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एनआईटी हमीरपुर के छात्रों ने तैयार किया लैंडस्लाइड अलर्ट सिस्टम, पहले मिलेगी चेतावनी

PRIYANKA THAKUR • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / हमीरपुर

हिमाचल और अन्य पहाड़ी राज्यों में बढ़ती लैंडस्लाइड घटनाओं को देखते हुए एनआईटी हमीरपुर के छात्रों ने एक अलर्ट सिस्टम विकसित किया है। यह सिस्टम संभावित भू-स्खलन क्षेत्रों की पहले से पहचान कर चेतावनी देने में सक्षम बताया गया है।

हमीरपुर

कैसे काम करेगा सिस्टम
एनआईटी हमीरपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के छात्रों द्वारा विकसित ‘लैंड स्लाइड अलर्ट सिस्टम’ एक तकनीकी प्रोजेक्ट है, जिसे हाल ही में संस्थान के निंबस कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया। इस सिस्टम के तहत पहाड़ी क्षेत्रों की जमीन के अंदर विशेष ग्रिड स्थापित किए जाएंगे, जो मिट्टी की स्थिति, नमी और अंदरूनी गतिविधियों को लगातार मॉनिटर करेंगे। इससे संभावित भू-स्खलन की स्थिति बनने से पहले ही संकेत मिल सकेंगे और संबंधित क्षेत्र को चिन्हित किया जा सकेगा।

भू-स्खलन के कारणों पर आधारित तकनीक
छात्रों के अनुसार भू-स्खलन कई कारणों से होता है, जिनमें जमीन के अंदर पानी की अधिकता और मिट्टी के अंदर खाली स्थान बनने से उसकी मजबूती कम होना शामिल है। यह सिस्टम इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए काम करेगा और जमीन के अंदर हो रहे बदलावों का डेटा एकत्र करेगा। जैसे-जैसे ग्रिड पुराना होता जाएगा, उसकी सटीकता में सुधार होता जाएगा और यह अधिक विश्वसनीय जानकारी देने में सक्षम होगा।

मौजूदा सिस्टम की सीमाएं
वर्तमान में भू-स्खलन की निगरानी के लिए मुख्य रूप से सैटेलाइट तकनीक का उपयोग किया जाता है, लेकिन छात्रों के अनुसार यह तरीका पूरी तरह प्रभावी और सटीक नहीं है। कई बार यह जमीन के अंदर होने वाले सूक्ष्म बदलावों को रिकॉर्ड नहीं कर पाता, जिससे समय रहते चेतावनी नहीं मिल पाती। प्रस्तावित अलर्ट सिस्टम इस कमी को दूर करने का प्रयास करता है और अधिक सटीक डेटा उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

संवेदनशील जिले और उपयोगिता
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, चंबा और शिमला जैसे जिले भू-स्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। बरसात के मौसम में इन क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं अधिक दर्ज की जाती हैं, जिससे बुनियादी ढांचे और जनजीवन पर प्रभाव पड़ता है। इस तरह के अलर्ट सिस्टम के माध्यम से समय रहते एहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं और जोखिम वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर की जा सकती है।