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हिमाचल प्रदेश में ऑनलाइन ठगी के मामलों में वृद्धि, गेमिंग रिवॉर्ड के नाम पर युवाओं के 41 हजार खाते फ्रीज

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 2 Hours Ago • 1 Min Read

Himachalnow / सोलन

हिमाचल प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जहां गेमिंग रिवॉर्ड, फर्जी ट्रेडिंग और क्रिप्टो निवेश के नाम पर युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच विभिन्न राज्यों की पुलिस ने प्रदेश से जुड़े करीब 41 हजार बैंक खातों को फ्रीज किया है, जिनमें कई खाते अनजाने में मनी म्यूल के रूप में उपयोग हुए पाए गए हैं।

सोलन

ऑनलाइन ठगी के तरीके

हिमाचल प्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में ऑनलाइन ठगी के नए तरीके सामने आ रहे हैं, जिनमें गेमिंग रिवॉर्ड, बोनस ऑफर, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और क्रिप्टो निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को फंसाया जा रहा है। जांच में यह पाया गया है कि साइबर ठग शुरुआत में छोटे ट्रांजेक्शन कर विश्वास कायम करते हैं और धीरे-धीरे उन्हीं बैंक खातों का उपयोग बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारकों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके खाते का उपयोग साइबर अपराध से जुड़े पैसों के लेनदेन में किया जा रहा है।

मनी म्यूल खाते और साइबर कार्रवाई

साइबर ठगी में उपयोग किए जाने वाले बैंक खातों को मनी म्यूल खाते कहा जाता है, जिनका उपयोग अवैध धन के लेनदेन के लिए किया जाता है। जैसे ही ऐसे खातों से जुड़े लेनदेन की शिकायत साइबर हेल्पलाइन या जांच एजेंसियों को मिलती है, संबंधित राज्यों की पुलिस और साइबर सेल तुरंत कार्रवाई करते हुए इन खातों को फ्रीज कर देती है। यह कार्रवाई देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस और साइबर एजेंसियों के समन्वय से की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में हिमाचल प्रदेश से जुड़े खाते शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार स्थिति

आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में 15,272 बैंक खाते फ्रीज किए गए, फरवरी में 10,988, मार्च में 8,692 और अप्रैल तक 6,132 खाते फ्रीज किए गए हैं। कुल मिलाकर यह संख्या 41,084 तक पहुंच गई है। जांच में सामने आया है कि इनमें कई खाते ऐसे हैं जो या तो अनजाने में साइबर ठगी के लेनदेन में शामिल हो गए या फिर कमीशन के लालच में दूसरों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराए गए थे।

खाता फ्रीज और अनफ्रीज प्रक्रिया

यदि किसी व्यक्ति का बैंक खाता साइबर जांच के तहत फ्रीज हो जाता है तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे मामलों में खाताधारक को संबंधित बैंक शाखा में जाकर फ्रीज का कारण और केस डिटेल प्राप्त करनी होती है। इसके बाद सभी लेनदेन का विवरण बैंक में जमा किया जाता है, जिसे आगे साइबर सेल और नोडल अधिकारी जांच के लिए भेजते हैं। यदि जांच में खाताधारक निर्दोष पाया जाता है तो उसका खाता अनफ्रीज किया जा सकता है या आवश्यकतानुसार आंशिक लेनदेन की अनुमति दी जा सकती है।