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हिमाचल में पहली बार एफडीआर (Full Depth Reclamation) तकनीक से सड़क निर्माण का काम शुरू जानिए क्या है यह तकनीक और इसके फायदे

हिमाचलनाउ डेस्क • 26 Dec 2024 • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश में पहली बार एफडीआर (Full Depth Reclamation) तकनीक से सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ है। यह तकनीक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत अपनाई जा रही है, और इसका पहला ट्रायल मंडी जिले में किया जा रहा है। इस लेख में हम जानेंगे कि एफडीआर तकनीक क्या है, इसके लाभ क्या हैं, और यह क्यों हिमाचल प्रदेश में एक महत्वपूर्ण कदम है।


एफडीआर (Full Depth Reclamation) तकनीक, क्या है यह?

एफडीआर तकनीक एक विशेष सड़क निर्माण प्रक्रिया है, जो पुराने सड़क निर्माण सामग्री को फिर से उपयोग में लाती है। इसमें, सड़क की सतह को मशीनों के माध्यम से उखाड़ा जाता है, और उखाड़े गए मटेरियल को पुनः रिसायकल किया जाता है। इस पुनर्नवीनीकरण में सीमेंट और केमिकल्स मिलाए जाते हैं ताकि सड़क की मजबूती बढ़ सके और उसकी उम्र भी लंबी हो।

यह तकनीक सबसे पहले विदेशों में उपयोग की गई थी, और अब धीरे-धीरे देश के अन्य राज्यों में इसे अपनाया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में यह पहली बार प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत मंडी जिले में लागू की जा रही है।


मंडी में FDR तकनीक का ट्रायल

मंडी जिले में एफडीआर तकनीक के पहले ट्रायल के तहत गणपति मंदिर से कून का तर तक 20 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस तकनीक को एक सप्ताह तक ट्रायल के आधार पर उपयोग किया जा रहा है। ट्रायल के बाद इस तकनीक की गुणवत्ता की जांच की जाएगी और फिर भविष्य में इसे विस्तारित किया जाएगा।


एफडीआर तकनीक के फायदे

  1. कम लागत में अधिक काम
    इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सड़क निर्माण की लागत को काफी हद तक कम कर देती है। डीकेएस कंस्ट्रक्शन कंपनी के एमडी नीतिश शर्मा के अनुसार, पहले जहां पर 100 रुपये खर्च होते थे, वहीं अब सिर्फ 60 से 64 रुपये में काम हो रहा है। इससे सरकार की धनराशि की बचत हो रही है।
  2. जल्द काम का पूरा होना
    एफडीआर तकनीक से सड़क निर्माण का कार्य तेज़ी से होता है, जिससे परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकता है।
  3. पर्यावरण अनुकूल
    इस तकनीक में पुराने निर्माण सामग्री का अधिकतम उपयोग किया जाता है, जिससे कच्चे माल का उपयोग कम होता है और पर्यावरण पर दबाव भी घटता है। यह तकनीक पर्यावरण की दृष्टि से भी बहुत लाभकारी है।
  4. कम संसाधनों में अधिक कार्य
    पुराने मटेरियल के पुनर्नवीनीकरण से नई सड़क के निर्माण में कम संसाधनों की आवश्यकता होती है, जो कि निर्माण प्रक्रिया को और भी सस्ता और स्थायी बनाता है।

भविष्य में FDR तकनीक का विस्तार

एफडीआर तकनीक के इस ट्रायल के सकारात्मक परिणामों के बाद, मंडी और कुल्लू जिलों में आगामी वर्षों में 20 और सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। यदि ट्रायल सफल होता है, तो इस तकनीक का और अधिक व्यापक रूप से उपयोग किया जाएगा, जिससे हिमाचल प्रदेश में सड़कों के निर्माण में समय और लागत दोनों की बचत हो सकेगी।


सकारात्मक परिणामों के लिए की जा रही तैयारी

इस तकनीक का ट्रायल करने वाले डीकेएस कंस्ट्रक्शन कंपनी के नीतिश शर्मा ने बताया कि शुरू में कुछ मशीनों को किराए पर लाया गया है, लेकिन भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम मिलने पर इन मशीनों का और अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सड़क निर्माण में और भी तेजी आएगी और लागत में और कमी आएगी।


हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम

एफडीआर तकनीक हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, क्योंकि यह सड़क निर्माण को न केवल सस्ता और तेज़ बनाती है, बल्कि पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाती है। ट्रायल के अच्छे परिणामों के बाद, यह तकनीक राज्य के विभिन्न हिस्सों में और अधिक सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल की जा सकती है। इससे राज्य में बुनियादी ढांचे में सुधार होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति बेहतर होगी।


हिमाचल प्रदेश में पहली बार FDR तकनीक से सड़क निर्माण के इस अनूठे प्रयास का यदि सफल ट्रायल होता है, तो यह न केवल राज्य के लिए बल्कि देश भर में एक नई दिशा की शुरुआत हो सकती है।