Electric Ambulance / इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस खरीदने पर 35 प्रतिशत तक सब्सिडी, सरकार ने जारी की योजना
Electric Ambulance : इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवाओं में स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस की खरीद पर सब्सिडी प्रदान करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत निजी और सरकारी अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवा प्रदाताओं, नगर निकायों तथा अन्य पात्र संस्थानों को इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस खरीदने पर निर्धारित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
नई दिल्ली
इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस को प्रोत्साहन देने की पहल
केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस की खरीद पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत निजी अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनियों, सरकारी अस्पतालों तथा अन्य पात्र संस्थानों को इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस खरीदने पर निर्धारित सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से परिचालन लागत को नियंत्रित करने के साथ-साथ स्वच्छ परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा।
35 प्रतिशत तक मिलेगी वित्तीय सहायता
योजना के अनुसार पात्र संस्थानों को इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस खरीदने पर वाहन की लागत का 35 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। वर्तमान में अधिकांश एम्बुलेंस डीजल या पेट्रोल आधारित हैं, जिनके संचालन में ईंधन पर नियमित खर्च होता है। इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस के उपयोग से ईंधन लागत में कमी आने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने खरीद के समय सब्सिडी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है, ताकि संस्थानों के लिए इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस अपनाना अधिक व्यावहारिक हो सके।
500 करोड़ रुपये का प्रावधान
सरकार ने इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस राशि का उपयोग देशभर में इलेक्ट्रिक एम्बुलेंसों को प्रोत्साहन देने और पात्र संस्थानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा। योजना के माध्यम से विभिन्न राज्यों और शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संगठनों को इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस खरीदने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।
सरकारी और निजी संस्थान होंगे पात्र
योजना का लाभ केवल निजी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी अस्पताल, सरकारी विभाग, नगर निकाय, स्थानीय प्रशासनिक संस्थान तथा अन्य सरकारी एजेंसियां भी इस योजना के तहत पात्र होंगी। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न संस्थान निर्धारित पात्रता शर्तों के अनुसार योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इससे सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस के उपयोग को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
BLS और ALS एम्बुलेंस भी शामिल
योजना में सामान्य रोगी परिवहन एम्बुलेंस के अलावा बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) श्रेणी की एम्बुलेंसों को भी शामिल किया गया है। BLS एम्बुलेंस प्राथमिक चिकित्सा और सामान्य आपातकालीन सेवाओं के लिए उपयोग की जाती हैं, जबकि ALS एम्बुलेंस गंभीर मरीजों के परिवहन और उन्नत चिकित्सा सुविधाओं से लैस होती हैं। इन दोनों श्रेणियों को योजना में शामिल करने से विभिन्न स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।
परिचालन लागत और उत्सर्जन में कमी पर फोकस
विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस के उपयोग से ईंधन पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों की रखरखाव लागत भी पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों की तुलना में अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देना है, जिससे उत्सर्जन में कमी लाने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में सहायता मिल सके। योजना के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में एक संरचित प्रयास किया जा रहा है।