डिजिटल विजन प्रकरण में गिरफ्तारी और फैक्ट्री संचालन पर जवाबदेही के सवाल
डिजिटल विजन दवा फैक्ट्री से जुड़े कथित ड्रग डायवर्जन मामले में जांच की प्रगति, आरोपियों की गिरफ्तारी और कंपनी की मौजूदा कारोबारी गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुरषोत्तम लाल गोयल को हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत पर राहत नहीं मिलने के बावजूद गिरफ्तारी की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में एनसीबी, पुलिस, औषधि नियंत्रण विभाग और राज्य सरकार से आधिकारिक तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा की जा रही है।
सिरमौर/कालाअंब
कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र स्थित डिजिटल विजन दवा फैक्ट्री का मामला कथित रूप से मनोप्रभावी दवाओं और कोडीन युक्त कफ सिरप के बड़े पैमाने पर अवैध डायवर्जन से जुड़ा है। मामले में पुरषोत्तम लाल गोयल और उनके बेटों कोनिक गोयल तथा मैनिक गोयल के नाम सामने आए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में कथित नेटवर्क का अनुमानित मूल्य करीब 600 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होनी है और सभी संबंधित पक्षों को कानून के तहत अपना बचाव रखने का अधिकार है।
अग्रिम जमानत पर राहत नहीं, कार्रवाई की स्थिति अस्पष्ट
मामले में पुरषोत्तम लाल गोयल को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिली और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। न्यायिक कार्यवाही के दौरान हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता का विषय भी सामने आया था। इसके बावजूद उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि जांच एजेंसी ने गिरफ्तारी के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं। यदि कोई कार्रवाई की गई है तो उसकी मौजूदा स्थिति और यदि गिरफ्तारी नहीं हुई है तो उसके कानूनी या जांच संबंधी कारण आधिकारिक रूप से सामने आने चाहिए।
फैक्ट्री के मौजूदा संचालन पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग
स्थानीय स्तर पर यह प्रश्न भी उठ रहा है कि कंपनी का उत्पादन, बिक्री और वितरण बंद है या किसी प्रबंधन अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से कारोबारी गतिविधियां जारी हैं। कोनिक गोयल की भूमिका और कारोबार के संचालन से जुड़े प्रश्नों पर संबंधित विभागों से दस्तावेजों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी देने की मांग की जा रही है। बिना पुष्टि किसी व्यक्ति को फरार बताना या कंपनी संचालन की जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा, लेकिन फैक्ट्री की कानूनी स्थिति स्पष्ट करना नियामक विभागों की जिम्मेदारी है।
इस प्रकरण में एनसीबी से जांच और गिरफ्तारी की स्थिति, जबकि राज्य के औषधि नियंत्रण विभाग से फैक्ट्री के लाइसेंस, उत्पादन, बिक्री तथा नियामकीय अनुपालन की जानकारी अपेक्षित है। राज्य सरकार और पुलिस की भूमिका को लेकर भी यह सवाल है कि क्या मामले की प्रगति की समीक्षा की गई, संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी गई या कंपनी की वर्तमान गतिविधियों की स्वतंत्र जांच कराई गई। आधिकारिक जानकारी के अभाव में अटकलें बढ़ सकती हैं, इसलिए जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करना जरूरी माना जा रहा है।
दोष तय करना नहीं, आधिकारिक जवाबदेही जरूरी
इस मामले में किसी भी व्यक्ति को अदालत के निर्णय से पहले दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आरोपियों को अपना पक्ष रखने और कानूनी बचाव का पूरा अधिकार है। इसके साथ ही गंभीर आरोपों की जांच कर रही एजेंसियों से यह स्पष्ट करने की अपेक्षा भी है कि जांच किस चरण में है, अब तक क्या कार्रवाई हुई और आगे कौन से कदम प्रस्तावित हैं। डिजिटल विजन प्रकरण से जुड़े सवालों का उत्तर राजनीतिक बयान या अनुमान के बजाय एनसीबी, पुलिस, औषधि नियंत्रण विभाग और राज्य सरकार के आधिकारिक तथ्यों से सामने आना चाहिए।