प्राकृतिक खेती के दाम बढ़ने से किसानों को राहत, ‘राजीव गांधी प्राकृतिक खेती योजना’ से बढ़ी आय
Himachalnow / हमीरपुर
हिमाचल प्रदेश सरकार की ‘राजीव गांधी प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान’ योजना किसानों के लिए आय बढ़ाने का माध्यम बन रही है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए सरकार द्वारा घोषित नए न्यूनतम समर्थन मूल्यों में बढ़ोतरी के बाद किसानों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है। गेहूं, मक्की, हल्दी, जौ और अदरक के दाम बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हमीरपुर
फसलों के नए निर्धारित दाम
प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं का दाम 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की 60 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी का जौ 80 रुपये प्रति किलोग्राम और अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया है। इसके साथ ही दूध के दामों में भी संशोधन करते हुए गाय के दूध का मूल्य 61 रुपये और भैंस के दूध का मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। इन फैसलों से किसानों और पशुपालकों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।
किसानों की आय में सुधार के संकेत
हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत अमरोह के छबोट ब्राह्मण गांव के प्रगतिशील किसान संजीव कुमार ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी कृषि आय में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले परंपरागत खेती से सीमित आय मिलती थी, लेकिन प्राकृतिक खेती से फसलों की बिक्री मूल्य बेहतर होने से आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
कम लागत वाली खेती से बढ़ा रुझान
किसान के अनुसार प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता, जिससे लागत कम आती है। घर पर तैयार जीवामृत और बीजामृत के उपयोग से खेती आसान और सुरक्षित हो गई है। सरकार द्वारा समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने के बाद किसानों में प्राकृतिक खेती अपनाने को लेकर रुझान तेजी से बढ़ रहा है और इसे एक स्थायी आय का साधन माना जा रहा है।