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कांगड़ा में किरायेदारों, श्रमिकों और घरेलू सहायकों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

कांगड़ा जिले में किरायेदारों, श्रमिकों और घरेलू सहायकों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। जिला दंडाधिकारी हेमराज बैरवा ने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के मद्देनजर भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के तहत आदेश जारी किए हैं। इसके अनुसार मकान और संपत्ति मालिकों, व्यवसाय संचालकों, ठेकेदारों तथा अन्य संबंधित लोगों को अपने परिसर में रहने या काम करने वाले व्यक्तियों का निर्धारित विवरण संबंधित पुलिस थाने में देना होगा।

धर्मशाला

जिला दंडाधिकारी ने बताया कि पहले से जारी या नई किराये और सब-लेटिंग व्यवस्था से जुड़े संपत्ति मालिकों तथा किरायेदारों को सात दिनों के भीतर संबंधित पुलिस थाने में निर्धारित घोषणा पत्र जमा करवाना होगा। इस व्यवस्था में पेइंग गेस्ट के साथ दुकान और मकान किराये पर देना भी शामिल है। निर्धारित समय सीमा में विवरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित संपत्ति मालिकों और किरायेदारों की होगी, ताकि पुलिस के पास परिसर में रहने वाले लोगों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

अपनी भूमि या परिसर में किराये अथवा गैर-किराये के उद्देश्य से झुग्गियां या अस्थायी आवास स्थापित करने की अनुमति देने वाले लोगों को भी वहां रहने वाले व्यक्तियों का विवरण देना होगा। घरेलू नौकर या सहायक रखने वाले व्यक्तियों को निर्धारित घोषणा पत्र के माध्यम से उनकी आवश्यक जानकारी पुलिस को उपलब्ध करवानी होगी। इसी तरह ठेकेदारों, संपत्ति मालिकों, व्यवसाय संचालकों और अन्य नियोक्ताओं को उनके माध्यम से किसी भी रूप में कार्यरत श्रमिकों एवं कामगारों का विवरण तय समय सीमा में प्रस्तुत करना होगा।

रिकॉर्ड के अभाव में जांच में कठिनाई

जिला दंडाधिकारी के अनुसार पुलिस विभाग की रिपोर्ट में बताया गया है कि जिले में रोजगार या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए ऐसे लोग भी रह रहे हैं, जो संबंधित क्षेत्रों के मूल निवासी नहीं हैं। इनमें से कुछ लोगों के असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त होने की जानकारी सामने आई है। उचित सत्यापन और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण अपराधों की रोकथाम तथा जांच में पुलिस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण संबंधित लोगों को सत्यापित विवरण पुलिस थाने में जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं।

आदेश में मकान मालिकों, संपत्ति मालिकों, व्यवसायियों और ठेकेदारों को अपने परिसर में रहने या काम करने वाले व्यक्तियों की सत्यापित जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। आदेश की अवहेलना करने वाले संपत्ति मालिकों, नियोक्ताओं, किरायेदारों या अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है। जिला दंडाधिकारी का यह आदेश 10 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गया है और 60 दिनों तक लागू रहेगा।

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