हिमाचल में महंगा प्रवेश अर्थव्यवस्था पर भारी टोल बढ़ोतरी से पर्यटन, उद्योग और सप्लाई तंत्र पर बढ़ा दबाव
Himachalnow / सिरमौर
हिमाचल प्रदेश में प्रवेश के लिए बढ़ाई गई टोल दरों ने सीमावर्ती क्षेत्रों और औद्योगिक इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। बढ़ी हुई दरों के कारण व्यापार, पर्यटन और सप्लाई व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों ने इस फैसले को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताया है।
कालाअंब/पांवटा साहिब
हिमाचल प्रदेश में प्रवेश के लिए बढ़ाई गई टोल दरों ने सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर औद्योगिक इलाकों और पर्यटन आधारित बाजारों तक चिंता बढ़ा दी है। कालाअंब और पांवटा साहिब जैसे प्रदेश के प्रमुख प्रवेश और औद्योगिक द्वारों पर इस फैसले के खिलाफ नाराजगी लगातार तेज हो रही है। व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, उद्योग जगत और स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि यह फैसला केवल अतिरिक्त राजस्व का मामला नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, उद्योग और रोजमर्रा की सप्लाई व्यवस्था पर सीधा बोझ है।सीमावर्ती बाजारों में इसका असर अब साफ महसूस किया जाने लगा है। बाहर से आने-जाने वाले वाहनों पर बढ़े शुल्क के कारण आवाजाही महंगी हुई है, जिसका सीधा असर स्थानीय व्यापार, धार्मिक पर्यटन और छोटे कारोबार पर पड़ रहा है। कालाअंब से त्रिलोकपुर और आसपास के धार्मिक स्थलों तक जाने वाले मार्ग पर भी स्थानीय व्यापारियों ने श्रद्धालुओं और बाहरी वाहनों की संख्या में कमी की बात कही है।
स्थानीय दुकानदार विनोद कुमार, नरेंद्र कुमार और श्यामलाल ने कहा कि इस फैसले ने छोटे व्यापार की कमर तोड़ने का काम किया है। उनका कहना है कि दुकानों, ढाबों, छोटे होटलों, धार्मिक सामग्री विक्रेताओं और रोजमर्रा के कारोबार पर इसका असर साफ दिखने लगा है। यदि यही स्थिति रही तो सीमावर्ती क्षेत्रों का छोटा व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा।पर्यटन और होटल कारोबार पर भी इसका दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि प्रदेश पहले ही तेल और गैस संकट से जूझ रहा है, जिसका असर होटल और भोजनालय व्यवसाय पर दिखने लगा है। ईंधन, रसोई गैस और संचालन लागत बढ़ने से होटल कारोबार पहले ही दबाव में है। ऐसे समय में एंट्री टैक्स और टोल दरों में बढ़ोतरी को कारोबारियों ने “कोढ़ में खाज” जैसा असर बताया है। उनका कहना है कि इससे पर्यटकों की आवाजाही और होटल कारोबार दोनों पर अतिरिक्त चोट पड़ेगी।
औद्योगिक क्षेत्र में भी चिंता कम नहीं है। कालाअंब और पांवटा साहिब के उद्योगों के लिए कच्चे माल की ढुलाई और तैयार माल की निकासी अब और महंगी पड़ने लगी है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि परिवहन और प्रवेश लागत लगातार बढ़ती रही, तो उत्पादन लागत बढ़ेगी और निवेश प्रभावित हो सकता है। इसका असर रोजगार पर भी पड़ने की आशंका है।प्रदेश की सप्लाई चेन पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। फल, सब्जियां, राशन, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई महंगी होने से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका बोझ सीधे आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों ने भी इस बढ़ोतरी को अव्यावहारिक बताया है। वहीं सिरमौर ट्रक ऑपरेटर यूनियन ने भी प्रदेश एंट्री टोल में की गई बढ़ोतरी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन ने सरकार से मांग की कि इस फैसले पर एक बार पुनर्विचार किया जाना जरूरी है। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि बढ़ी हुई दरों के कारण माल ढुलाई, बुकिंग और परिवहन लागत पर सीधा असर पड़ रहा है, जिसका नुकसान अंततः व्यापार, उद्योग और आम जनता को उठाना पड़ेगा।
कालाअंब और पांवटा साहिब में बढ़ता विरोध अब इस बात का संकेत है कि मामला केवल शुल्क वृद्धि का नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक सेहत से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। लोगों ने सरकार से बढ़ी हुई दरों की तत्काल समीक्षा कर राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्णय में सुधार नहीं हुआ, तो इसका नुकसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक झेलना पड़ सकता है।
