दो महीने सात दिन बाद धर्मशाला लौटे दलाई लामा, कांगड़ा एयरपोर्ट से मैक्लोडगंज तक स्वागत
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा दो महीने सात दिन के लद्दाख प्रवास के बाद शुक्रवार को मैक्लोडगंज स्थित अपने आवास लौट आए। कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचने पर तिब्बती समुदाय, श्रद्धालुओं, समर्थकों और स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट से मैक्लोडगंज तक मार्ग के प्रमुख स्थानों पर लोग उनके अभिनंदन के लिए मौजूद रहे। लद्दाख में उन्होंने धार्मिक शिक्षाओं, जनदर्शन और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था।
धर्मशाला
कांगड़ा एयरपोर्ट पर तिब्बती चीफ जस्टिस कमिश्नर येशी वांगमो, स्पीकर डोलमा सेरिंग तेखांग और अन्य प्रतिनिधियों ने दलाई लामा का स्वागत किया। एयरपोर्ट के निकास द्वार पर कलाकारों ने पारंपरिक ताशी शोलपा नृत्य प्रस्तुत किया। उनके धर्मशाला लौटने की सूचना मिलने के बाद तिब्बती समुदाय के लोग, शुभचिंतक और स्थानीय निवासी एयरपोर्ट से मैक्लोडगंज स्थित उनके आवास तक जाने वाले मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर एकत्र हुए थे।
मैक्लोडगंज स्थित दलाई लामा के निवास पर भी स्वागत की विशेष तैयारियां की गई थीं। निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्यों और केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सचिवों ने उनकी अगवानी की। आवास के प्रवेश द्वार पर उपसभापति, अन्य न्याय आयुक्त, मंत्री और तीन स्वायत्त निकायों के प्रमुख भी मौजूद रहे। दलाई लामा के लौटने के साथ ही मैक्लोडगंज और आसपास रहने वाले तिब्बती समुदाय में धार्मिक गतिविधियों को लेकर उत्साह बढ़ा है।
लद्दाख में धार्मिक कार्यक्रमों में लिया हिस्सा
धर्मशाला से रवाना होने के बाद दलाई लामा दिल्ली गए थे, जहां 8 जून को उनके बाएं घुटने का सफल प्रत्यारोपण किया गया। ऑपरेशन के बाद उन्होंने दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ लिया और 28 जून तक वहीं रहे। स्वास्थ्य में सुधार के बाद वह लद्दाख रवाना हुए। वहां दो महीने सात दिन के प्रवास के दौरान उन्होंने धार्मिक शिक्षाएं दीं, जनदर्शन किए और कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया। लेह के कालचक्र टीचिंग ग्राउंड में उन्होंने अपने 91वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया।
लद्दाख प्रवास के दौरान दलाई लामा स्टोक स्थित बुद्ध प्रतिमा और गोंपा गांव में बुद्ध प्रतिमा एवं स्तूप पर आयोजित प्रार्थना समारोहों में शामिल हुए। उन्होंने महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर के बुद्ध गार्डन का दौरा भी किया। इसके अलावा लद्दाख बौद्ध संघ, लद्दाख गोंपा संघ और वहां रह रहे तिब्बती समुदाय की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित दीर्घायु प्रार्थना समारोह में भी उन्होंने भाग लिया।
धर्मशाला रवाना होने से कुछ दिन पहले कालचक्र टीचिंग ग्राउंड में दलाई लामा के सम्मान में धन्यवाद एवं विदाई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्थानीय लोगों और तिब्बती समुदाय ने उनके प्रवास के लिए आभार जताते हुए उन्हें विदाई दी। इस अवधि में विभिन्न आयु वर्ग और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से आए कुल 21,572 लोगों को दलाई लामा के सार्वजनिक दर्शन और उनसे मुलाकात का अवसर मिला।