली जा रही है, जिससे वित्तीय और कानूनी जोखिम बढ़ रहे हैं।
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सोशल मीडिया अकाउंट किराए पर लेकर ठगी का नया तरीका
साइबर ठग अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ते हुए सोशल मीडिया अकाउंट को किराए पर लेने के माध्यम से धोखाधड़ी के मामलों को अंजाम दे रहे हैं। इन्फ्लूएंसर इकोनॉमी के बढ़ते प्रभाव के चलते सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आय के साधन के रूप में देखा जा रहा है, जिसका फायदा उठाकर ठग यूजर्स से संपर्क करते हैं। वे प्रोफाइल का उपयोग ब्रांड प्रमोशन या डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर करने की बात कहते हैं और इसके बदले नियमित भुगतान का प्रस्ताव रखते हैं।
ऑनलाइन मार्केटिंग के नाम पर दिया जा रहा झांसा
ठग यूजर्स को यह विश्वास दिलाते हैं कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए कंपनियों के उत्पादों का प्रचार किया जाएगा, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। कई मामलों में यूजर्स को यह भी बताया जाता है कि उनके अकाउंट पर केवल सकारात्मक या प्रचारात्मक कंटेंट पोस्ट किया जाएगा। हालांकि, जैसे ही यूजर अपने अकाउंट की एक्सेस साझा करता है, वह अपने प्रोफाइल का नियंत्रण खो सकता है और अकाउंट का उपयोग अनधिकृत गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
बैंक और प्रोफाइल एक्सेस से बढ़ रहा जोखिम
कुछ मामलों में यह प्रक्रिया केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यूजर्स से बैंक खातों या उनसे जुड़े डिजिटल माध्यमों की जानकारी भी मांगी जाती है। अधिकारियों के अनुसार, यदि यूजर अपने ई-मेल या अकाउंट से जुड़ी जानकारी साझा करता है, तो वह अपनी डिजिटल पहचान और वित्तीय सुरक्षा को जोखिम में डाल देता है। इसके परिणामस्वरूप अकाउंट हैकिंग, वित्तीय नुकसान और अन्य कानूनी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
हर महीने भुगतान का लालच देकर बनाई जा रही योजना
जांच के दौरान यह सामने आया है कि कुछ प्लेटफॉर्म पर पोस्ट या संदेशों के माध्यम से यूजर्स को प्रति माह 10,000 से 15,000 रुपए तक देने का प्रस्ताव दिया जाता है। यह राशि अकाउंट के फॉलोअर्स, नेटवर्क या प्रोफाइल की पहुंच के आधार पर तय की जाती है। इस प्रकार के प्रस्ताव यूजर्स को आकर्षित करने के लिए तैयार किए जाते हैं, ताकि वे बिना पर्याप्त जांच के अपनी जानकारी साझा कर दें।
टेलीग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल
सूत्रों के अनुसार, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर ठग खुद को विदेशी कंपनियों का प्रतिनिधि बताते हैं और यूजर्स से संपर्क करते हैं। कुछ मामलों में लिंक्डइन जैसे प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म के अकाउंट की जानकारी भी मांगी जा रही है। यूजरनेम और पासवर्ड साझा करने के बदले भुगतान का आश्वासन दिया जाता है, जिसके बाद अकाउंट का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
पुलिस ने जारी की सतर्कता सलाह
साइबर क्राइम अधिकारियों ने लोगों को अपने सोशल मीडिया और बैंक खातों की जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था के साथ साझा न करने की सलाह दी है। डीआईजी साइबर क्राइम रोहित मालपानी ने कहा है कि इस तरह के मामलों में सतर्कता बरतना आवश्यक है और किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव या गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित एजेंसियों को देनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी योजनाओं में शामिल होने से यूजर्स को कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।