चौकीमन्यार कॉलेज में भारतीय ज्ञान परम्परा पर मंथन, प्राचीन भारत में महिलाओं की भूमिका पर विद्यार्थियों ने रखे विचार
राजकीय महाविद्यालय चौकीमन्यार में भारतीय ज्ञान परम्परा और प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति को लेकर समूह चर्चा आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परम्परा की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत के साथ वैदिक काल में महिलाओं की सामाजिक, शैक्षिक और बौद्धिक भूमिका पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ वर्तमान संदर्भों पर भी चर्चा हुई और विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल्यों को समझकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
ऊना/चौकीमन्यार
उप तहसील जोल एवं ग्राम पंचायत चौकीमन्यार स्थित राजकीय महाविद्यालय चौकीमन्यार में अखिल भारतीय शिक्षण समागम के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), रेड रिबन क्लब और रेड क्रॉस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परम्परा एवं प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति” विषय पर समूह चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध विरासत, उसके सांस्कृतिक एवं बौद्धिक आयामों और प्राचीन भारत में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित करवाना था।
एनईपी-2020 में भारतीय ज्ञान परम्परा के महत्व पर चर्चा
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बलविंदर सिंह राणा के संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण, संवर्धन और समावेशी शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति, परंपराओं और ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध विरासत को समझने के साथ इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों ने रखे तर्कपूर्ण विचार
समूह चर्चा में विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परम्परा के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्राचीन भारत में महिलाओं की सामाजिक, शैक्षिक और बौद्धिक स्थिति, उनके अधिकार तथा वैदिक काल में उनकी सक्रिय सहभागिता पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विद्यार्थियों ने समय के साथ समाज में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए विषय से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और समकालीन संदर्भों को भी चर्चा का हिस्सा बनाया।
समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए किया प्रेरित
कार्यक्रम में प्रो. कविता कौशल, डॉ. रामकुमार नेगी, डॉ. सगुन डोगरा और प्रो. नवीन शर्मा सहित महाविद्यालय का कार्यालय स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परम्परा में निहित मूल्यों को आत्मसात करने और अपने ज्ञान एवं शिक्षा का उपयोग समाज तथा राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान के लिए करने को प्रेरित किया गया।