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किन्नौर में भू-तापीय ऊर्जा आधारित कोल्ड स्टोरेज, दो वर्षों में 16963 किलोग्राम फलों का प्रसंस्करण

PRIYANKA THAKUR • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / किन्नौर

किन्नौर के टापरी में स्थापित भू-तापीय ऊर्जा संचालित कोल्ड स्टोरेज और फल सुखाने की इकाई में पिछले दो वर्षों में 16,963 किलोग्राम फलों का प्रसंस्करण किया गया है। यह परियोजना एचपीएमसी और आइसलैंड की कंपनी के सहयोग से विकसित की गई है और क्षेत्र में वैकल्पिक ऊर्जा आधारित कृषि प्रणाली को बढ़ावा दे रही है।

किन्नौर

इकाई का निरीक्षण और विशेषताएं
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने किन्नौर जिले के टापरी में स्थापित भू-तापीय ऊर्जा संचालित सेब कोल्ड स्टोरेज और फल सुखाने की संयुक्त इकाई का निरीक्षण किया। यह विश्व की पहली ऐसी सुविधा बताई जा रही है, जिसकी क्षमता 1,000 टन है और इसे एचपीएमसी तथा आइसलैंड की एक कंपनी के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत विकसित किया गया है।

प्रसंस्करण के आंकड़े
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस इकाई में पिछले दो वर्षों के दौरान कुल 16,963 किलोग्राम फलों का प्रसंस्करण किया गया है। इनमें 5,105 किलोग्राम फल नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच और 11,948 किलोग्राम फल जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच प्रसंस्कृत किए गए हैं। इन आंकड़ों के आधार पर परियोजना के उपयोग और कार्यक्षमता का मूल्यांकन किया जा रहा है।

भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग
इस प्रणाली में फलों के भंडारण और सुखाने के लिए भू-तापीय ऊष्मा का उपयोग किया जाता है। यह तकनीक पारंपरिक बिजली आधारित प्रणालियों से अलग है और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के रूप में कार्य करती है। टापरी क्षेत्र भू-तापीय जलस्रोत के लिए जाना जाता है, जिसका उपयोग इस परियोजना में किया जा रहा है।

पर्यावरण और कृषि पर प्रभाव
यह इकाई पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित की गई है। भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग से ऊर्जा की खपत में कमी आती है और स्थानीय स्तर पर फलों के संरक्षण और प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होती है। इससे क्षेत्र के किसानों को भंडारण और मूल्य संवर्धन के विकल्प मिल सकते हैं।

अधिकारी और अन्य उपस्थित
इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा और पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान परियोजना की कार्यप्रणाली और इसके विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।