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14 आयुर्वेदिक अस्पतालों में शुरू होगा पंचकर्म कोर्स, 256 सीटों पर आवेदन शुरू

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश के 14 आयुर्वेदिक अस्पतालों में पंचकर्म तकनीशियन कोर्स शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस बार कोर्स की सीटें 36 से बढ़ाकर 256 कर दी गई हैं और आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार की इस पहल से आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।

हिमाचल प्रदेश में आयुर्वेद शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलने जा रही है। प्रदेश सरकार ने राज्य के 14 आयुर्वेदिक अस्पतालों में पंचकर्म तकनीशियन कोर्स शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पंचकर्म की सीटों की संख्या 36 से बढ़ाकर 256 कर दी गई है।अब तक यह कोर्स केवल दो संस्थानों में संचालित होता था, लेकिन सरकार ने बढ़ती मांग और प्रशिक्षित तकनीशियनों की आवश्यकता को देखते हुए इसे प्रदेशभर के 14 आयुर्वेदिक अस्पतालों तक विस्तारित करने का फैसला लिया है।

आयुष विभाग के अनुसार, इस एक वर्षीय कोर्स में 128 सीटें पुरुषों और 128 सीटें महिलाओं के लिए निर्धारित की गई हैं। 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 4 जुलाई निर्धारित की गई है, जबकि एक अगस्त से कोर्स शुरू करने की योजना है।जिन आयुर्वेदिक अस्पतालों में यह कोर्स संचालित किया जाएगा, उनमें बिलासपुर, सुंदरनगर, धनेटा, देहरा, कुल्लू, मंडी, रामपुर, चंबा, सोलन, पपरोला सहित प्रदेश के विभिन्न जिला आयुर्वेदिक अस्पताल शामिल हैं।

आयुष विभाग के निदेशक रोहित जंवाल ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार 14 आयुर्वेदिक अस्पतालों में पंचकर्म कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इसके लिए अस्पतालों की सूची तैयार कर ली गई है और आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही अंतिम शेड्यूल जारी कर एक अगस्त से कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी।विशेषज्ञों का मानना है कि पंचकर्म आयुर्वेद की प्रमुख उपचार पद्धति है, जो शरीर से दूषित तत्वों को बाहर निकालकर कई जटिल रोगों के उपचार में सहायक होती है। प्रशिक्षित पंचकर्म तकनीशियनों की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा और आयुर्वेदिक अस्पतालों की सेवाएं भी मजबूत होंगी।प्रदेश सरकार की इस पहल से न केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। साथ ही हिमाचल में आयुर्वेद और वेलनेस पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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