वार्ड नंबर 1 में बगावत की आहट, संजीव मित्तल आजाद मैदान में उतरने की तैयारी
Himachalnow / नाहन
नगर परिषद नाहन के वार्ड नंबर 1 में भाजपा के फैसले से नाराज संजीव मित्तल के आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी से सियासी हलचल बढ़ गई है। भाजपा द्वारा टिकट दिए जाने के बाद यह वार्ड अब त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ता दिख रहा है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस बगावत से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
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नगर परिषद नाहन के वार्ड नंबर 1 में चुनावी सरगर्मी के बीच सियासी बगावत की तस्वीर उभरने लगी है। भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ता माने जाने वाले संजीव मित्तल ने अब पार्टी लाइन से अलग हटकर आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। हालांकि अभी उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया है, लेकिन जल्द ही पर्चा भरने के संकेत दे दिए हैं।सूत्रों के मुताबिक, संजीव मित्तल इस वार्ड से भाजपा के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे और उनका नाम लगभग तय माना जा रहा था।
लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने चौंकाते हुए शुभम सैनी को मैदान में उतार दिया, जिससे मित्तल समर्थकों में नाराजगी खुलकर सामने आ गई।बताया जा रहा है कि वार्ड नंबर 1 पर लंबे समय से भाजपा का कब्जा रहा है। इस बार पूर्व पार्षद और नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद पार्टी के सामने मजबूत उम्मीदवार चुनने की चुनौती थी। ऐसे में मित्तल का नाम सबसे आगे चल रहा था, लेकिन टिकट कटने से समीकरण पूरी तरह बदल गए।
इधर कांग्रेस ने भी इस वार्ड को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है और कपिल गर्ग उर्फ मोंटी को मैदान में उतारा है, जिन्हें मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। ऐसे में यदि संजीव मित्तल आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हैं, तो मुकाबला दिलचस्प होने के साथ-साथ भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के इस फैसले से वार्ड में वोटों का बंटवारा तय है, जिसका सीधा फायदा कांनगर परिषद नाहन के वार्ड नंबर 1 में चुनावी सरगर्मी के बीच सियासी बगावत की तस्वीर उभरने लगी है।
भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ता माने जाने वाले संजीव मित्तल ने अब पार्टी लाइन से अलग हटकर आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। हालांकि अभी उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया है, लेकिन जल्द ही पर्चा भरने के संकेत दे दिए हैं।सूत्रों के मुताबिक, संजीव मित्तल इस वार्ड से भाजपा के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे और उनका नाम लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने चौंकाते हुए शुभम सैनी को मैदान में उतार दिया, जिससे मित्तल समर्थकों में नाराजगी खुलकर सामने आ गई।
बताया जा रहा है कि वार्ड नंबर 1 पर लंबे समय से भाजपा का कब्जा रहा है। इस बार पूर्व पार्षद और नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद पार्टी के सामने मजबूत उम्मीदवार चुनने की चुनौती थी। ऐसे में मित्तल का नाम सबसे आगे चल रहा था, लेकिन टिकट कटने से समीकरण पूरी तरह बदल गए।इधर कांग्रेस ने भी इस वार्ड को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है और कपिल गर्ग उर्फ मोंटी को मैदान में उतारा है, जिन्हें मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। ऐसे में यदि संजीव मित्तल आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हैं, तो मुकाबला दिलचस्प होने के साथ-साथ भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के इस फैसले से वार्ड में वोटों का बंटवारा तय है, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि संजीव मित्तल कब तक आधिकारिक तौर पर चुनावी मैदान में उतरते हैं और यह सियासी बगावत वार्ड नंबर 1 की तस्वीर को कितना बदलती है। उधर संजीव मित्तल का कहना है कि मेरा पहले चुनाव लड़ने का मन नहीं था मगर भाजपा संगठन के द्वारा उन्हें एक नंबर वार्ड से मैदान में उतरने का भरोसा दिया गया था।
मित्तल ने बताया कि अब जब मैं पूरे वार्ड का विजिट भी कर लिया है तो मेरी जगह दूसरे वार्ड के व्यक्ति को चुनाव मैदान में पार्टी की ओर से उतारा गया है। उन्होंने कहा कि अब वह पीछे हटने वाले नहीं हैं लिहाजा आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा जाएगा।ग्रेस को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि संजीव मित्तल कब तक आधिकारिक तौर पर चुनावी मैदान में उतरते हैं और यह सियासी बगावत वार्ड नंबर 1 की तस्वीर को कितना बदलती है।