Himachalnow / शिमला
हिमाचल में सस्ते राशन डिपुओं में लोकल चावल की योजना
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सस्ते राशन के डिपुओं में लोकल चावल देने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत, केंद्र से आने वाले चावल के स्थान पर राज्य सरकार ने लोकल चावल उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार का यह कदम किसानों के हित में और उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
योजना की मुख्य बातें:
- केंद्र से आने वाले चावल की जगह लोकल चावल।
- किसानों से खरीदी गई धान का चावल उपभोक्ताओं को मिलेगा।
- योजना पर केंद्र सरकार से बातचीत शुरू की गई है।
क्या होगी सरकार की योजना?
राज्य सरकार ने किसानों से खरीदी गई धान को बाजार में बाहर न बेचकर, उसे चावल में बदलकर राशनकार्ड धारकों को उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। यह कदम स्थानीय चावल को प्राथमिकता देने का एक बड़ा प्रयास है। यदि केंद्र सरकार इस पर सहमत हो जाती है, तो यह योजना सिरे चढ़ेगी।
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लाल चावल देने पर भी विचार:
- सरकार डिपुओं में लाल चावल देने पर भी विचार कर रही है।
- हालांकि, लाल चावल की कीमत सरकारी रेट से ज्यादा हो सकती है।
- सरकार का लक्ष्य मार्केट रेट से कम दाम पर लाल चावल उपलब्ध कराना है।
किसानों से धान की खरीद
हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष धान की खरीद लगभग पूरी हो चुकी है। 70,007 किसानों से 31,205 टन धान खरीदी गई है। इसके बाद, खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले विभाग धान का छिलका उतारने के बाद चावल खाद्य आपूर्ति निगम को भेजेगा।
मशीनों का उपयोग:
- धान के छिलके को उतारने के लिए पांच स्थानों पर मशीनें स्थापित की गई हैं।
- ये मशीनें सिरमौर, ऊना, कांगड़ा और सोलन जिलों में स्थापित की गई हैं।
निष्कर्ष
राज्य सरकार का यह कदम स्थानीय किसानों को फायदा पहुंचाने और सस्ते राशन के तहत लोकल चावल उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि केंद्र सरकार इस योजना के लिए सहमत होती है, तो यह योजना राशन कार्ड धारकों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
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