हिमाचल प्रदेश के 15 मई 2003 से पहले भर्ती कर्मचारियों का NPS अंशदान GPF में होगा स्थानांतरित
15 मई 2003 से पहले विज्ञापित पदों के आधार पर नियुक्त कर्मचारियों को सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972 के तहत शामिल किया जाएगा। वर्तमान सेवा में कार्यरत पात्र कर्मचारियों के एनपीएस खाते में जमा कर्मचारी अंशदान को जीपीएफ खाते में स्थानांतरित कर निर्धारित दर से ब्याज प्रदान किया जाएगा।
शिमला
सरकार ने जारी किया नया निर्णय
हिमाचल प्रदेश सरकार ने 15 मई 2003 से पहले विज्ञापित पदों या रिक्तियों के विरुद्ध सरकारी विभागों में नियुक्त कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार के अनुसार, ऐसे सभी पात्र कर्मचारियों को केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 [सीसीएस (पेंशन) रूल्स, 1972] के दायरे में लाया जाएगा। इस व्यवस्था से उन कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, जिनकी नियुक्ति 15 मई 2003 से पहले जारी विज्ञापनों या रिक्तियों के आधार पर हुई थी।
NPS अंशदान GPF खाते में किया जाएगा स्थानांतरित
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में सेवा दे रहे पात्र कर्मचारियों के राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) खाते में जमा कर्मचारी अंशदान को सामान्य भविष्य निधि (GPF) खाते में स्थानांतरित किया जाएगा। इस राशि पर जीपीएफ की निर्धारित ब्याज दर के अनुसार ब्याज भी दिया जाएगा। इससे संबंधित कर्मचारियों के पेंशन और भविष्य निधि खातों में आवश्यक समायोजन किया जाएगा, ताकि उन्हें लागू नियमों के तहत लाभ मिल सके।
पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़ा निर्णय
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद सबसे पहले पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने का निर्णय लिया था। इसके तहत 1 अप्रैल 2023 से पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की गई और इसे प्रभावी बनाने के लिए वित्त विभाग ने 4 मई 2023 को अधिसूचना जारी की थी। सरकार का कहना है कि कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनसे सेवा शर्तों और पेंशन लाभों से जुड़े मामलों में स्पष्टता आए।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने यह भी कहा है कि इस श्रेणी में आने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि से सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972 के अनुसार पेंशन का लाभ दिया जाएगा। इस निर्णय का लाभ 15 मई 2003 से पहले विज्ञापित पदों या रिक्तियों के आधार पर नियुक्त पात्र कर्मचारियों के साथ-साथ सेवानिवृत्त कर्मियों को भी मिलेगा। सरकार के अनुसार, इस फैसले से प्रदेश के हजारों कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को राहत मिलेगी।
