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Ganesh Chaturthi 2022: कल घर-घर विराजेंगे गणपति, जानिए- गणेश प्रतिमा स्थापना के नियम और….

SAPNA THAKUR | 30 अगस्त 2022 at 2:38 pm

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HNN/ नाहन

31 अगस्त, बुधवार से 10 दिनों तक चलने वाला गणेशोत्सव शुरू होने जा रहा है। गणेशोत्सव 31 अगस्त से 09 सितंबर तक चलेगा जहां पर पहले दिन यानी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर घर-घर भगवान गणपति विराजेंगे। 10वे दिन अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा का विसर्जन भी किया जाएगा। अनन्त चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु-जन बड़े ही धूम-धाम के साथ सड़क पर जुलूस निकालते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा का सरोवर, झील, नदी आदि में विसर्जन करते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्र काल में स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था। भाद्रपद गणेश चतुर्थी को विनाय चतुर्थी, कलंक चतु्र्थी और डण्डा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश विद्या, बुद्धि, विघ्नहर्ता, विनाशक, मंगलकारी, सिद्धिदायक और समृद्धिदाता के प्रतीक हैं।

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गणेश प्रतिमा स्थापना के नियम
भगवान गणेश को विध्नहर्ता और समृद्धि दाता देव माना गया है। घर पर भगवान गणेश की एक या दो ही मूर्तियां रखनी चाहिए। भूलकर भी तीन की संख्या में गणेश की मूर्ति की स्थापना नहीं करनी चाहिए। कभी भी खंडित गणेश प्रतिमा की स्थापना नहीं करनी चाहिए। घर में यदि भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित कर रहें तो इस तरह से करें कि घर के किसी भी कमरे से उनकी पीठ दिखाई ना दे, क्योंकि पीठ दरिद्रता होती है और सम्मुख से सुख समृद्धि आती है।

घर पर भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करने से पहले इस बात का विशेष ध्यान देना चाहिए कि मूर्ति में उनकी सूंड की दिशा किस ओर है। वास्तु के अनुसार, दाहिनी तरफ सूंड वाले भगवान को सिद्धिविनायक जबकि बाईं ओर की सूंड वाले गणेशजी को वक्रतुंड कहा जाता है। ऐसे में अगर आप गणेश चतुर्थी पर अपने घर में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करने जा रहे हैं तो वक्रतुंड गणेश प्रतिमा करना ज्यादा शुभ होता है। क्योंकि वक्रतुंड गणेशजी की पूजा के नियम आसान और कम होते हैं।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाते हैं ?
पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश चतुर्थी को गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत की रचना के लिए गणेश जी का आह्वान किया था और उनसे महाभारत को लिपिबद्ध करने की प्रार्थना की। कहते हैं गणेश चतुर्थी के दिन ही व्यास जी ने श्लोक बोलना और गणपति जी ने महाभारत को लिपिबद्ध करना शुरू किया था। 10 दिन तक बिना रूके गणपति ने लेखन कार्य किया। इस दौरान गणेश जी पर धूल मिट्‌टी की परत जम गई। 10 दिन बाद यानी की अनंत चतुर्दशी पर बप्पा ने सरस्वती नदी में खुद को स्वच्छ किया। तब से ही हर साल 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाया जाता है।

पूजा-विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
इस दिन गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना की जाती है।
गणपति भगवान का गंगा जल से अभिषेक करें।
गणपति की प्रतिमा की स्थापना करें।
संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
भगवान गणेश को पुष्प अर्पित करें।
भगवान गणेश को दूर्वा घास भी अर्पित करें।
भगवान गणेश को सिंदूर लगाएं।
भगवान गणेश का ध्यान करें।
गणेश जी को मोदक या लड्डूओं का भोग भी लगाएं।
भगवान गणेश की आरती जरूर करें।

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