हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने में बाधा पहुंचने पर 24 घंटे में कटेगा बिजली का कनेक्शन
Himachalnow / शिमला
हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटरिंग अभियान को तेज करते हुए बिजली बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मीटर लगाने में बाधा डालने पर 24 घंटे का नोटिस देकर बिजली आपूर्ति काटी जा सकती है। बोर्ड ने फील्ड अधिकारियों को कार्य समयसीमा में पूरा करने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
शिमला
स्मार्ट मीटरिंग कार्य में तेजी के निर्देश
हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड द्वारा पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने का कार्य चरणबद्ध तरीके से तेज किया जा रहा है। बोर्ड प्रबंधन ने शिमला, हमीरपुर, मंडी और कांगड़ा जोन के मुख्य अभियंताओं को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि इस कार्य को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि कार्य की नियमित समीक्षा की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सहयोग न करने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई
निर्देशों के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता या कार्य में बाधा उत्पन्न करता है, तो विभाग द्वारा उसे लिखित रूप से 24 घंटे का नोटिस दिया जाएगा। इस अवधि के भीतर यदि उपभोक्ता सहयोग नहीं करता है, तो संबंधित बिजली कनेक्शन को अस्थायी रूप से काटने की कार्रवाई की जा सकती है। बोर्ड ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उपभोक्ताओं को पहले से सूचित किया जाए और निर्धारित नियमों का पालन किया जाए।
अधिकृत कर्मचारियों को मिले अधिकार
बिजली अधिनियम 2003 के प्रावधानों का हवाला देते हुए बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि बिना प्रमाणित मीटर के बिजली आपूर्ति जारी रखना संभव नहीं है। अधिनियम की धारा 163 के तहत अधिकृत कर्मचारियों को उपभोक्ता परिसर में प्रवेश कर मीटर की जांच, मरम्मत या प्रतिस्थापन करने का अधिकार दिया गया है। यदि इस कार्य में किसी प्रकार का विरोध या असहयोग किया जाता है, तो विभाग द्वारा नियमानुसार नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मीटर विभाग की संपत्ति
बोर्ड ने स्पष्ट रूप से बताया है कि उपभोक्ताओं के परिसरों में लगे सभी ऊर्जा मीटर विभाग की संपत्ति माने जाते हैं। केंद्रीय बिजली प्राधिकरण के नियमों के अनुसार मीटर का स्वामित्व वितरण कंपनी के पास ही रहता है। यहां तक कि यदि किसी उपभोक्ता ने मीटर स्वयं खरीदा हो, तब भी उसे उसका स्वामी तब तक नहीं माना जाएगा जब तक वह मीटर सिस्टम से स्थायी रूप से अलग नहीं किया जाता।
नियमों के पालन के निर्देश
सभी जोनल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन नियमों की जानकारी फील्ड स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचाई जाए। साथ ही स्मार्ट मीटरिंग कार्य में बाधा उत्पन्न करने वाले मामलों में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मीटर की सटीकता या उससे संबंधित विवादों का निपटारा केवल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता और प्रशासनिक स्पष्टता बनी रहे।
स्मार्ट मीटरिंग के लाभ
अधिकारियों के अनुसार स्मार्ट मीटरिंग लागू होने से बिजली व्यवस्था अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनेगी। इससे उपभोक्ताओं को रियल टाइम डेटा उपलब्ध होगा, बिलिंग प्रक्रिया अधिक सटीक होगी और ऊर्जा खपत की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। इसके अलावा बिजली चोरी पर नियंत्रण और सिस्टम की कार्यक्षमता में सुधार जैसे लाभ भी इस व्यवस्था से अपेक्षित हैं।