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IGMC Shimla / गर्भस्थ शिशु के मुंह में दूसरा भ्रूण, अल्ट्रासाउंड में सामने आया बेहद दुर्लभ मेडिकल केस

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 58 Mins Ago • 1 Min Read

‘Fetus in Fetu’ : IGMC शिमला में गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड जांच में एक बेहद दुर्लभ मेडिकल स्थिति सामने आई है। 20 वर्षीय गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण के मुंह के भीतर दूसरे भ्रूण जैसी संरचना पाई गई। चिकित्सकीय भाषा में इस स्थिति को ‘फीटस इन फीटू’ (Fetus in Fetu) कहा जाता है। खास बात यह रही कि इस असामान्यता की पहचान बच्चे के जन्म के बाद नहीं, बल्कि गर्भावस्था के दौरान ही इमेजिंग जांच में हो गई। इस दुर्लभ केस से संबंधित रिपोर्ट मेडिकल जर्नल में भी प्रकाशित हुई है।

शिमला

जानकारी के अनुसार महिला की गर्भावस्था के 22वें सप्ताह से पहले की गई सोनोग्राफी के दौरान भ्रूण के जबड़े में असामान्यता दिखाई दी। जांच में भ्रूण के मुंह के भीतर एक अलग संरचना भी नजर आई। मामला सामान्य नहीं होने के कारण विशेषज्ञों ने अल्ट्रासाउंड सहित अन्य इमेजिंग तकनीकों के माध्यम से विस्तृत जांच की। मेडिकल केस रिपोर्ट में भ्रूण के जबड़े में महत्वपूर्ण दोष के साथ मुंह के निचले हिस्से की ओर एक संबंधित संरचना मिलने का उल्लेख किया गया है। विस्तृत मूल्यांकन के बाद इसे दुर्लभ ‘Fetus in Fetu’ स्थिति से संबंधित पाया गया।

क्या है ‘Fetus in Fetu’ की दुर्लभ स्थिति

Fetus in Fetu एक अत्यंत दुर्लभ भ्रूण संबंधी स्थिति है, जिसमें विकास के दौरान एक विकृत भ्रूण अपने जुड़वा भ्रूण के शरीर के भीतर मौजूद रहता है। चिकित्सा साहित्य के अनुसार इसके अधिकतर मामले शरीर के पेट के पीछे वाले हिस्से में पाए जाते हैं, जबकि मुंह में इसकी मौजूदगी दुर्लभ स्थानों में शामिल है। गर्भावस्था के दौरान ही इस स्थिति की पहचान भी अपेक्षाकृत कम मामलों में होती है। अल्ट्रासाउंड इसकी पहचान के लिए प्रमुख जांच माध्यमों में शामिल है और आवश्यकता के अनुसार अन्य इमेजिंग तकनीकों का भी सहारा लिया जा सकता है।

गर्भावस्था के दौरान ही सामने आई असामान्यता

इस मामले की प्रमुख विशेषता यह रही कि असामान्यता की पहचान गर्भावस्था के दौरान ही हो गई। सामान्यतः Fetus in Fetu के कई मामले जन्म के बाद सामने आते हैं, जबकि गर्भ में इसकी पहचान दुर्लभ मानी जाती है। जांच के दौरान भ्रूण के जबड़े में गंभीर असामान्यता और मुंह के भीतर संबंधित संरचना सामने आने के बाद मामले का विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा रेडियोलॉजी से संबंधित विशेषज्ञों ने इमेजिंग जांच के आधार पर स्थिति का आकलन किया।

गंभीर असामान्यताओं के बाद समाप्त की गई गर्भावस्था

जांच के दौरान भ्रूण में गंभीर असामान्यताएं सामने आने के बाद महिला के स्वजन को स्थिति की जानकारी दी गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार गर्भावस्था 22 सप्ताह से कम थी और चिकित्सकीय परामर्श तथा निर्धारित प्रक्रिया के तहत गर्भावस्था समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इस केस की गर्भावस्था के दौरान पहचान और विस्तृत इमेजिंग मूल्यांकन के कारण यह मामला चिकित्सा दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। संबंधित मेडिकल केस रिपोर्ट में भी इसकी असामान्य स्थिति और प्रसवपूर्व पहचान का विवरण दिया गया है।

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