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Fraud / फर्जी 10वीं की मार्क्सशीट के आधार पर डाक विभाग में नियुक्ति का मामला, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Fraud : किन्नौर के नामगिया शाखा डाकघर में फर्जी 10वीं की मार्क्सशीट के आधार पर नियुक्ति से जुड़े मामले में सीबीआई ने एक व्यक्ति सहित कई अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच में प्रमाणपत्र रिकॉर्ड में नहीं मिलने की पुष्टि होने के बाद एजेंसी दस्तावेजों और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच कर रही है।

शिमला

फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति का मामला

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने डाक विभाग में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। मामला किन्नौर जिले के नामगिया शाखा डाकघर से संबंधित है, जहां एक अभ्यर्थी पर कथित रूप से फर्जी 10वीं की मार्क्सशीट प्रस्तुत कर ग्रामीण डाक सेवक (शाखा डाकपाल) के पद पर नियुक्ति प्राप्त करने का आरोप है। एफआईआर में एक व्यक्ति के साथ कई अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को भी सह-आरोपी बनाया गया है।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

रामपुर डाक मंडल के अधीक्षक जोगिंदर सिंह चौधरी द्वारा भेजी गई शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जांच शुरू की। जांच निरीक्षक रविंद्र कुमार को सौंपी गई। एफआईआर के अनुसार बिहार के सीतामढ़ी जिले के सुरसंड निवासी सुजीत कुमार ने ग्रामीण डाक सेवक भर्ती के दौरान तमिलनाडु राज्य स्कूल परीक्षा बोर्ड की 10वीं की मार्क्सशीट प्रस्तुत की थी। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर 14 अगस्त 2021 को उसकी नियुक्ति किन्नौर के नामगिया शाखा डाकघर में शाखा डाकपाल के रूप में की गई।

सत्यापन में रिकॉर्ड में नहीं मिला प्रमाणपत्र

डाक विभाग ने नियुक्ति के बाद संबंधित प्रमाणपत्र का सत्यापन तमिलनाडु के सरकारी परीक्षा निदेशालय, चेन्नई से कराया। जांच रिपोर्ट में संयुक्त निदेशक (कार्मिक) ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत प्रमाणपत्र विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है और ऐसा कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया था। इसके बाद विभाग ने 19 मई 2022 को संबंधित कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दीं। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित कर्मचारी 14 अगस्त 2021 से 19 मई 2022 तक पद पर कार्यरत रहा और इस अवधि में उसे वेतन एवं भत्तों के रूप में 1,31,038 रुपये का भुगतान किया गया।

अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच

सीबीआई के अनुसार मामले में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगा रही है कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी नियुक्तियों में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका रही है या नहीं। सीबीआई के पुलिस अधीक्षक राजेश चहल ने बताया कि जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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