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Landslide: कुमारहट्टी में 300 मीटर सड़क धंसी, चिकनी खड्ड में झील बनने से फ्लैश फ्लड का खतरा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 52 Mins Ago • 1 Min Read

Landslide: नालागढ़ से रामशहर होकर शिमला जाने वाले प्रमुख मार्ग पर कुमारहट्टी के पास गुरुवार देर रात भारी भूस्खलन से सड़क का करीब 300 मीटर हिस्सा धंस गया। सड़क का बड़ा भाग खड्ड की ओर खिसकने से यातायात पूरी तरह बंद हो गया और नालागढ़ का वाया रामशहर शिमला से सीधा सड़क संपर्क कट गया। चिकनी खड्ड में मलबा जमा होने से कृत्रिम झील बन गई है, जिससे निचले क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड का खतरा पैदा हो गया है।

नालागढ़/कुमारहट्टी

जानकारी के अनुसार कुमारहट्टी-मितियां मार्ग पर होटल होमटाउन रिजॉर्ट के समीप पहाड़ी दरकने के बाद बड़ी मात्रा में मलबा सड़क और चिकनी खड्ड में गिर गया। भूस्खलन का दायरा बड़ा होने के कारण सड़क का करीब 300 मीटर लंबा हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मार्ग धंसने के बाद दोनों ओर वाहनों की आवाजाही रुक गई है। इससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा क्षेत्र का सीधा सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

खड्ड का बहाव रुका, अस्थायी बांध पर बढ़ा दबाव

भूस्खलन का मलबा चिकनी खड्ड में जमा होने से पानी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। घटनास्थल पर लगातार पानी जमा होने के कारण बड़ी कृत्रिम झील बन गई है। मलबे से बने अस्थायी बांध पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। यदि यह बांध अचानक टूटता है तो खड्ड के निचले क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। प्रशासन के सामने जमा पानी की सुरक्षित निकासी और आसपास के क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है।

अधिकारियों और एसडीआरएफ ने किया निरीक्षण

घटना की सूचना मिलने के बाद नालागढ़ के विधायक हरदीप सिंह बावा, एसडीएम नरेंद्र आहलूवालिया, लोक निर्माण विभाग और एसडीआरएफ की टीम ने मौके का दौरा किया। अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त सड़क, भूस्खलन वाले हिस्से और खड्ड में जमा पानी से बने खतरे का निरीक्षण किया। संबंधित विभागों को क्षेत्र की लगातार निगरानी करने और लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क की बहाली से पहले पहाड़ी और खड्ड में जमा मलबे की स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाएगा।

मार्ग का बड़ा हिस्सा धंसने के कारण इसकी बहाली आसान नहीं मानी जा रही है। कुमारहट्टी के समीप इसी स्थान पर पिछले वर्ष भी सड़क का बड़ा भाग धंस गया था। उस समय मार्ग को दोबारा यातायात योग्य बनाने में करीब एक माह लगा था और लोगों को लंबे समय तक वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा था। इस बार भी सड़क की मरम्मत शुरू करने से पहले मलबे की स्थिरता और कृत्रिम झील में जमा पानी की सुरक्षित निकासी से जुड़े पहलुओं का आकलन जरूरी होगा।

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