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वन अधिकार दावों के निपटारे में न हो देरी, जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

राजस्व, उद्यान, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने चंबा में अधिकारियों को वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत पात्र लोगों के दावों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयबद्ध निपटारा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। मंत्री ने हितधारकों को प्रशिक्षण देने तथा उपमंडल और जिला स्तरीय समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने को भी कहा।

चंबा

जगत सिंह नेगी ने बचत भवन में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों को उनके अधिकार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में विधायक नीरज नैय्यर विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंत्री ने जिला प्रशासन को सभी हितधारकों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण की व्यवस्था करने और लोगों की सुविधा के अनुसार उपमंडल स्तरीय कमेटी तथा जिला स्तरीय कमेटी की बैठकें नियमित अंतराल पर करवाने के निर्देश दिए।

भूमि के मालिकाना हक से जुड़े दावों की समीक्षा

कैबिनेट मंत्री ने जिले में भूमि के मालिकाना हक से संबंधित लोगों के दावों की विस्तृत समीक्षा की और संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा कर्मचारियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक दावे पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करते हुए उसका समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। विधायक नीरज नैय्यर ने कहा कि अधिनियम के तहत विभागीय कार्रवाई को लोगों की सुविधा के अनुरूप पायलट परियोजना के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने अधिनियम के संबंध में लोगों को जागरूक करने और आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए भी कदम उठाने को कहा।

उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बैठक में वन अधिकार अधिनियम के तहत जिले के पात्र लोगों को अधिकार दिलाने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। अतिरिक्त उपायुक्त अमित मैहरा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। बैठक में जिला परिषद उपाध्यक्ष लियाकत अली, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष ओम प्रकाश, पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी, वन अरण्यपाल राकेश कुमार, एसडीएम अनिल भारद्वाज, मनीष सोनी, चिराग शर्मा, राजेश जारयाल, सुरेंद्र कटोच, जिला राजस्व अधिकारी डॉ. विक्रमजीत सिंह, वन मंडल अधिकारी कृतज्ञ कुमार और डॉ. कुलदीप जमवाल सहित राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

दावे पर इस तरह आगे बढ़ती है प्रक्रिया

वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत वन निवासी अनुसूचित जनजातियों और अन्य पात्र पारंपरिक वन निवासियों को वन भूमि पर स्व-खेती एवं आवास सहित व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों की मान्यता दी जाती है। पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रपत्र में व्यक्तिगत वन अधिकार का दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। वन अधिकार समिति की जांच और सत्यापन के बाद दावा ग्राम सभा के समक्ष रखा जाता है। ग्राम सभा की संस्तुति मिलने के बाद मामला उपमंडल स्तरीय कमेटी और जिला स्तरीय कमेटी के पास निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ता है।

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