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हादसा: सत्य निकेतन में इमारत ढहने के बाद बड़ा कदम, MCD के पांच अधिकारी निलंबित

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

हादसा: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली नगर निगम ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। MCD आयुक्त के आदेश पर हुई इस कार्रवाई में डिप्टी कमिश्नर से लेकर जूनियर इंजीनियर तक शामिल हैं। सभी अधिकारियों का निलंबन उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक जारी रहेगा।

दिल्ली

निलंबित अधिकारियों में डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रणवीर सिंह, कार्यकारी अभियंता बिल्डिंग ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता बिल्डिंग सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। MCD के सतर्कता विभाग ने इन अधिकारियों के लिए अलग-अलग निलंबन आदेश जारी किए हैं। सत्य निकेतन में इमारत गिरने के करीब 24 घंटे बाद नगर निगम की ओर से यह कार्रवाई की गई है।

अधिकारियों की जिम्मेदारियों पर सवाल

नगर निगम के बिल्डिंग विभाग की जिम्मेदारी निर्माण गतिविधियों की निगरानी करने और भवन नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करने की होती है। किसी स्थान पर बिना मंजूरी या स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की निगरानी भूमिका की जांच की जा सकती है। सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर आमतौर पर मौके की शुरुआती निगरानी से जुड़े होते हैं, जबकि कार्यकारी अभियंता और अधीक्षण अभियंता के स्तर पर क्षेत्र की निगरानी एवं कार्रवाई की जिम्मेदारी होती है। डिप्टी कमिश्नर जोन के प्रशासनिक अधिकारी होते हैं।

कमजोर इमारत को गिराने की तैयारी

MCD आयुक्त संजीव खिरवार ने घटना के बाद बताया था कि हादसे में सात लोगों की जान गई है। उनके अनुसार, ढही हुई इमारत के साथ लगती इमारत भी कमजोर हो गई है। उसे सुरक्षित बनाने के लिए रातभर मजबूती का काम किया गया और अगले एक से दो दिनों के भीतर योजनाबद्ध तरीके से गिराने की बात कही गई। इस दौरान आसपास की सुरक्षा को देखते हुए संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई थी।

आयुक्त के अनुसार, इमारत के मालिक से संबंधित दस्तावेज प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड से मिले हैं। मालिक ने पिछले वर्ष प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया था और वर्ष 2007 में कन्वर्जन चार्ज भी दिया था। पुलिस इमारत के मालिक का पता लगाने का प्रयास कर रही है। यह इमारत 1970 के दशक में बनी थी। नगर निगम के मुताबिक, इस इमारत को पहले कभी नोटिस नहीं दिया गया था, न इसे सील किया गया और न ही इसके बारे में कोई शिकायत मिली थी।

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