Loading...

पंचायत चुनाव के लिए पात्रता नियम बदले, ड्रग मामलों के आरोपी और डिफाल्टर नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 45 Mins Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संशोधन विधेयक 2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद नए चुनावी प्रावधान लागू हो गए हैं। इसके तहत मादक पदार्थ मामलों के आरोपी, अवैध कब्जाधारी और बैंक डिफाल्टर अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

शिमला

संशोधन विधेयक को मिली मंजूरी, नए प्रावधान लागू
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद राज्य में नए प्रावधान लागू कर दिए गए हैं। यह संशोधन आगामी पंचायत चुनावों से प्रभावी रहेगा। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पारित इस विधेयक का उद्देश्य पंचायत स्तर पर चुनाव प्रक्रिया के लिए पात्रता मानदंड को स्पष्ट करना है।

ड्रग मामलों में आरोपित व्यक्तियों पर प्रतिबंध
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े ऐसे व्यक्ति जिन पर आरोप तय हो चुके हैं, वे पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इसके अलावा यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि पद पर रहते हुए ऐसे मामलों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे पद से हटाने का प्रावधान भी शामिल किया गया है।

कब्जाधारी और डिफाल्टर भी चुनाव से बाहर
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि अवैध कब्जाधारी, सहकारी बैंकों के डिफाल्टर तथा ऑडिट रिकवरी लंबित रखने वाले व्यक्ति भी पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होंगे। इन प्रावधानों के तहत वित्तीय और प्रशासनिक मामलों से जुड़े मानकों को भी पात्रता से जोड़ा गया है।

ग्राम सभा और जिला परिषद के कोरम में बदलाव
संशोधन में पंचायतों की कार्यप्रणाली से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। अब ग्राम सभा की बैठक के लिए कम से कम 30 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, साथ ही कुल मतदाताओं का 10 प्रतिशत उपस्थित होना आवश्यक माना जाएगा। परिवार आधारित उपस्थिति को मान्य नहीं किया जाएगा। जिला परिषद स्तर पर कोरम की सीमा को संशोधित कर एक-तिहाई कर दिया गया है, जिससे बैठकों में निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

सदस्यता से जुड़े प्रावधान स्पष्ट
नए प्रावधानों के अनुसार 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका वह व्यक्ति, जिसका नाम परिवार रजिस्टर या ग्राम सभा की मतदाता सूची में दर्ज है, ग्राम सभा का सदस्य माना जाएगा। इस प्रावधान के माध्यम से सदस्यता और भागीदारी से जुड़े मानकों को स्पष्ट किया गया है।