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Ilma Afroz / हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय सख्त, तैनाती को लेकर गृह सचिव और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को नोटिस जारी

हिमाचलनाउ डेस्क | 28 दिसंबर 2024 at 4:57 pm

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Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आईपीएस अधिकारी इलमा अफरोज की तैनाती को लेकर गृह सचिव और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजेपी) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सूचा सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 4 जनवरी 2025 को निर्धारित की है।


इलमा अफरोज की तैनाती को लेकर उठे सवाल

इलमा अफरोज की तैनाती और छुट्टी
आईपीएस अधिकारी इलमा अफरोज को, जो लंबे समय तक छुट्टी पर थीं, 16 दिसंबर 2024 से पुलिस मुख्यालय, शिमला में तैनात किया गया। हालांकि, इस तैनाती को लेकर स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र बीबीए के लोगों ने बद्दी में उनकी तैनाती की मांग की है। उनका कहना है कि बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ क्षेत्र में इलमा अफरोज की तैनाती से इलाके में कानून व्यवस्था मजबूत होगी और आम जनता खुद को सुरक्षित महसूस करेगी।

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न्यायालय की सख्ती और अगली सुनवाई

गृह सचिव और डीजेपी को नोटिस जारी
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस मामले में गृह सचिव और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायालय ने इन अधिकारियों से पूछा है कि आखिर क्यों इलमा अफरोज को उन क्षेत्रों में तैनाती नहीं दी जा रही जहां उनकी विशेष जरूरत है, विशेष रूप से बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में।

अगली सुनवाई 4 जनवरी को
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 4 जनवरी 2025 को निर्धारित की है। इस सुनवाई के दौरान इस मामले के साथ-साथ एक अन्य मुद्दा भी लिस्ट किया जाएगा, जो हाई कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ स्व-मोटू संज्ञान लिया था।


इलमा अफरोज की तैनाती के पीछे का कारण

कानून व्यवस्था में सुधार
इलमा अफरोज की तैनाती के बाद, उन्होंने ट्रक माफिया और खनन माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की थी, जो पिछले चार महीनों में अखबारों में प्रमुखता से दिखी। उनकी ईमानदार कार्रवाई के कारण इन माफिया समूहों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिससे वे राजनीतिक दबाव बनाने लगे।

पॉलिटिकल दबाव और छुट्टी पर भेजना
जैसे ही यह साफ हो गया कि इलमा अफरोज का ट्रांसफर नहीं किया जा सकता, माफिया और कुछ राजनीतिक तत्वों ने मिलकर ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न कीं, जिससे यह अधिकारी काम नहीं कर सकीं। इस कारण उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया, जिससे वे अपनी जिम्मेदारियों से दूर हो गईं।


आम जनता की उम्मीदें और हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

जनता की मांग
आम जनता इस मामले में हाई कोर्ट से उपयुक्त आदेश जारी करने की मांग कर रही है। उनका कहना है कि अगर कोई अधिकारी ईमानदारी से उनके हकों और कानून के लिए लड़ रहा है, तो उसे काम करने से क्यों रोका जा रहा है। उनकी मान्यता है कि इलमा अफरोज जैसे अधिकारियों की तैनाती से ही क्षेत्र में कानून व्यवस्था में सुधार हो सकता है।

हाई कोर्ट का रुख
कोर्ट ने इस मामले में पहले आदेश पारित किया था कि इलमा अफरोज का ट्रांसफर बिना कोर्ट के आदेश के नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, अधिकारियों ने एक नई रणनीति अपनाई और इलमा को काम से रोकने के लिए उन्हें छुट्टी पर भेज दिया। इस पर जनता की ओर से न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है।


इस मामले में न्यायालय की अगली सुनवाई 4 जनवरी 2025 को होगी, जिसमें इलमा अफरोज की तैनाती को लेकर अधिक जानकारी सामने आ सकती है। इस बीच, इलमा अफरोज की तैनाती और उनके कार्यकाल को लेकर न्यायालय और आम जनता दोनों के बीच आशा बनी हुई है। अगर कोर्ट इस मामले में उपयुक्त आदेश जारी करता है, तो इससे न केवल इलमा अफरोज के लिए बल्कि क्षेत्र की कानून व्यवस्था के लिए भी सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

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