Loading...

हाई कोर्ट की फटकार: कानून बदले की राजनीति का हथियार नहीं, पात्र पूर्व विधायकों को पेंशन देने के आदेश

PRIYANKA THAKUR • 2 Hours Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायकों को पेंशन जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय को एक माह के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा है। आदेश का पालन न होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी प्रावधान रखा गया है।

शिमला

हाईकोर्ट का आदेश और पेंशन बहाली मामला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व विधायकों की पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में विस्तृत आदेश जारी किया है। अदालत ने कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में शामिल हुए और विधानसभा द्वारा अयोग्य घोषित किए गए पूर्व विधायकों की पेंशन बहाल करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। यह आदेश जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने दो अलग-अलग याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई के बाद पारित किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पात्र याचिकाकर्ताओं को नियमों के अनुसार न केवल नियमित पेंशन बल्कि सभी लंबित बकाया राशि भी समयबद्ध तरीके से प्रदान की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी उत्पन्न न हो।

समय सीमा, भुगतान प्रक्रिया और ब्याज का प्रावधान
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पेंशन से संबंधित सभी बकाया और नियमित भुगतान एक माह की निर्धारित अवधि के भीतर अनिवार्य रूप से जारी किए जाएं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो संबंधित राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना राज्य सरकार के लिए अनिवार्य होगा। यह प्रावधान वित्तीय अनुशासन और न्यायिक आदेशों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जोड़ा गया है।

10वीं अनुसूची और संवैधानिक पहलुओं पर अवलोकन
मामले की सुनवाई के दौरान 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) से जुड़े संवैधानिक पहलुओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई। अदालत के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि अयोग्यता का प्रभाव केवल विधानसभा सदस्यता समाप्ति तक सीमित होता है, जबकि पूर्व विधायकों के पेंशन और अन्य वैधानिक लाभों को समाप्त करने के लिए अलग कानूनी आधार और स्पष्ट विधायी प्रावधान आवश्यक होते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी विधायी संशोधन का प्रभाव संविधान की मर्यादा के अनुरूप और सामान्यतः भविष्य की परिस्थितियों पर ही लागू किया जाना चाहिए, न कि पूर्व प्रभाव से।

मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाओं का विवरण
यह मामला उन पूर्व विधायकों से जुड़ा है जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दल-बदल के आधार पर अयोग्य घोषित किया गया था, जिसके बाद उन्हें पेंशन लाभ से वंचित कर दिया गया। इसके पश्चात संबंधित पूर्व विधायकों ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों का विस्तृत परीक्षण किया गया, जिसके बाद अदालत ने यह निर्णय सुनाया।

संशोधन विधेयक और आगे की प्रक्रिया
मामले में राज्य सरकार द्वारा पेंशन से जुड़े संशोधन विधेयकों का भी उल्लेख हुआ, जिनकी संवैधानिक वैधता और प्रभाव को लेकर अदालत ने दिशा-निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायी संशोधनों को पूर्व प्रभाव से लागू करना सामान्यतः संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होता। आदेश के बाद अब राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय को निर्देशों के अनुसार पेंशन भुगतान की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करना होगा, अन्यथा ब्याज सहित भुगतान करना अनिवार्य होगा। मामले में आगे की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया संबंधित विभागों द्वारा तय की जाएगी।