हादसा: सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढही, 6 की मौत; CM रेखा गुप्ता ने दिए जांच के आदेश
हादसा: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार (6 सितंबर) को पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 लोगों को बचाया गया है। मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका के बीच खोज एवं बचाव अभियान जारी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए और कहा कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के साथ दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली
एनडीआरएफ की टीम मलबे में खोजबीन के लिए प्रशिक्षित कुत्तों की मदद ले रही है और मलबा धीरे-धीरे हटाया जा रहा है। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार, इमारत में रहने वाले सभी छात्रों का पता लगा लिया गया है, लेकिन किसी अज्ञात मजदूर के अंदर फंसे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक अभियान जारी रहेगा। हादसे के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में इमारत गिरने के बाद धूल का गुबार उठता दिखाई दिया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल पर हालात का जायजा लेने के बाद कहा कि बेसमेंट में पानी भरने से हादसा हुआ और सरकार पूरे मामले पर नजर रख रही है। उन्होंने पुरानी इमारतों का ऑडिट कराने तथा जांच के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही। मुख्यमंत्री के अनुसार, गिरी हुई इमारत के पड़ोस में स्थित भवन को भी गिराया जाएगा और अवैध इमारतों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने भवन मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश देते हुए कहा कि जिम्मेदार पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जवाबदेही तय की जाएगी।
भवन मालिक की तलाश में छापेमारी
दिल्ली पुलिस भवन मालिक हरिराम की गिरफ्तारी के लिए गुरुग्राम सहित कई स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है, लेकिन वह घर पर नहीं मिला। पुलिस को आशंका है कि वह दिल्ली-एनसीआर में कहीं छिपा है। उसकी तलाश में करीबियों और रिश्तेदारों के ठिकानों पर भी दबिश दी गई है। दूसरी ओर, हादसे के बाद सत्य निकेतन क्षेत्र में कई पीजी संचालकों ने इमारतों के बाहर लगे पीजी के बोर्ड हटा दिए और परिसरों पर ताले लगा दिए, ताकि वहां पीजी संचालित होने की पहचान न हो सके।
जर्जर इमारतों को नोटिस जारी
दिल्ली नगर निगम के मुताबिक, ढही इमारत की पहचान पी-14, सत्य निकेतन के रूप में हुई है। करीब 55 वर्ग गज क्षेत्रफल वाली यह संपत्ति पुनर्वास कॉलोनी का हिस्सा है और इसमें बेसमेंट, भूतल से चौथी मंजिल तक निर्माण था। इमारत के 1990 के दशक में बने होने की जानकारी दी गई है। निगम का कहना है कि संपत्ति की बुकिंग या सीलिंग का कोई रिकॉर्ड नहीं है और यहां हुए काम को लेकर कोई शिकायत भी नहीं मिली थी। हादसे के बाद निगम ने संबंधित गली की जर्जर इमारतों को नोटिस जारी किए हैं।
दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने कहा कि चार मंजिल से अधिक वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उन्हें बर्खास्त करने की बात भी कही। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। बचाव दल फिलहाल मलबे की जांच कर रहे हैं और अभियान पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इमारत के अंदर कोई अन्य व्यक्ति फंसा था या नहीं।