खरीफ सीजन से पहले डीएपी और एनपीके खाद के दाम बढ़े, किसानों पर बढ़ेगा खर्च
हिमाचल प्रदेश में खरीफ सीजन से पहले किसानों को डीएपी और एनपीके खाद की खरीद पर अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रदेश सरकार की ओर से प्रति बोरी 50 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी को लेकर नई अधिसूचना जारी न होने के कारण इफको ने नए स्टॉक की बिक्री बढ़ी हुई दरों पर करने की बात कही है।
शिमला
सरकारी अधिसूचना नहीं आने से बढ़ी खाद की कीमतें
प्रदेश सरकार पूर्व में किसानों को राहत देने के लिए डीएपी और एनपीके खाद पर प्रति बोरी 50 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान कर रही थी। इस योजना के तहत किसानों को खाद कम कीमत पर उपलब्ध हो रही थी, जिससे कृषि लागत को कुछ हद तक नियंत्रित रखने में मदद मिलती थी। हालांकि इस वर्ष अब तक सरकार की ओर से इस सब्सिडी को जारी रखने संबंधी कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इसके चलते इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने नए स्टॉक की बिक्री संशोधित और बढ़ी हुई दरों पर करने का निर्णय लिया है। खरीफ सीजन के दौरान खाद की मांग बढ़ने के कारण इसका असर बड़ी संख्या में किसानों पर पड़ सकता है।
एनपीके और डीएपी खाद के दामों में बढ़ोतरी लागू
जानकारी के अनुसार एनपीके 12-32-16 खाद की एक बोरी, जो पहले किसानों को 1850 रुपये में उपलब्ध हो रही थी, अब 1900 रुपये में मिलेगी। इसी प्रकार डीएपी खाद की कीमत में भी प्रति बोरी 50 रुपये की बढ़ोतरी होने जा रही है। कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान धान, मक्का और अन्य फसलों की बुवाई के लिए डीएपी और एनपीके खाद का व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी किसानों की उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकती है। कई किसान पहले ही मौसम और कृषि लागत में बढ़ोतरी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
इफको को बीते वर्ष की सब्सिडी राशि भी लंबित
सूत्रों के अनुसार पिछले वर्ष की सब्सिडी राशि का भुगतान भी अब तक इफको को नहीं किया गया है। लगातार लंबित भुगतान और नई अधिसूचना जारी न होने के कारण बिना सब्सिडी के खाद उपलब्ध करवाने की स्थिति बनी है। उर्वरक सहकारी संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार और संबंधित विभागों से जो दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार आगामी निर्णय लिए जाएंगे। फिलहाल नए स्टॉक की बिक्री बढ़ी हुई कीमतों पर ही की जाएगी। इफको अधिकारियों के अनुसार सब्सिडी संबंधी कोई स्पष्ट आदेश जारी होने के बाद ही दरों में राहत संभव हो पाएगी।
खरीफ सीजन की तैयारियों पर पड़ सकता है असर
प्रदेश के कई जिलों में खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और किसान खाद की खरीद में जुट गए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खाद की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर खेती की कुल लागत पर पड़ता है, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों पर इसका प्रभाव अधिक दिखाई देता है। किसानों का कहना है कि खेती में पहले से बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई जैसी लागत बढ़ चुकी है, ऐसे में खाद महंगी होने से आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। अब किसानों और सहकारी संस्थाओं की नजर सरकार की अगली अधिसूचना और सब्सिडी संबंधी निर्णय पर बनी हुई है।
