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1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स कानून, ITR-PAN नियमों में बड़े बदलाव, जानें पूरी डिटेल

हिमाचलनाउ डेस्क 28 Mar 2026 Edited 28 Mar 1 min read

Income Tax Act 2025: देश में 1 अप्रैल से टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। Income-tax Act, 2025 लागू होने के साथ ही अब Income-tax Act, 1961 की जगह नया कानून प्रभाव में आएगा। हालांकि टैक्स स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन ITR फाइलिंग, PAN के उपयोग और आय की रिपोर्टिंग के नियम पहले से ज्यादा सख्त और पारदर्शी हो जाएंगे।

नए कानून के तहत सरकार का फोकस पूरे टैक्स सिस्टम को आसान, डिजिटल और विवाद रहित बनाने पर है। यह बदलाव हर टैक्सपेयर के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब छोटी-छोटी जानकारियों की भी सटीक रिपोर्टिंग जरूरी होगी।

ITR फाइलिंग और टैक्स सिस्टम में बदलाव

अब टैक्सपेयर्स को नया या पुराना टैक्स रिजीम चुनने के लिए अलग फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी। सीधे ITR फॉर्म में ही यह विकल्प दिया जाएगा। इसके अलावा, कुछ शर्तों के साथ दो घर होने पर भी सरल ITR फॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

PAN और ट्रांजैक्शन नियम सख्त

नए नियमों के तहत PAN का इस्तेमाल ज्यादा ट्रांजैक्शन में अनिवार्य हो जाएगा। गाड़ी खरीदने-बेचने या बड़े खर्चों में PAN देना जरूरी होगा। सही जानकारी देने पर टैक्स रिफंड तेजी से मिलेगा, जबकि गड़बड़ी होने पर देरी हो सकती है।

HRA क्लेम के नियम बदले

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब 50 प्रतिशत HRA छूट का दायरा बढ़ाकर बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों तक किया गया है। साथ ही HRA क्लेम करने के लिए मकान मालिक की जानकारी देना अनिवार्य होगा, जिससे फर्जी क्लेम पर रोक लगेगी।

सैलरीड कर्मचारियों को राहत

नए प्रावधानों के तहत मील कूपन और वाउचर (जैसे Sodexo, Pluxee, Zaggle) पर टैक्स छूट बढ़ाई गई है। अब कर्मचारी सालाना 1 लाख रुपये तक टैक्स-फ्री मील बेनिफिट ले सकते हैं, यदि कंपनी यह सुविधा देती है।

क्या नहीं बदला?

नए कानून में टैक्स स्लैब, टैक्स दरें और कोई नया टैक्स नहीं जोड़ा गया है। पुराने अधिकार और दायित्व भी जारी रहेंगे, जिससे टैक्सपेयर्स पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

सरकार का उद्देश्य

नया टैक्स कानून फेसलेस असेसमेंट, डिजिटल कंप्लायंस और कम मानवीय हस्तक्षेप पर आधारित है। इसका उद्देश्य टैक्स विवादों को कम करना और सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाना है।

नया कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसका पहला ITR 2027 में फाइल किया जाएगा। हालांकि PAN, TDS और सैलरी से जुड़े नए नियम तुरंत लागू हो जाएंगे। इसके अलावा, लेबर कोड के लागू होने से सैलरी स्ट्रक्चर में भी बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे टेक-होम सैलरी और टैक्स प्लानिंग प्रभावित होगी।