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रिश्तेदारी और सौतेले माता-पिता द्वारा दत्तक ग्रहण के लिए अब सीएआरए पंजीकरण होगा अनिवार्य

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 46 Mins Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश में रिश्तेदारी और सौतेले माता-पिता द्वारा बच्चे को गोद लेने के मामलों में अब केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) के माध्यम से पंजीकरण और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होगा। जिला प्रशासन के अनुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जिला दंडाधिकारी दत्तक ग्रहण प्रमाणपत्र जारी करेंगे।

शिमला

दत्तक ग्रहण के लिए पंजीकरण और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि राज्य में अब रिश्तेदारी के भीतर होने वाले दत्तक ग्रहण तथा सौतेले माता-पिता द्वारा बच्चे को गोद लेने के मामलों में भी केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) पोर्टल पर आवेदन करना अनिवार्य होगा। आवेदन के बाद दस्तावेजों की जांच, पात्रता का सत्यापन और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जिला दंडाधिकारी की ओर से दत्तक ग्रहण प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इसके बाद ही बच्चे को कानूनी रूप से दत्तक संतान का दर्जा मिलेगा। इस प्रक्रिया के लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं है और आवेदन से लेकर प्रमाणपत्र जारी होने तक की पूरी व्यवस्था नियमों के अनुसार संचालित की जाएगी।

कानूनी अधिकारों की सुरक्षा पर रहेगा जोर

उपायुक्त ने कहा कि पहले कई मामलों में परिवार या रिश्तेदारी के आधार पर बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाए बच्चों को गोद लिया जाता था। ऐसे मामलों में बाद में उत्तराधिकार, अभिभावकत्व, स्कूल रिकॉर्ड, पहचान दस्तावेज और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं में कठिनाइयां सामने आती थीं। नई व्यवस्था का उद्देश्य इन सभी मामलों को विधिसम्मत तरीके से दर्ज करना और दत्तक माता-पिता तथा बच्चे दोनों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से सुरक्षित करना है। प्रशासन के अनुसार इससे भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना भी कम होगी।

बाल आश्रमों के बच्चों को गोद लेने की अपील

जिला प्रशासन ने सक्षम और इच्छुक परिवारों से शिशु गृह और बाल आश्रमों में रह रहे बच्चों को गोद लेने के लिए आगे आने का आग्रह किया है। प्रशासन के अनुसार 20 दिसंबर 2022 से 1 सितंबर 2025 तक ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ योजना के तहत 25 बच्चों को दत्तक परिवार उपलब्ध कराए जा चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों, पात्रता मानकों और दस्तावेजी जांच के आधार पर पूरी की जाती है। प्रशासन ने कहा कि पात्र परिवारों की भागीदारी से संस्थागत देखरेख में रह रहे बच्चों को पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।

रिश्तेदारी में दत्तक ग्रहण के लिए भी सभी शर्तें लागू

जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल ने बताया कि दत्तक ग्रहण के लिए पात्रता का निर्धारण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है। रिश्तेदारी में गोद लेने के मामलों में भी जैविक माता-पिता अथवा वैध अभिभावक की सहमति, दस्तावेजों का सत्यापन और अन्य कानूनी शर्तें पूरी करना आवश्यक होगा। यदि बच्चे की आयु पांच वर्ष या उससे अधिक है, तो उसकी सहमति भी ली जाएगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे को शिक्षा, पालन-पोषण, उत्तराधिकार और अन्य वैधानिक अधिकार प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि आवेदन के समय पहचान, आय और पारिवारिक स्थिति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाती है।

सौतेले माता-पिता और एनआरआई के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया

जिला बाल संरक्षण अधिकारी इंदु शर्मा ने बताया कि सौतेले माता-पिता द्वारा दत्तक ग्रहण के मामलों में भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। भारतीय नागरिकों के साथ-साथ एनआरआई और विदेशी नागरिक भी संबंधित नियमों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति, पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विवाहित दंपती, एकल अभिभावक और अन्य पात्र आवेदक निर्धारित शर्तों के तहत आवेदन कर सकते हैं। पूरी प्रक्रिया किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा संबंधित नियमों के तहत सीएआरए की निगरानी में संचालित की जाती है।