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‘God is good’ SoS or Trap? दुश्मन इलाके में फंसे पायलट के लिए रात में उतरी स्पेशल फोर्सेस, फिर शुरू हुआ खतरनाक रेस्क्यू मिशन

हिमाचलनाउ डेस्क • 5 Hours Ago • 1 Min Read

ईरान में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान F-15E के गिराए जाने के बाद उसके क्रू मेंबर के रेस्क्यू की कहानी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस पूरे ऑपरेशन को लेकर एक विस्तृत जानकारी साझा की, जिसमें कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान गिरने के बाद हथियार प्रणाली अधिकारी (Weapons Systems Officer) ने इजेक्ट कर अपनी जान बचाई और पहाड़ी इलाके में छिपकर करीब 24 घंटे तक खुद को सुरक्षित रखा। इस दौरान उसने एक तीन शब्दों का मैसेज “God is good” भेजा, जिसने शुरुआती समय में अमेरिकी अधिकारियों को भी संशय में डाल दिया।

SOS मैसेज पर क्यों हुआ शक

अमेरिकी अधिकारियों को शुरुआत में यह आशंका हुई कि कहीं यह संदेश ईरानी सेना द्वारा जाल बिछाने के लिए तो नहीं भेजा गया है। Axios को दिए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह मैसेज कुछ ऐसा लगा, जैसा आमतौर पर मुस्लिम धार्मिक संदर्भ में इस्तेमाल होता है, जिससे संदेह और गहरा गया।

हालांकि बाद में पुष्टि हुई कि यह मैसेज खुद फंसे हुए अधिकारी ने ही भेजा था, जो धार्मिक प्रवृत्ति का था और कठिन परिस्थिति में अपनी आस्था व्यक्त कर रहा था।

पहाड़ों में छिपकर बचाई जान

रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारी ने खुद को बचाने के लिए पहाड़ी दरार (crevice) में छिपकर रखा। इस दौरान ईरान की सेना और स्थानीय लोग उसकी तलाश कर रहे थे, और उसे पकड़ने के लिए इनाम तक घोषित किया गया था।

अधिकारी ने अपनी लोकेशन छुपाने के लिए रेडियो बीकन का सीमित उपयोग किया और एक सुरक्षित एन्क्रिप्टेड डिवाइस के जरिए अमेरिकी बलों से संपर्क बनाए रखा।

CIA की चाल और रेस्क्यू ऑपरेशन

इस मिशन के दौरान Central Intelligence Agency (CIA) ने एक भ्रामक ऑपरेशन भी चलाया। इसके तहत ईरान के अंदर यह गलत सूचना फैलाई गई कि पायलट को ढूंढ लिया गया है और उसे जमीन के रास्ते बाहर निकाला जा रहा है। इसका मकसद ईरानी बलों का ध्यान असली लोकेशन से हटाना था।

इसके बाद अमेरिकी सेना ने करीब 200 सैनिकों के साथ रात में हाई-रिस्क ऑपरेशन चलाकर अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाला। इससे पहले दिन के समय एक अलग ऑपरेशन में पायलट को भी बचा लिया गया था, जो कुछ दूरी पर उतरा था।

इज़राइल की भी रही भूमिका

इस पूरे ऑपरेशन में Israel ने भी सीमित सहयोग दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़राइल ने ईरानी सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद की और उसकी वायुसेना ने एक स्ट्राइक भी की, जिससे ईरानी बलों की प्रगति धीमी हो गई।

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पायलट की लोकेशन ट्रैक करने में इज़राइल की सीधी भूमिका नहीं थी, लेकिन ऑपरेशन के दौरान दोनों देशों के बीच करीबी समन्वय रहा।


यह पूरी घटना आधुनिक युद्ध, इंटेलिजेंस ऑपरेशन और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम की जटिलता को दिखाती है, जहां एक छोटा सा मैसेज भी बड़े सैन्य निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।

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