रामपुर के कोटी गांव में भालू के हमले से 80 भेड़ों की मौत, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के कोटी गांव में भालू के हमले में लगभग 80 भेड़ों की मौत और करीब 20 भेड़ों के घायल होने का मामला सामने आया है। यह घटना 29 मई की रात की बताई जा रही है, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के साथ कैमरा ट्रैप और अन्य सुरक्षा उपाय भी लागू किए हैं ताकि वन्यजीव की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
रामपुर
कोटी गांव में भेड़ों पर हमला
शिमला जिले के रामपुर उपमंडल की धार गौरा पंचायत के अंतर्गत आने वाले कोटी गांव में 29 मई की रात करीब 11 बजे भालू द्वारा भेड़ बाड़े में प्रवेश कर पशुधन पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमले में लगभग 80 भेड़ों की मौत हो गई, जबकि करीब 20 अन्य भेड़ें घायल हुई हैं। प्रभावित पशुधन स्थानीय निवासी राम दास पुत्र स्वर्गीय उदी राम का बताया गया है। ग्रामीणों के अनुसार घटना रात के समय हुई, जिसकी जानकारी सुबह पशुपालक को मिली। बड़ी संख्या में भेड़ों के नुकसान के कारण पशुपालक को आर्थिक क्षति हुई है। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग को अवगत कराया, जिसके बाद विभागीय टीम मौके पर पहुंची।
वन विभाग ने शुरू किया नुकसान का आकलन
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग के कर्मचारी प्रभावित स्थल पर पहुंचे और नुकसान का आकलन शुरू किया। रामपुर के वन मंडल अधिकारी गुरहर्ष सिंह ने बताया कि विभागीय टीम मृत और घायल पशुओं का विवरण तैयार कर रही है तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित पशुपालक को सरकारी नियमों और पात्रता के आधार पर मुआवजा प्रदान किया जाएगा। विभाग द्वारा घटना से संबंधित सभी तथ्यों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है ताकि मुआवजा प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा सके। साथ ही आसपास के क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
कैमरा ट्रैप और पिंजरे लगाए जा रहे
वन विभाग ने क्षेत्र में भालू की गतिविधियों की निगरानी बढ़ा दी है। वन्यजीव की पहचान और उसकी आवाजाही पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त आवश्यक स्थानों पर पिंजरे स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन उपायों का उद्देश्य वन्यजीव की गतिविधियों का आकलन करना और मानव बस्तियों के आसपास उसकी मौजूदगी पर निगरानी रखना है। क्षेत्र में नियमित गश्त के निर्देश भी जारी किए गए हैं ताकि किसी भी नई गतिविधि की जानकारी समय पर प्राप्त हो सके।
स्थानीय लोगों के लिए जारी की गई सलाह
वन विभाग ने स्थानीय निवासियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि सुबह जल्दी और देर शाम जंगल से सटे क्षेत्रों, बगीचों तथा खेतों में अकेले जाने से बचें। पैदल चलते समय सामान्य आवाज करते रहें ताकि वन्यजीव अचानक संपर्क में न आए। विभाग ने लोगों से पशुओं का चारा, खाद्य सामग्री, गिरे हुए फल और अन्य ऐसी वस्तुएं सुरक्षित रखने का आग्रह किया है जो वन्यजीवों को आकर्षित कर सकती हैं। इसके अलावा रात के समय पालतू पशुओं को मजबूत और सुरक्षित बाड़ों में रखने की सलाह दी गई है। यदि किसी क्षेत्र में भालू दिखाई देता है तो उसके निकट जाने या उसे घेरने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
वन्यजीव दिखाई देने पर विभाग को दें सूचना
वन मंडल अधिकारी गुरहर्ष सिंह ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव की गतिविधि, भालू की मौजूदगी या संबंधित घटना की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। उन्होंने कहा कि विभाग स्थानीय स्तर पर जागरूकता गतिविधियां भी चला रहा है और लोगों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों ने बिना पुष्टि की सूचनाओं के प्रसार से बचने और किसी भी आपात स्थिति में नजदीकी वन रक्षक, खंड अधिकारी या वन कार्यालय से संपर्क करने का आग्रह किया है। विभाग का कहना है कि समय पर सूचना मिलने से आवश्यक कार्रवाई करने और मानव-वन्यजीव संपर्क की संभावनाओं को कम करने में सहायता मिलती है।