आपदा राहत के लिए ₹200 करोड़ मंजूर, 12 जिलों समेत PWD और जल शक्ति विभाग को मिला बजट
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से 200 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दी है। यह राशि जिलों, लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग के माध्यम से राहत, पुनर्निर्माण और निर्धारित आपदा संबंधी कार्यों पर खर्च की जाएगी।
शिमला
आपदा राहत के लिए 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति
हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से 200 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी प्रदान की है। इस राशि का उपयोग प्रदेश के सभी 12 जिलों में आपदा राहत, पुनर्निर्माण कार्यों तथा प्रभावित परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा। स्वीकृत राशि में से 174 करोड़ रुपये उपायुक्तों के माध्यम से जिलों को आवंटित किए गए हैं, जबकि 26 करोड़ रुपये विभागीय कार्यों के लिए जारी किए गए हैं। इनमें जल शक्ति विभाग को 10 करोड़ रुपये और लोक निर्माण विभाग (PWD) को 16 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
जिलों को निर्धारित अनुपात में मिला आवंटन
जिला स्तर पर जारी 174 करोड़ रुपये में मंडी को सर्वाधिक 21.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा कांगड़ा को 20.75 करोड़, शिमला को 20.50 करोड़, सिरमौर को 20.20 करोड़, चंबा को 18.50 करोड़, ऊना को 14.65 करोड़, कुल्लू को 13.85 करोड़, हमीरपुर को 11.50 करोड़, लाहौल-स्पीति को 9.20 करोड़, किन्नौर को 9 करोड़, बिलासपुर को 7.80 करोड़ तथा सोलन को 6.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
निर्धारित मदों पर ही होगा व्यय
सरकार के निर्देशों के अनुसार स्वीकृत धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों पर ही किया जाएगा। इसमें तत्काल राहत, क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुलों की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था की बहाली, जल निकासी एवं सीवरेज प्रणाली, मृतकों के आश्रितों को अनुग्रह सहायता, राज्य विशेष आपदा राहत, मकानों के पुनर्निर्माण तथा स्थानीय निकायों एवं अन्य पात्र संस्थाओं को सहायता प्रदान करना शामिल है। मुख्य सचिव एवं राज्य कार्यकारी समिति के अध्यक्ष कमलेश कुमार पंत ने इस संबंध में स्वीकृति आदेश जारी किए हैं।
डीबीटी के माध्यम से होगी सहायता राशि का भुगतान
सरकार ने राहत वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी जिलों और विभागों को लाभार्थियों की सूची अपनी-अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने के निर्देश दिए हैं। आदेशों के अनुसार धनराशि आवश्यकता के अनुसार ही ट्रेजरी से निकाली जाएगी और विभागीय खातों में रखने के बजाय डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद संबंधित विभागों और जिलों को उपयोगिता प्रमाण पत्र सरकार को उपलब्ध कराना होगा।
नियमों के अनुरूप खर्च और ऑनलाइन रिकॉर्ड अनिवार्य
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी व्यय भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश आपात राहत नियमावली के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार किए जाएंगे। निर्धारित सीमा से अधिक व्यय होने की स्थिति में संबंधित स्वीकृति अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे। सभी राहत मामलों की स्वीकृति रिलीफ मॉड्यूल तथा कार्यों की मंजूरी जन समीक्षा सॉफ्टवेयर के माध्यम से दर्ज की जाएगी। साथ ही प्रत्येक व्यय का विवरण गृह मंत्रालय के पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। निर्देशों का पालन नहीं करने पर भविष्य में संबंधित जिला या विभाग के आवंटन पर विचार किया जा सकता है।