डीएवी राजगढ़ में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग पर कार्यशाला, शिक्षकों ने सीखे आधुनिक शिक्षण के नए आयाम
नई शिक्षा नीति के अनुरूप आयोजित कार्यशाला में शिक्षकों को कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई। समस्या समाधान, तार्किक चिंतन और नवाचार आधारित शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच और रचनात्मकता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
राजगढ़
डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल राजगढ़ में शनिवार को कम्प्यूटेशनल थिंकिंग विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में डीएवी एवं गुरुकुल विद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लेकर आधुनिक शिक्षा प्रणाली में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की उपयोगिता और उसके व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को समस्या समाधान, तार्किक चिंतन, पैटर्न पहचान, एल्गोरिदम निर्माण तथा डिजिटल युग में आवश्यक कौशलों के प्रति जागरूक करना रहा। विभिन्न गतिविधियों, प्रस्तुतियों और संवादात्मक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की मूल अवधारणाओं और कक्षा शिक्षण में इसके प्रभावी उपयोग से अवगत कराया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में केवल विषयगत ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता विकसित करना भी आवश्यक है। कम्प्यूटेशनल थिंकिंग विद्यार्थियों को जटिल समस्याओं को छोटे भागों में विभाजित कर उनका व्यवस्थित समाधान खोजने में मदद करती है तथा निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाती है।कार्यशाला के मूल्यांकन एवं प्रशंसा सत्र में अकाल कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज के रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्रोफेसर अनीता चौधरी तथा प्राणी विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर बलविंदर सिंह मौजूद रहे। उन्होंने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों में नवाचार और विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य चंद्रेश्वर शर्मा ने प्रतिभागी शिक्षकों और विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत कम्प्यूटेशनल थिंकिंग जैसे कौशलों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी और व्यावसायिक चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण आवश्यक है। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई।